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पर्व – त्यौहार भारतीय संस्कृति

वैदिक नव वर्ष के विविध आयाम

लेखक – आर्य सागर

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तदनुसार 30 मार्च रविवार 2025 को सृष्टि संवत 1960853126 वे वर्ष के साथ-साथ वैदिक नव वर्ष (हिंदू नव वर्ष) विक्रमी संवत 2082 का शुभारंभ दिवस है। कालगणना ,ज्योतिष की दृष्टि से वैदिक नववर्ष संसार का सबसे प्राचीन कैलेंडर दिनदर्शिका की रचना करता है जिसकी रचना वैदिक आर्यों ने की ।यह तो केवल इसकी एक विशेषता है वैदिक नववर्ष के विविध आयाम है। वैदिक नव वर्ष ऋतुराज बसंत के मध्य में आता है बसंत के लिए गीता ग्रंथ में श्री कृष्ण ने कहा है कि विविध ऋतु में वसंत हूं । ऐसा नहीं है वसंत भारतवर्ष मे हीं आता है यह इंग्लैंड में भी आता है और अमेरिका में भी आता है इनमें ही क्या दुनिया के सभी 200 के लगभग देशों जो पृथ्वी के दो खंडों अर्थात दो गोलार्ध में स्थित है सभी में वसंत आता है हां यह बात अलग है कहीं यह फरवरी (माघ) में आता है तो कहीं मार्च (फाल्गुन ) महीने में इसका आगमन आता है। वसंत का मनोहारी वातावरण परिवेश सबके मन को हर लेता है धरा का नया ही स्वरूप दिखाई देता है पृथ्वी फूलों की चादर से आच्छादित हो जाती है। सीखने ,सिखाने की दृष्टि से वैदिक नव वर्ष के आसपास का समय बहुत उत्तम होता है। ऐसा इसलिए होता है नव वर्ष चैत्र महीने के आस-पास पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश तेज की वृद्धि दिन की अवधि में वृद्धि के फलस्वरूप मानव मस्तिष्क में डोपामाइन जैसे हार्मोन का स्त्राव अधिकता से होने लगता है डोपामाइन हार्मोन मानसिक सजगता स्मृति एकाग्रता के लिए जिम्मेदार एक जरूरी हारमोन है यह विभिन्न शोधों में सिद्ध है। यही कारण है प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में चैत्र महीने में विद्यार्थियों स्नातकों की परीक्षा का आयोजन किया जाता था। परीक्षा की परिपाटी को आधुनिक मैकाले की शिक्षा पद्धति में भी लागू किया है अधिकांश विद्यालयों की परीक्षाएं मार्च-अप्रैल में ही चलती है।

दुनिया के अनेक भौतिक वनस्पति विज्ञानियों को अपने अनूठे शोध कार्यों की प्रेरणा इसी वसंत में मिली है चार्ल्स डार्विन जैसे नाम इसमें शामिल है मस्तिष्क की सक्रियता इस ऋतु में उत्तम होती है अधिक रक्त संचार के कारण ।हिमालय की पवित्र गोद में आयुर्वेद के अनेक ऋषि-मुनियों की अनेक परिषद इसी ऋतु में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर आयोजित हुई है जिनमें उन्होंने अपने अथक परिश्रम से अर्जित ज्ञान को लोक उपकार के लिए समर्पित कर दिया है अनेक ग्रंथों का लेखन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर पूर्ण हुआ है या इस तिथि से आरंभ किया जाता था ऋषि मुनियों द्वारा ऐसा अनेकों जगह उल्लेख मिलता है। इस संबंध में विस्तृत अध्ययन के लिए साक्ष्य तथ्य उपलब्ध है ,राजा महाराजाओं का राज्य रोहन राज्य अभिषेक के लिए भी यही तिथि सर्वाधिक उपयुक्त रही है कालक्रम इतिहास लेखन की व्यवहारिकता की दृष्टि से धर्मराज युधिष्ठिर से लेकर अनेको चक्रवर्ती सम्राट का राज्य आभिषेक इसी दिन हुआ। 19वीं शताब्दी के महान दार्शनिक योगी स्वाधीनता की क्रांति के अग्रदूत समाज सुधारक महर्षि दयानंद ने क्रांतिकारी वैचारिक संगठन आर्य समाज की स्थापना भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 7 अप्रैल 18 75 को मुंबई महानगर में ही की थी। विषय की ओर लौटते हैं वैदिक नववर्ष के दौरान भारतवर्ष ही नहीं पूरी पृथ्वी पर कोई ऐसी लता औषधि वनस्पति घास झाड़ी शेष नहीं रहती जो पुष्पित पल्लवित ना हो जिस का रूपांतरण ना होता हो… मानो वसुधा का नया जन्म हो जाता है ऐसे में विविध प्रकार के फूलों वनस्पतियों उनके पुष्प क्रम पर अध्ययन में सुविधा होती है प्रकृति की प्रयोगशाला अपने उत्तम संसाधनों से सुसज्जित हो जाती है । नेचुरल साइंस वनस्पति शास्त्र के विद्यार्थियों के लिए यह स्वर्णिम अवसर होता है विविध वनस्पतियों पर अध्ययन शोध के लिए वनस्पतियां अपनी समग्रता को प्राप्त होती है।

