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इतिहास के पन्नों से

अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित व्यक्ति ही देश का नागरिक होने योग्य

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जो मनुष्य जिस देश में जन्म लेता है उस पर उस देश की मिट्टी का ऋण होता है। उसका शरीर उस देश का अन्न खा कर, उस देश की वायु में श्वास लेकर तथा उस देश का जल पीकर वृद्धि को प्राप्त होता है। जो व्यक्ति अपने देश वा मातृभूमि के प्रति समर्पित नहीं, उसके सत्य गुणों से युक्त मत व धर्म की परम्पराओं को नहीं अपनाता और देश पर विदेशी खतरों तथा आक्रमण के समय उसका खुले दिल से साथ नहीं देता, वह देशभक्त नहीं अपितु देश का शत्रु होता है। यह बात विचार, तर्क एवं भावनात्मक आधार पर सत्य है। आज हमारे देश के सैनिक देश की रक्षा के लिये सेना में जाते हैं और रात दिन अभ्यास करके बहादुर जांबाज सैनिक बनते हैं। उनका एक ही स्वप्न, विचार एवं भावना होती है कि देश के शत्रु को नष्ट कर देंगे। हमारे देश के प्रमुख महापुरुष महाराजा मर्यादा पुरुषोत्तम राम, योगेश्वर श्री कृष्ण जी एवं आचार्य चाणक्य आदि के जीवन से भी हमें यही शिक्षा मिलती है। उन्होंने देश में जितने भी दुष्ट प्रकृति के पुरुष थे, जो सज्जन व साधु प्रकृति के ऋषियों का उत्पीड़न अकारण व मूर्खतावश करते थे, उन सबको समाप्त कर दिया था जिससे देश में सर्वत्र शान्ति का वातारण बना था। ऐसा करना आवश्यक था नहीं तो अहिंसक शान्तिपूर्ण ऋषियों के पास अपने देशहितकारी कार्यों को छोड़कर उन दुष्टों को समाप्त करने के लिये प्रयत्न करना पड़ता जिससे उनके द्वारा वेद एवं सत्य ज्ञान का प्रचार व प्रसार तथा जो सत्य एवं विज्ञान के अनुसंधान सहित ज्ञान की वृद्धि का कार्य वह अपने अपने आश्रमों में करते थे, वह न हो पाता।

वर्तमान में कुछ संगठन व लोग देश में देश विरोधी कार्य कर रहे हैं। वह देश के संविधान व सरकार सहित स्थापित परम्पराओं का भी विरोध करते हैं। सज्जन पुरुषों को डराते हैं। बहुत से राजनीतिक दल अपने सत्ता से जुड़े स्वार्थों के कारण उनका गुप्त व प्रत्यक्ष समर्थन भी करते हैं। हमारे देश के सिस्टम में अनेक प्रकार की न्यूनतायें हैं। यहां त्वरित न्याय की प्रणाली नहीं है। न्याय करने में वर्षों लग लाते हैं। दुष्ट व्यक्तियों को जानते हुए भी सुरक्षा कर्मियों को साक्ष्य जुटाने पड़ते हैं फिर भी उनको दुष्टों के अपराध के अनुरूप दण्ड दिलाने में अनेक कारणों से सफलता नहीं मिलती। इसका लाभ ही अपराधी उठाते हैं और देश को डराते हैं। ऐसी स्थिति में राष्ट्र कमजोर होता है। राष्ट्र की रक्षा करना किसी एक दल व कुछ लोग का काम नहीं होता अपितु यह देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य एवं परम पुनीत धर्म होता है। जो राष्ट्र को अपने किसी भी कार्य से क्षति व हानि पहुंचाता है और पूरे मन से अपने राष्ट्र के लिये समर्पित नही है, उसे ही देश का विरोधी व शत्रु अथवा देशद्रोही कहा जाता है।

