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इतिहास के पन्नों से

शहीद भगत सिंह, राजगुरु , सुखदेव आदि के बलिदान का बदला किसने लिया ?

आज (23 march 2025) शहीद- ए -आजम भगत सिंह, राजगुरु ,सुखदेव जैसे मृत्युंजय वीरों का शहादत दिवस है। ठीक आज ही के दिन लाहौर सेंट्रल जेल में 9 दशक पूर्व भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को अंग्रेजी साम्राज्य ने फांसी दे दी। दिल्ली बम असेंबली कांड लाहौर षड्यंत्र कांड सांडर्स वध के लिए भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को फांसी मिली। यह सभी जानते हैं अंग्रेज पुलिस अधिकारी स्काट ने पंजाब केसरी लाला लाजपत राय व सैकड़ों क्रांतिकारियों पर लाठीचार्ज का अमानवीय आदेश दिया लाठीचार्ज से मिली चोटों से लाला लाजपत राय का बलिदान हो गया। भगत सिंह ने लाला लाजपत राय के बलिदान का प्रतिशोध लिया अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स को गोली से मार कर लेकिन बहुत कम लोग आज भी नही जानते हैं कि राजगुरु सुखदेव भगत सिंह की फांसी का बदला किसने लिया ? छद्म इतिहासकारों फर्जी कलमकारो ने भरसक कुत्सित प्रयास किया क्रांतिकारियों के बलिदान को ही नहीं बल्कि एक क्रांतिकारी के दूसरे क्रांतिकारी के प्रति समर्पण सम्मान आदर्श के भाव को भी छुपाया जाए । शहीद भगत सिंह लाला लाजपत राय को अपना आदर्श मानते थे लाला लाजपत राय आर्य समाज को अपना प्रेरणा स्रोत वैचारिक माता तथा महर्षि दयानंद सरस्वती को अपना धर्म पिता मानते थे । ऐसे ही वीर सावरकर श्यामजी कृष्ण वर्मा को अपना आदर्श मानते थे श्यामजी कृष्ण वर्मा भी महर्षि दयानंद को अपना आदर्श पथ प्रदर्शक मानते थे। शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह सूफी अंबा प्रसाद जैसे क्रांतिकारीयो को अपना आदर्श मानते थे यह बहुत ही आदर्श परंपरा रही है परस्पर क्रांतिकारियों के बीच इस पर जितना लिखा जाए उतना कम। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह शहीद राजगुरु सुखदेव को फांसी दे दी जाती है पूरे देश में आक्रोश फैल जाता है। रह रहकर यह प्रश्न क्रांतिकारी धडो से निकल कर आता है कि अपने 3 नौजवान आदर्श क्रांतिकारी वीरों के बलिदान का बदला कौन लेगा? सब सोच ही रहे होते हैं उसी दौरान अविभाजित भारत व बंगाल प्रांत के कोमिला जनपद की दो किशोरी सुनीति चौधरी ,शांति घोष जिनकी उम्र केवल 16 व 14 वर्ष थी ,वह शहीद- ए -आजम भगत सिंह राजगुरु सुखदेव की शहादत का बदला लेने की ठान लेती है प्रतिशोध की ज्वाला उनके मन में प्रज्वलित हो उठती है। भगत सिंह की शहादत के 9 महीनों के अंदर ही 14 दिसंबर 1931 को यह दोनों वीर बाला कोमिला के अंग्रेज डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सी जी बी स्टीवेन्स कि उसके कार्यालय में घुसकर गोली मारकर हत्या कर देती हैं और अपने प्रण को पूर्ण करती है अपने आदर्श शहीद भगत सिंह राजगुरु सुखदेव के बलिदान का वीरोचित् प्रतिशोध ले लेती है। पूरा ब्रिटिश साम्राज्य दहल उठता है।

स्टीवंस की हत्या करने के बाद अपने अपराध को स्वीकार कर हंसते-हंसते आत्म समर्पण दोनों वीरांगना मौका- ए- वारदात पर कर देती है । उल्लेखनीय है कि दोनों वीरांगना सुनीति चौधरी, शांति घोष बहुत ही सुनियोजित चरणबद्ध तरीके से हत्याकांड को अंजाम देती है। वह स्टीवंस के प्राइवेट सेक्रेटरी से समय लेकर तैराकी क्लब की मान्यता के बहाने स्टीवन से मिलती है मुलाकात के दौरान पहले स्टीवंस को कैंडी चॉकलेट भेंट करती हैं उनमें से कुछ कैंडी चॉकलेट खाकर अंग्रेज कलेक्टर स्टीवंस कहता है बहुत अच्छा, नाइस टेस्ट और फिर दोनों वीरांगना अंग्रेज स्टीवन से कहती हैं ‘अब हमारी पिस्तौल की गोली का स्वाद चखो मिस्टर स्टीवंस’ और यह कहते ही तीन गोलियां स्टीवंस के सीने में उतार देती है। स्टीवंस वही ढेर हो जाता है दम तोड़ देता है। ब्रिटिश खुफिया व पुलिस विभाग में हड़कंप जाता है फरवरी 1932 में ही दोनों किशोरियों को दोषी ठहरा कर उन्हें फांसी ना देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है दोनों किशोरियों को बहुत अफसोस होता है कि उनका बलिदान भगत सिंह की तरह फांसी के फंदे को चूम कर क्यों ना हो सका वह ब्रिटिश सरकार से फांसी की मांग करती हैं 1939 आते-आते तत्कालीन क्रांतिकारियों के दबाव समूह के चलते दोनों किशोरियों को रिहा कर दिया जाता है वह दोनों बालाये अपनी शिक्षा पूरी करती हैं दोनों ने लगभग 70 वर्ष से अधिक आयु का जीवन पाया लेकिन अफसोस आज तक भी उनके विषय में कोई नहीं जानता कैसे उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया हालांकि दोनों ने शादी की परिवार बसाया आज भी उनके पारिवारिक जन कोलकाता मुंबई जैसे महानगरों में रह रहे हैं लेकिन उनके भीषण पराक्रमी कार्यों का उचित सम्मान उन्हें जीते जी नहीं मिला आज भी हमें फर्जी इतिहास दबाया छुपाया स्वाधीनता संग्राम का संघर्ष पढ़ाया जा रहा है अंग्रेजों ने इस घटनाक्रम को छुपाया यह उनका सोचा समझा दूरगामी षड्यंत्र था लेकिन आजादी के बाद अधिकांश भारत सरकारों की क्या मजबूरी थी यही प्रश्न आज हमें शहीद ए आजम भगत सिंह राजगुरु सुखदेव की शहादत दिवस पर जवाबदेह संस्थानों से पूछना चाहिए क्या क्रांतिकारियों के सपनों का भारत हमने बनाया है? बहुत दुख होता है जब वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में हमारा स्थान नीचे से शुरु होता है नेपाल भूटान श्रीलंका जैसे देश बाजी मार लेते हैं 80 करोड लोग आज भी खाद्यान्न पा रहे हैं सरकारी तंत्र को बहु कुछ अभी करना होगा अभी।

– आर्य सागर
ग्रेटर नोएडा

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