वही विविध जीव-जंतुओं की बात करें रीढहीन हो या रीढविहिन हो ठंडे रक्त वाले या गर्म रक्त वाले क्या जलचर क्या नभचर क्या थलचर सभी का प्रजनन संतान उत्पत्ति काल वैदिक नव वर्ष के आसपास सामूहिक व्यापकता से घटित होता है। प्रवासी पक्षियों की बात करें तो पक्षी इस काल के आसपास अपने सैकड़ों हजारों किलोमीटर लंबे परिवास को स्थगित कर देते हैं अपने मूल स्थानों पर लौट जाते हैं मानो वह नववर्ष के आगमन स्वागत में जूटे हुए हो। मानव शरीर का तापमान वर्षभर मानव मस्तिष्क के द्वारा नियंत्रित किया जाता है सर्दियों में वातावरण का ताप न्यूनतम होता है तो शरीर अपनी औसत तापमान 98.6 फॉरेनहाइट पर रहता है गर्मियों में जब पारा 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है तो शरीर अपना तापमान 37 डिग्री सेल्सियस नियत रखता है तापमान के सामंजस्य के लिए शरीर की बहुत सी ऊर्जा खर्च होती है बहुत से हार्मोन का स्त्राव होता है लेकिन वैदिक नववर्ष के आसपास जो मौसम रहता है शरीर को विशेष परिश्रम वातावरण के साथ एडजस्टमेंट के लिए नहीं करना पड़ता है। प्राकृतिक तापमान व मानव शरीर के तापमान मे एकरूपता होती है यही नववर्ष की शरीर क्रिया विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण विशेषता है मानव शरीर में नए रक्त का संचार हो जाता है वैदिक नव वर्ष चैत्र महीने में स्वस्थ व्यक्ति की तो बात छोड़ीये रक्त चर्म विकारों वात विकारों से ग्रसित व्यक्तियों में भी नव नई ऊर्जा का संचार हो जाता है। वैदिक नव वर्ष सभी पक्षों अर्थों में नव वर्ष है। वैदिक मान्यता है वैदिक नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण की शुरुआत की थी साथ ही इसी दिन सृष्टि का निर्माण पूर्ण हुआ वैदिक काल गणना में नवयुगो 14 मंतनवन्तरो का क्रम से आरंभ इसी दिन से होता है यह सभी वैदिक मान्यताएं वनस्पति जीव जगत में घटित होते उपरोक्त वर्णित विविध परिवर्तनों से पुष्ट होती हैं। कल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वैदिक नंववर्ष है अनादि काल से चल रहे सृष्टि यज्ञ मैं इस दिन का विशेष महत्व है इस दिन आप परिवार सहित यज्ञ कर गुरुकुल गौशालाओं में विद्या की वृद्धि हेतु दान दे। पर्यावरण संरक्षण में लगी हुई संस्थाओं परोपकारी संगठनों को दान देकर साथ ही अपने अपने घर प्रतिष्ठानों पर ओउम् ध्वजा बांधकर वैदिक नंववर्ष को धूमधाम से मनाएं आखिर यह किसी देश मान्यता विशेष के मानने वालों का नव वर्ष नहीं है यह अखिल विश्व वसुधा पूरे जीव जगत मनुष्य मात्र का ईश्वर निर्मित नव वर्ष है ना कि मनुष्यों की कल्पना स्वयं निर्मित आस्था से निर्मित, यह सृष्टि का जन्म दिवस है ।इसे मिलजुलकर मनाना चाहिए आप सभी को वैदिक नववर्ष विक्रमी संवत 2083 की हार्दिक शुभकामनाएं!

– आर्य सागर खारी

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