अधिकतम युद्ध जीतने वाले हिंदू राजा ही क्यों पराजित दिखाई जाते हैं ?

शत्रु इतिहास लेखकों द्वारा लिखे गए हमारे इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसमें अधिकतम युद्ध जीतने वाले हिंदू राजाओं को ही पराजित दिखाया जाता है । बहुत ही चालाकी के साथ हमारे हिंदू वीर योद्धाओं के विजयी युद्ध का उल्लेख या तो बहुत संक्षिप्त में किया जाता है या फिर किया ही नहीं जाता है । हमेशा उन्हें पराजित दिखाया जाता है।22 अफगान युद्ध जीतने वाले हेमचंद्र विक्रमादित्यअपनी बात के को स्पष्ट करने के लिए मैं यह कहना चाहूंगा कि अफगानिस्तान हम से रातोंरात नहीं चला गया था , बल्कि अफगानिस्तान को बचाए रखने के लिए कई सौ वर्ष तक हमारे कितने ही हिंदू राजाओं ने युद्ध किए थे और उनमें वह सफल भी रहे थे। परंतु वह सारा का सारा इतिहास आज लगभग लुप्तप्राय हो गया है। एक उदाहरण और देना चाहूंगा , हमारे वीर योद्धा हेमचंद्र विक्रमादित्य ने 1555 ,- 56 में 22 अफगान युद्ध लड़े थे । जिनमें से वह 20 युद्धों को जीतने में सफल हुए थे ,परंतु उनके विजयी युद्ध कहीं भी उल्लिखित नहीं किए जाते हैं।
मेवाड़ के राणा सांगा ने 100 से अधिक युद्ध लड़े, जिनमें मात्र एक युद्ध में पराजित हुए और आज उसी एक युद्ध के बारे में तो हम सब जानते हैं परंतु उनके अन्य विजय युद्ध के बारे में कुछ नहीं जानते , ऐसा लगता है कि जैसे महाराणा संग्राम सिंह का इतिहास इसी पराजित युद्ध से आरंभ हुआ और इसी में समाप्त हो गया ।महाराणा संग्राम सिंहराणा सांगा द्वारा लड़े गए खंडार, अहमदनगर, बाड़ी, गागरोन, बयाना, ईडर, खातौली जैसे युद्धों की बात आती है तोहर इतिहासकार की लेखनी की स्याही सूख जाती है परंतु खानवा का युद्ध आ जाए तो उनकी लेखनी छलांग मारने लगती है।
हमारे इतिहास की पुस्तक से खतौली का वह युद्ध भी लगभग समाप्त सा कर दिया गया है जिसमें महाराणा संग्राम सिंह ने इब्राहिम लोदी को परास्त किया था । इतना ही नहीं इब्राहिम लोदी को महाराणा संग्राम सिंह ने दिल्ली तक खदेड़ा था । इस युद्ध में महाराणा अपना एक हाथ व पैर भी गवा दिये थे । उसके उपरांत भी वह महायोद्धा देश , धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए अंतिम समय तक संघर्ष करता रहा। उसके संघर्ष की गाथा को आज खोजना और उसे सही स्थान दिलाना हम सब के लिए चुनौती बन चुकी है ।
खानवा के युद्ध में महाराणा संग्राम सिंह को प्राप्त दिखाने की घटना को बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है । ऐसे लगता है कि जैसे महाराणा संग्राम सिंह अपने देश व धर्म की रक्षा के लिए युद्ध करके एक अपराध कर रहे थे और बाबर यहां आकर अपना साम्राज्य स्थापित करने के उद्देश्य से जो कुछ भी कर रहा था वह सब कुछ बहुत ही पुण्यमय था।पृथ्वीराज चौहान के द्वारा कथित रूप से 16 बार मोहम्मद गौरी को हराया गया । परंतु उन 16 युद्धों के बारे में हमारे पास कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं है। क्योंकि उनमें हमारे महा योद्धा की जीत हुई थी। जिसमें विदेशी जीता वह युद्ध तो बहुत प्रसिद्धि के साथ इतिहास में स्थान पा गया पर जिसमें हमारे वीर योद्धा ने विदेशी शत्रु को हराया उनके बारे में हमें कुछ नहीं बताया जाता ।
इसी प्रकार अपने महाराणा प्रताप के बारे में सोचिए। उनके और अकबर के मध्य होने वाले हल्दीघाटी के युद्ध को तो हम सब जानते हैं। जिसमें एक षड्यंत्र के अंतर्गत अकबर को जीता हुआ दिखाया जाता है , जबकि सच यह था कि यह युद्ध अनिर्णीत रहा था और अकबर महाराणा प्रताप को जीत नहीं पाया था। इसके पश्चात महाराणा प्रताप ने 1576 से 1585 तक निरंतर अकबर को हर वर्ष होने वाले युद्धों में पराजित किया । एक से एक बड़ा सेनापति और योद्धा अकबर की ओर से महाराणा प्रताप के चित्तौड़ में जाता रहा और पराजित होकर लौटा । उन युद्ध और योद्धाओं के बारे में हमें कुछ भी नहीं बताया जाता । सारा इतिहास मौन साध जाता है। सबकी वाणी को पक्षाघात हो जाता है।
इन महान और गहरे षडयंत्रों को आज बेनकाब करने का समय आ गया है। यदि देशभक्त राष्ट्रवादी लोग आज भी सोते रहे तो समझ लो कि आपका आज का युद्ध आप की अंतिम पराजय लिखने में सहायक होगा। समय रहते चेतना होगा और अपने गौरवपूर्ण इतिहास को समझते हुए उसके अनुसार कदम उठाने होंगे।डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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