आज देश में जो वातावरण है वह सबके सामने हैं। देश के प्रमुख टीवी चैनलों जी टीवी, इण्डिया टीवी और भारत रिपब्लिक आदि पर प्रतिदिन देश में देश विरोधी गतिविधियों को प्रदर्शित किया जा रहा है। सरकार इन देश विरोधी कार्यों को पूर्णतः रोकने में असमर्थ दीख रही है। ऐसा लगता है कि देश में कुछ लोगों ने एक अन्य देश उत्पन्न कर दिया है। कुछ स्थानों पर सरकारी आदेश नहीं चलते वहां के स्वयंभू लोगों के आदेश चलते दीखते अनुभव होते हैं। ऐसे देश व समाज विरोधी लोगों से देश की सरकार को सख्ती से निपटना चाहिये। सरकार को पता है कि किन उद्देश्यों से इन कार्यों को किया जा रहा है और इनके पीछे कौन कौन सी शक्तियां हैं जो इसे संगठित रूप से करा रही है। यह आन्दोलन देश के भी विरुद्ध है और देश की सरकार के भी विरुद्ध है। इसको किसी भी स्थिति में सहन नही किया जा सकता। इसके पीछे की जो शक्तियां हैं, उन्हें सरकार को बेनकाब करना चाहिये व सरकार ऐसा कर भी रही है। प्रतिदिन कुछ नये नये खुलासे होते रहते हैं। ईश्वर की कृपा है कि इस समय देश में एक योग्य सरकार है। वह इस असाधारण स्थिति पर नियंत्रण कर लेगी, इसका सबको विश्वास है। अगर यह सख्त देश हितकारी व देश भक्त सरकार न होती तो देश में इस समय क्या हो रहा होता? इसका अनुमान करना भी कठिन है।

भारत 130 करोड़ लोगों का देश है। यहां पर संविधान ने अपनी बात को शान्तिपूर्वक कहने का अधिकार दिया है। किसी को अधिकार नहीं है कि वह ऐसा कोई कार्य करे जिससे शान्तिपूर्ण अन्य नागरिकों के जीवन में किसी प्रकार से कठिनाई उत्पन्न हो। देश के सभी सच्चे शान्तिप्रिय लोगों को भी देश में घट रही घटनाओं से सबक लेना चाहिये। उन्हें भी देशविरोधी व अलगाववादी शक्तियों के विरुद्ध संगठित होकर देश की सरकार को सहयोग करना चाहिये। ऐसा नहीं करेंगे तो देश की रक्षा हो सकेगी या नहीं, कहना कठिन है। हम इस देश में उत्पन्न हुए हैं। हमने यहां का अन्न, जल, वायु तथा अन्य संसाधनों का सेवन किया है। हमारा वैदिक आर्य हिन्दू धर्म हमें इस देश के प्रति वफादारी करने की शिक्षा व संस्कार देता है। हमें बस इसको बनाये रखकर परस्पर संगठित होना है तभी देश विरोधियों को शिक्षा मिल सकती है। हम संगठित नही होंगे तो देश विरोधी आन्दोलनों में वृद्धि होती रहेगी जिसका परिणाम देश के लिये अच्छा नहीं होगा।

हमें सन् 1947 में देश विभाजन की स्थिति पर भी विचार करना चाहिये। ऐसा क्यों हुआ था और यह किन प्रवृत्तियों का परिणाम था। हमें उन प्रवृत्तियों और परिस्थितियों को पुनः उत्पन्न नहीं होने देना है। हमारा जैसा सामाजिक सिस्टम है उसमें वह उत्पन्न हो सकती हैं व उत्पन्न हो भी चुकी हैं। हमें अपने स्तर से देश को बचाने व उसकी रक्षा में तत्पर रहना है और देश के सच्चे हितैषियों एवं देश की सरकार को पूरा सहयोग करना है। हर बुद्धि से युक्त व्यक्ति को इन बातों को समझ कर अपने परिवार व अपने मित्रों व पड़ोसियों को देश पर छाये हुए संकटों से सावधान करना चाहिये। यह हम सब देशभक्त व समाज के हितकारी भारतीयों का कर्तव्य है। हमस ब संगठि त हों, सरकार का सहयोग करें और देश व समाज में जागृति उत्पन्न कर अपने कर्तव्य का पालन करें। ईश्वर का आशीर्वाद हमें अवश्य मिलेगा और हम सफल होंगे क्योंकि सत्य की हमेशा विजय होती है परन्तु सत्य के लिये पुरुषार्थ एवं बलिदान करना पड़ता है। यह हमें स्मरण रखना चाहिये। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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