भारतीय वामपंथ का कष्टमय प्रसव

son after 10 daughters haryana

लेखक – आर्य सागर

वामपंथ एक वैश्विक विचारधारा है इसका भारतीय वर्जन बहुत ही विषैला कुटिल संकीर्ण है। ताजा तरीन घटनाक्रम से इसे समझते हैं। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक मजदूर परिवार में 10 बेटियों के बाद 11वीं संतान के रूप में अभी कुछ दिन पहले बेटे का जन्म होता है। परिवार में जहां 19 वर्ष बाद पुत्र प्राप्ति की खुशियां मनाई जा रही है जो स्वाभाविक भी है तो वहीं भारतीय वामपंथी धड़ा सोशल मीडिया पर इसे जेंडर अधिकारों का उल्लंघन, पुरुषवादी सोच, पितृसत्ता का वर्चस्व यहां तक की 19 वर्ष में 11 बार मां बनने वाली महिला पुरुषों द्वारा परिभाषित मातृत्व की अमानवीय अवधारणा का शिकार हुई है ऐसा प्रचारित किया जा रहा है। एक वामपंथी नमूने ने तो यहां तक कह डाला 11वीं संतान की यह यात्रा पुत्र प्राप्ति के लक्ष्य के लिए थी पुत्री तो मार्ग में आई हुई केवल छोटा-छोटा बांधा मात्र थी।

यह है भारतीय वामपंथ का पक्षपातपुर्ण कुटिल रवैया। एक वामपंथी विचारक महोदय ने तो सोशल मीडिया पर पूरा स्टडी मैटेरियल इस प्रकरण को लेकर तैयार कर दिया कहा कि भारतीय धर्म संस्कृति में बेटियों का कोई सम्मान नहीं है पुत्रों के लिए तमाम उत्सव होते हैं पुत्री प्राप्ति पर कोई उत्सव नहीं । भारतीय वामपंथी धड़े के साथ यही दिक्कत है कि प्राचीन वैदिक साहित्य सूत्र साहित्य में जहां वैदिक संस्कार कर्मकांड रीति नीति उत्सव पर्वों का विधान है वह समस्त ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गये है रोमिला थापर व इरफान हबीब जैसे वामपंथी इतिहासकारों अन्य आधुनिक कमला भसीन सरीखी सूडो फेमिनिस्टो ने संस्कृत भाषा से अनभिज्ञ होते हुए भी वैदिक ग्रंथ भारतीय संस्कृति धार्मिक ग्रंथो की खूब आलोचना की है।सच तो यह है इन्होंने वैदिक सभ्यता संस्कृति को समझा कहा है।यहां 16 संस्कार व स्मार्त ग्रंथो में जहां-जहां पुत्र शब्द का उल्लेख मिलता है वहां उपलक्षण मात्र से पुत्री शब्द का भी ग्रहण किया जाता है 16 संस्कार चाहे गर्भाधान से लेकर जातकर्म नामकरण मुंडन हो या विवाह सभी में पुत्रों के साथ-साथ पुत्रियो के लिए भी विधान है महर्षि यास्क की पुत्र शब्द की निरुक्ति पुत्रीयो के लिए भी लागू होती है अर्थात पुत्र व पुत्री दोनों ही माता-पिता को दुख व कष्ट से तारते हैं वही मनुस्मृति कार महर्षि मनु ने तो दाय भाग उत्तराधिकार में पुत्री को भी पुत्र के समान अधिकारी माना है पुत्र पुत्री के लिए समान व्यवस्था का विधान मिलता है। बिना संस्कृत व्याकरण निरुक्त शास्त्र मीमांसा दर्शन जो वाक्य शास्त्र है उसका अध्ययन किये बगैर पूर्वापर प्रसंग को समझे भारतीय धार्मिक सामाजिक परंपराओं को नहीं समझा जा सकता‌ लेकिन वामपंथी अपनी आदत से बाज नहीं आते भारत की गौरवशाली परंपराओं को धूमिल करते हैं मनमानी विकृत व्याख्या करते हैं।

