सामाजिक और धार्मिक क्रांति के अग्रदूत गुरु नानक देव

gurunanak

गुरुनानक देव जयन्ती- 15 नवम्बर 2024 के उपलक्ष्य में
-ललित गर्ग –

भारतीय संस्कृति में गुरु नानकदेव एक महान पवित्र आत्मा थे, वे ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि थेे। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। अणु को विराट के साथ एवं आत्मा को परमात्मा के साथ एवं आत्मज्ञान को प्राप्त करने के एक नए मार्ग की परंपरा का सूत्रपात गुरुनानक ने किया है, यह किसी धर्म की स्थापना नहीं थी। उन्होंने परम सत्ता या संपूर्ण चेतन सत्ता के साथ तादात्म्य स्थापित करने का मार्ग बताया। यही वह सार्वभौम तत्व है, जो मानव समुदाय को ही नहीं, समस्त प्राणी जगत् को एकता के सूत्र में बांधे हुए हैं। इसी सूत्र को अपने अनुयायियों में प्रभावी ढंग से सम्प्रेषित करते हुए ‘सिख’ समुदाय के प्रथम धर्मगुरु नानक देव ने मानवता एवं सर्वधर्म सद्भाव का पाठ पढ़ाया। उन्होंने समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने के लिए लंगर परंपरा की शुरुआत की थी, जहां गरीब-राजा, ऊंच-नीच सभी लंगर खाते थे। उन्होंने ‘निर्गुण उपासना’ पर जोर दिया और उसका ही प्रचार-प्रसार किया। वे मूर्ति पूजा नहीं करते थे और न ही मानते थे। ईश्वर एक है, वह सर्वशक्तिमान है, वही सत्य है, इसमें ही नानक देव का पूरा विश्वास था। उनका धर्म और अध्यात्म लौकिक तथा पारलौकिक सुख-समृद्धि के लिए श्रम, शक्ति, भक्ति एवं मनोयोग के सम्यक नियोजन की प्रेरणा देता है।
गुरु नानक देव की शिक्षाएं आज अधिक प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने मानवता और सत्कर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया था। उन्होंने समाज में कई बदलाव लाने का काम किया, उन्होंने स्त्रियों को पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा दिया और वैवाहिक जीवन को पवित्र माना। उन्होंने कहा कि विद्यालय में सभी धर्म, जाति, और सम्प्रदाय के लोगों को समान रूप से शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने आडंबर और अंधविश्वासों का खंडन किया और ईश्वर की प्रत्यक्ष भक्ति पर ज़ोर दिया। उन्होंने अंतर-धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए संवादों का महत्व बताया और निस्वार्थ सेवा को बढ़ावा देते हुए करुणा, परोपकारिता और ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दिया।
गुरुनानक का जन्म 1469 में लाहौर के निकट तलवंडी में हुआ था। दीपावली के पन्द्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को जन्में गुरु नानक देव सर्वधर्म सद्भाव की प्रेरक मिसाल है। उनके जन्म दिन को हम प्रकाश पर्व, गुरु पर्व, गुरु पूरब भी कहते हैं। वे अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्म-सुधारक, समाज सुधारक, कवि, देशभक्त एवं विश्वबंधु – सभी गुणों को समेटे हैं। उनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लगे थे। वे किशोरावस्था में ही सांसारिक विषयों के प्रति उदासीन हो गये थे। गुरुनानक देव एक महापुरुष व महान धर्म प्रवर्तक थे जिन्होंने विश्व से सांसारिक अज्ञानता को दूर कर आध्यात्मिक शक्ति को आत्मसात् करने हेतु प्रेरित किया। उनका कथन है- रैन गवाई सोई कै, दिवसु गवाया खाय। हीरे जैसा जन्मु है, कौड़ी बदले जाय। उनकी दृष्टि में ईश्वर सर्वव्यापी है और यह मनुष्य जीवन उसकी अनमोल देन है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्हें हम धर्मक्रांति के साथ-साथ समाजक्रांति का प्रेरक कह सकते हैं। उन्होंने एक तरह से सनातन धर्म को ही अपने भीतरी अनुभवों से एक नयेे रूप में व्याख्यायित किया।
गुरु नानकजी ने गुलामी, नस्लीय भेदभाव, और लिंगभेद की निंदा की। वे कहते थे कि पैसे हमेशा जेब में होने चाहिए, हृदय में नहीं। मनुष्य को लोभ का त्याग करना चाहिए और सदैव परिश्रम से धन कमाना चाहिए। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। आपके स्वभाव में चिंतनशीलता थी तथा आप एकांतप्रिय थे। आपका मन स्कूली शिक्षा की अपेक्षा साधु-संतों व विद्वानों की संगति में अधिक रमता था। बालक नानक ने संस्कृत, अरबी व फारसी भाषा का ज्ञान घर पर रहकर ही अर्जित किया। इनके पिता ने जब पुत्र में सांसारिक विरक्ति का भाव देखा तो उन्हें पुनः भौतिकता की ओर आसक्त करने के उद्देश्य से पशुपालन का कार्य सौंपा। फिर भी नानकदेव का अधिकांश समय ईश्वर भक्ति और साधना में व्यतीत होता था।
