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मोदी सरकार ढूंढ रही है मुगल शासक औरंगजेब के भाई दारा शिकोह की कब्र, यह है कारण

कुछ इतिहासकारों का तर्क है कि अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह मुगल काल में ताज पहनते तो महजबी लड़ाईयों में होने वाले हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

संस्कृति मंत्रालय ने हाल में सात सदस्यों की एक टीम का गठन किया है जो मुगल शासक औरंगजेब के भाई दारा शिकोह (1615-59) की कब्र का पता लगाएगी। ऐसा माना जाता है कि दारा शिकोह को दिल्ली में हुमायूं के मकबरे के परिसर में कहीं दफनाया गया था, जहां मुगल वंशजों की करीब 140 कब्रें हैं। दारा शिकोह की कब्र की सटीक जानकारी जुटाने के लिए सरकार ने एएसआई के निदेशक स्मारक टीजे अलोन के नेतृत्व सात सदस्यों की टीम का गठन किया है। टीम में मशहूर पुरातत्वविद आरके बिष्ट, सय्यद जमाल हसन, केएन दिक्षित, बीआर मणि, केके मुहम्मद, सतीष चंद्रा और बीएम पाण्डे शामिल हैं। सरकार ने इस काम के लिए टीम को तीन महीने का समय दिया है।

संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया, ‘किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए तीन महीने को समय को आगे बढ़ाया जा सकता है। टीम कब्र की सटीक पहचान के लिए उस समय की शिल्पविद्या का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा लिखित इतिहास और अन्य जानकारी जिसे सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।’

दारा शिकोह की विरासत

मुगल बादशाह शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह को उत्तराधिकारी की जंग हारने के बाद उनके भाई औरंगजेब ने मौत के घाट उतरवा दिया था। इतिहास में दारा शिकोह को एक उदार मुस्लिम शासक के रूप में वर्णित किया जाता है, जिन्होंने हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समानताएं खोजने की कोशिश की। दारा शिकोह ने फारसी में भगवत गीत के साथ-साथ 52 उपनिषदों का अनुवाद किया था।

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