उदाहरण के लिए उनके निशाने पर हरियाणा का यह परिवार है जिस परिवार के मुखिया जैसा कि वह मीडिया इंटरव्यू में बता रहे हैं केवल पांचवी पास है लेकिन अपनी 10 बेटियों के साथ उन्होंने कोई भेदभाव नहीं किया बड़ी बेटी बारहवीं कक्षा की छात्रा है सभी बेटियों को वह बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं सभी के लिए भोजन वस्त्र आवास वह उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उपलब्ध करा रहे हैं यह किसी भी वामपंथी को वह भारतीय मीडिया विशेष तौर पर आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को दिखाई नहीं देता जो यह कह रही है कि हरियाणा जैसे राज्यों में जहां पुरुषों के सापेक्ष स्त्रियों की लिंगानुपात की दर आज भी बहुत खराब स्थिति में वहां एक पुत्र की प्राप्ति होने पर एक परिवार उत्सव मना रहा है इस परिवार व समाज को शर्म आनी चाहिए । वामपंथी लॉबी व अंजना ओम कश्यप की दृष्टि में हरियाणा के फतेहाबाद का यह परिवार बहुत बड़ा अपराध कर रहा है वाह जी वाह तरस आता है ऐसे लोगों की बुद्धि पर । आप विचार करें यह परिवार तो हरियाणा का आदर्श परिवार होना चाहिए जिन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए बेटियों को गर्भ में नहीं मारा 10 बेटियों को इस रंग-बिरंगे संसार में यह परिवार लाया उनका पालन पोषण किया वही हरियाणा जहां भूर्ण हत्या सर्वाधिक होती रही है।उस परिवार की 10 बहने बहुत खुश हैं आखिर राखी बांधने के लिए उन्हें एक भाई की कलाई मिल गई है, 19 वर्ष बाद। वैसे वामपंथ रक्षाबंधन जैसे पर्व को भी तथाकथित पितृसत्तात्मक समाज का एक षड्यंत्र मानता है। माता-पिता व बहनों दादा-दादी की खुशी किसी को दिखाई नहीं दे रही । परिवार की नवप्रसुता महिला खुद इंटरव्यू में कह रही है उसे किसी ने भी विवश नहीं किया 11वीं संतान को जन्म देने के लिए उसकी खुद की है हार्दिक इच्छा थी वह तो यह भी कह रही है 11वीं यदि बेटी भी होती तो वह उतनी ही खुशी मनाती जितनी आज मना रही है। यह आदर्श भाव किसी को दिखाई नहीं दे रहा। दिखाई कहां से देगा जब आंखों पर भारतीय सांस्कृतिक धार्मिक द्रोह का चश्मा चढ़ा हुआ है।

लेकिन वामपंथी अपनी आदत से लाचार हैं अपना एजेंडा चला रहे हैं उनकी नजर में 11वीं संतान के रूप में इस पुत्र ने आकर बहुत बड़ा अपराध कर दिया है । परिवार को खुशी देने वाली इस संतान का गुनाह है केवल इतना है कि वह एक पुत्र है। इस पुत्र के इस परिवार में आने से भारत की जेंडर इक्वलिटी की अवधारणा को बहुत गहरा नुकसान पहुंचा है ऐसा वह प्रचारित कर रहे हैं। 11 बच्चों को जनने वाली मां के साथ बहुत बड़ा अत्याचार हुआ है, किसी ने उसे मां से पूछने की जरूरत भी नहीं की कि वह कैसा अनुभव कर रही है । हरियाणा के फतेहाबाद के एक कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के परिवार जिसका मुखिया एक पांचवी पास मजदूर है लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा है जो 10 बेटियों का पिता है अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा दिला रहा है और 11वी संतान के रूप में पुत्र का भी पिता बन गया है उनका समर्पण उनकी उदारता किसी को दिखाई नहीं दे रही,हां यदि यह परिवार मुस्लिम होता तो तब वामपंथी अपना यह ज़हरीला नेरेटिव नहीं चलाते।

लेखक – आर्य सागर
तिलपता ग्रेटर नोएडा

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