नानक के बचपन में ही अनेक अद्भुत घटनाएँ घटित हुईं जिनसे लोगों ने समझ लिया कि नानक एक असाधरण बालक है। कहते हैं कि नानकदेवजी से ही हिंदुस्तान को पहली बार हिंदुस्तान नाम मिला। लगभग 1526 में जब बाबर द्वारा देश पर हमला करने के बाद गुरु नानकदेवजी ने कुछ शब्द कहे थे तो उन शब्दों में पहली बार हिंदुस्तान शब्द का उच्चारण हुआ था- खुरासान खसमाना कीआ हिंदुस्तान डराईआ। एक और घटना है- नानक ग्रीष्म ऋतु की चिलचिलाती धूप में किसी ग्राम में गए। वहाँ वे गर्मी से बेहाल विश्राम करने के लिए बैठ गए। उन्हें कब नींद आ गई पता ही नहीं चला क्योंकि एक बड़े सर्प ने अपना फन फैलाकर उन्हें छाया प्रदान कर दी थी। गाँववाले यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। गाँव के मुखिया ने उन्हें देवस्वरूप समझकर प्रणाम किया। तभी से नानक के नाम के आगे ‘देव‘ शब्द जुड़ गया। वे कालांतर में ‘गुरु नानकदेव‘ के नाम से विख्यात हुए। उनका उद्देश्य भी भारतीय धर्म और संस्कृति की रक्षा करना ही था। गुरुनानक देव का जीवन सदैव समाज के उत्थान में बीता। गुरुनानक देव जी ने न केवल शिक्षाएं दीं, बल्कि स्वयं भी इसका पालन किया। उन्होंने करतारपुर साहिब में बिताए अपने जीवन के आखिरी 18 वर्षों में खेतों में हल चला कर यह बताया कि हर इंसान को अपने जीवन में मेहनत करनी चाहिए। एक अन्य रोचक घटना में उनके पिता ने उन्हें गृहस्थ आश्रम की ओर ध्यानाकर्षित करने के लिए तत्कालीन नबाव लोदी खाँ के यहाँ नौकरी दिलवा दी। वहाँ उन्हें भंडार निरीक्षक की नौकरी प्राप्त हुई। परंतु नानक वहाँ भी साधु-संतों पर बेहिसाब खर्च करते रहे। इसकी शिकायत नवाब तक पहुँची तब उसने नानक के खिलाफ जाँच के आदेश दे दिए। परंतु आश्चर्य की बात यह थी कि उस जाँच में कोई कमी नहीं पाई गई। एक बार नानकदेव भ्रमण के दौरान मक्का पहुँचे। वह थकान के कारण काबा की ओर पैर करके सो गए। जब वहाँ के मुसलमानों ने यह दृश्य देखा तो वे अत्यधिक क्रोधित हुए। चमत्कार उस समय घटित हुआ जब लोग उनका पैर जिस दिशा में करते उन्हें उसी दिशा में काबा के दर्शन होते। यह देखकर सभी ने उनसे श्रद्धापूर्वक क्षमा माँगी।
गुरु नानक देव ने ‘गुरुग्रंथ साहब’ नामक ग्रंथ की रचना की । यह ग्रंथ पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि में है । इसमें कबीर, रैदास व मलूकदास जैसे भक्त कवियों की वाणियाँ सम्मिलित हैं। 70 वर्षीय गुरुनानक सन् 1539 ई॰ में अमरत्व को प्राप्त कर गए। श्री गुरुनानक देवजी के सबसे निकटस्थ शिष्य मरदाना को माना जाता है जो कि जाति से मुसलमान थे। आप देखिये नानक देवजी के तप का प्रभाव कि मरदाना ने अपना पूरा जीवन गुरुनानकजी के सेवा में गुजारा। सैकडों साल पुराने सामाजिक सच, आज के सच हों, यह जरूरी नहीं है। अतः सत्य की खोज के लिए गतिशीलता एवं विवेक की अपेक्षा है। उन्होंने परम चक्षु-अंतर्दृष्टि को जगा और श्रेष्ठताओं के संवर्धन हेतु विशिष्ट पराक्रम किया। इसका तात्पर्य यह है कि आध्यात्मिक विकास हेतु विवेकयुक्त पुरुषार्थ की नितांत अपेक्षा रहती है। एक बार कुछ लोगों ने गुरुनानक देव से पूछा कि हमें यह बताइए कि आपके अनुसार हिंदू बड़ा है या मुसलमान तो गुरु साहिब ने उत्तर दिया, ‘अवल अल्लाह नूर उपाइया कुदरत के सब बंदे, एक नूर से सब जग उपजया कौन भले कौन मंदे।’ यानी सब इंसान ईश्वर के पैदा किए हुए हैं, न तो हिंदू कहलाने वाला भगवान की नजर में कबूल है, न मुसलमान कहलाने वाला। रब की निगाह में वही बंदा ऊंचा है जिसका अमल नेक हो, जिसका आचरण सच्चा हो। इस तरह गुरुनानक देव सच्चे गुरु एवं परमात्मा स्वरूप हैं।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
meritking giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
meybet
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meritbet giriş
meritbet giriş
vaycasino giriş
piabellacasino giriş
piabellacasino giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
pokerklas
pokerklas
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
pokerklas
pokerklas
hititbet giriş
Pokerklas giriş
pokerklas
pokerklas
hititbet
hititbet
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betorder
betorder
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
timebet
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
meybet
meybet
vdcasino
vdcasino
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
meybet
meybet
betcio giriş
betcio giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
timebet
norabahis giriş
norabahis giriş
meybet
meybet
harbiwin giriş
harbiwin giriş
betnano giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
norabahis
favorisen giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
meybet
norabahis giriş
norabahis giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
maritbet giriş
maritbet
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet
hititbet
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino