हमारे देश में अल्पसंख्यक शब्द का बार बार प्रयोग होता है विशेषत: चुनावी मौसम में तो कितने ही नेता वर्षाती मेढक की भांति अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक टर्रा टर्राकर चुनावी वैतरणी से पार उतरने का प्रयास करते हैं। भारत में यह समस्या स्वतंत्रता के पश्चात अधिक विकट हुई है। भारत में इन अल्पसंख्यकों की समस्या के कारण और निवारण के विषय पर चर्चा हम आगे करेंगे। पहले हम यह देखें कि यह अल्पसंख्यकवाद है क्या बला? सन 1950 ईं में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा गठित मानवाधिकार आयोग की एक उपसमिति ने एक प्रस्ताव पारित करते हुए अल्पसंख्यक शब्द की व्याख्या की थी-कि अल्पसंख्यक के अंतर्गत किसी राज्य की जनसंख्या के ऐसे कम से कम शक्ति वाले तत्व आते हैं जो शेष जनसंख्या से भिन्न अपनी नसली, भाषाई अथवा साम्प्रदायिक विशिष्टताओं को बनाये रखना चाहते हैं। ऐसे अल्पसंख्यकों की संख्या इतनी नही होनी चाहिए कि वे अपनी उन विशिष्टताओं को व्यवहारिक रूप से स्थापित रख सकें। दूसरे, ऐसे अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की आस्था उस राज्य के प्रति जिसके कि वह नागरिक है, असंदिग्ध होनी चाहिए।’भारत में अल्पसंख्यकों की राजनीति करने वाले लोग ध्यान दें कि मानवाधिकार आयोग (संयुक्त राष्ट्र) अल्पसंख्यक की क्या परिभाषा करता है? और उन्होंने उसे भारत में किस प्रकार स्थापित कर दिया है? इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की इसी उपसमिति के द्वारा यह भी व्यवस्था की गयी है कि ऐसे अल्पसंख्यकों की संख्या उस राज्य की जनसंख्या की न्यूनतम तीस प्रतिशत होनी चाहिए। इस व्यवस्था और व्याख्या से स्पष्ट है कि किसी भी राज्य में निवास करने वाले ऐसे लोग जो अपनी संख्या में उस राज्य की कुल जनसंख्या के तीस प्रतिशत के लगभग हैं, किंतु अपनी नस्ल, भाषा और सम्प्रदाय की भिन्नता रखते हैं वही अल्पसंख्यक की श्रेणी में आ सकते हैं। भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ की इस उपसमिति के द्वारा अल्पसंख्यकों की इस व्यवस्था के अनुसार कोई भी अल्पसंख्यक नही है, हां हमारे सम्मानित नेताओं ने यहां पर अल्पसंख्यक तैयार अवश्य किये हैं उन्होंने इस अल्पसंख्यक शब्द को कुछ इस प्रकार परिभाषित किया है कि मानो संयुक्त राष्ट्र संघ की उपसमिति कह रही हो कि भाषा और सम्प्रदाय में से केाई एक बात जिस समुदाय पर लागू हो जाए वही अल्पसंख्यक मान लिया जाएगा, अर्थात यदि भारत में भाषा की भिन्नता भी है तो जो लोग अपनी भाषा को भिन्न स्वरूप में बोलते हैं और उसी को बनाये रखना चाहते हैं वे भी अल्पसंख्यक माने जाएंगे। इसी प्रकार संप्रदाय और नस्ल पर विचार किया जा सकता है। यदि भाषाई आधार पर और संप्रदाय के आधार पर भारत में अल्पसंख्यक का निर्धारण किया जाएगा तो यहां इतने अल्पसंख्यक हो जाएंगे कि बहुसंख्यक कौन हैं? यह भी पता नही चलेगा। आज हमारे देश में भाषाई आधार पर विभाजित मानसिकता का जो परिवेश बन गया है उसके पीछे भी यही कारण है कि हमारे नेताओं ने भाषा तक को अलग मान्यता देकर कुछ इस प्रकार का संकेत दिया है कि मानो हमने तुम्हें अल्पसंख्यक की मान्यता दे दी हो। अब तुम अपनी भाषा की पहचान बनाये रखो। भारतीय राष्ट्र के प्रति तुम्हारी निष्ठा असंदिग्ध हो यह हमारे नेताओं ने अनिवार्य नही किया और न ही इस बात पर बल दिया गया। परिणामस्वरूप भाषाओं की पहचान को बनाये रखने के नाम पर यहां लोग ऐसे झगड़ते हैं जैसे वह दो अलग अलग देशों के रहने वाले लोग हों, और उनकी निष्ठा भारतीय राष्ट्र के प्रति कतई भी न हो। इसलिए यह देश कई लोगों को विभिन्न राष्ट्रीयताओं का सम्मिश्रण सा दीखने लगा है। यह प्रवृत्ति कितनी घातक सिद्घ होगी? यह बात तो भविष्य के गर्भ में ही छिपी हुई है? हमारे नेताओं को अल्पसंख्यक शब्द की व्याख्या और विवेचना करते समय ध्यान देना चाहिए था कि अल्पसंख्यक वही समुदाय माना जाएगा जो कि अपनी अलग नस्ल भी रखता है, और भाषा एवं सम्प्रदाय भी अलग रखता है। भारत में हम सबकी नस्ल एक है। यदि रंग रूप में कहीं अंतर दिखाई भी देता है तो वह देश की विशालता और विभिन्न जलवायु होने के कारण है। कश्मीर की जलवायु और तमिलनाडु की जलवायु एक दम भिन्न है, जिसने मानव के रंग, रूप, कद-काठी पर भी अपना प्रभाव दिखाया है। फलस्वरूप दोनों प्रांतों के लोगों में अंतर दीखता है। किंतु यह अंतर नस्ल का अंतर नही है। हमारे पूर्वज एक हैं, हमारा इतिहास एक है, हमारी संस्कृति एक है। यही स्थिति मुस्लिमों के बारे में भी है। उनमें से अधिकांश के पूर्वज भारत के हिंदू ही हैं। इसलिए उनकी नस्ली भिन्नता भारत में सिद्घ नही होती है। यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका या किसी अन्य देश के लोग जो भारत में निवास कर रहे हों और यहां निवास करते करते अपनी नस्ल भाषा और सम्प्रदाय को बनाये और बचाये रखने के लिए चिंतित हों वही लोग भारत में अल्पसंख्यक माने जाएंगे। किंतु ये भी तीस प्रतिशत होने चाहिए। और इनकी आस्था और निष्ठा भारत की एकता और अखंडता के परिप्रेक्ष्य में असंदिग्ध होनी चाहिए, यह भी आवश्यक हो। तीस प्रतिशत संख्या की अनिवार्यता क्यों? अल्पसंख्यक की संख्या को उस राज्य की कुल जनसंख्या का तीस प्रतिशत आवश्यक क्यों माना गया? इस पर विचार किया जाना भी उचित होगा। द्वितीय विश्वयुद्घ की समाप्ति के पश्चात विश्व में उपनिवेशवादी व्यवस्था समाप्त करने पर विशेष बल दिया गया था। अफ्रीका और अमेरिका जैसे महाद्वीपों में यूरोपियन जाति व नस्ल के बहुत से लोग जाकर बस गये थे। उनकी निष्ठा भी उन्हीं देशों के साथ थी जिनमें वे निवास कर रहे थे। परिवर्तित परिस्थितियों में वे अपने मूल देश में आना नही चाहते थे, अथवा उनके मूल देश की सरकारें उन्हें पुन: स्थापित करने में रूचि नही ले रही थीं। ऐसी परिस्थितियों में उन लोगों की विशेष समस्या बनकर उभरी कि इनके जीवन को सुरक्षा प्रदान करने के लिए क्या उपाय किया जाए? तब उनकी समस्या के समाधान के लिए और उन्हें अपने उस देश के प्रति निष्ठावान बनाने के लिए जिसमें कि वे रह रहे थे, यह व्यवस्था की गयी कि ऐसे लोगों की संख्या तीस प्रतिशत होनी चाहिए। यदि इससे कम संख्या है तो ऐसे लोगों से अपेक्षा की जाती है कि उन्हें अल्पसंख्यकों के कोई विशेष अधिकार नही मिलेंगे। अब विचार करें कि क्या भारत में इस परिभाषा के रहते कोई अल्पसंख्यक है?

Follow us on Facebook

Just click on the link.
And login with your account.

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betyap giriş
hititbet giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
jojobet
jojobet
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet