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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा स्वर्णिम इतिहास

मेरी पुस्तक ‘भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा’ ( है बलिदानी इतिहास हमारा ) अब छपकर हुई तैयार

इस पुस्तक का उपसंहार इस प्रकार है :- स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भारत जब अपने वर्तमान दौर में प्रविष्ट हुआ तो भारत की सत्ता की कमान गांधीजी के राजनीतिक शिष्य नेहरू जी के हाथों में आई। दुर्भाग्यवश नेहरु जी ने भारत की छद्म अहिंसा को इस देश का मौलिक संस्कार बनाने का प्रयास किया । […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदान इतिहास हमारा) अध्याय – 19 (ग) अंग्रेजों ने भारत क्रांति -भय से छोड़ा था , गांधी के कारण नहीं

अंग्रेज चाहते थे देश को कई टुकड़ों में बांटना भारत के इतिहास का यह एक विडम्बना पूर्ण तथ्य है कि जिस स्वतन्त्रता की लड़ाई को यह देश 1235 वर्ष तक ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ – के आधार पर लड़ता रहा , उसी स्वतन्त्रता के मिलने का जब समय आया तो स्वतन्त्रता के आन्दोलन पर […]

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स्वर्णिम इतिहास

प्राचीन युग में भारतीय-ध्वज का स्वरूप

गुंजन अग्रवाल सनातन धर्म में ध्वज का स्थान बहुत ऊंचा है। भारतवर्ष में ध्वज का उपयोग सनातन काल से ही हो रहा है। वेदों की प्रसिद्ध उक्ति है – अस्माकमिन्द्र: समृतेषु ध्वजेष्वस्माकं या इषवस्ता जयन्तु। अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु।। ऋग्वेद, 10-103-11, अथर्ववेद, 19-13-11 अर्थात्, हमारे ध्वज फहराते रहें, हमारे बाण विजय […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा )अध्याय – 19 (क) अंत में हमारा बलिदानी इतिहास ही जीता

अन्त में हमारा बलिदानी इतिहास ही जीता गांधी जी और उनकी कांग्रेस जहाँ ब्रिटिश राजभक्ति के लिए जानी जाती है वहीं मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए भी जानी जाती है। गांधीजी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति की आलोचना करते हुए स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने 1937 में 30 दिसम्बर को अहमदाबाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा के […]

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राष्ट्र का गौरव है चित्तौडग़ढ़ का किला

विवेक भटनागर शौर्य और शक्ति के प्रतीक मेवाड़ और चित्तौडग़ढ़ का अपना अस्तित्व सिर्फ किसी जौहर और युद्ध से नहीं है। हम कह सकते हैं कि यह किसी न किसी प्रकार से उत्तर भारत की स्थापत्य कला का शानदार संग्रह भी है। वैसे चित्तौड़ के निर्माता कौन थे, इसके ठोस प्रमाण कहीं से भी प्राप्त […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा ( है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय — 18 (ख) जब 32 वर्ष पहले देश हो जाता आजाद

इन क्रान्तिकारियों में चापेकर बन्धु , खुदीराम बोस , रासबिहारी बोस , महर्षि अरविन्द , मदनलाल धींगरा, चन्द्रशेखर आजाद , सुभाष चन्द्र बोस, लाला हरदयाल, वीर सावरकर, राम प्रसाद बिस्मिल, देवता स्वरूप भाई परमानन्द जी, श्यामजी कृष्ण वर्मा , महादेव गोविन्द रानाडे , विजय सिंह पथिक , देशबन्धु चितरंजन दास आदि हजारों नहीं लाखों क्रान्तिकारी […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 18(क) गांधी जी की अहिंसा बनाम स्वामी श्रद्धानंद जी की क्रांति

इन्द्र विद्यावाचस्पति लिखते हैं :–” जब लम्बी दासता से बंजर हुई भारत की भूमि को सशस्त्र क्रान्ति के विशाल हल ने खोदकर तैयार कर दिया और जब सुधारकों के दल ने उसमें मानसिक स्वाधीनता के बीज बो दिए , तब यह सम्भव हो गया कि उसमें से राजनीतिक स्वाधीनता के बिना सामाजिक स्वाधीनता और सामाजिक […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदान इतिहास हमारा) अध्याय -17 (ख ) 18 57 की क्रांति अर्थात हमारा पहला अंग्रेजों ! भारत छोड़ो आंदोलन

1857 में चला था पहला ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ 1857 की क्रांति के इस प्रकार के विस्तृत योजनाबद्ध विवरण से पता चलता है कि उस समय भारत में पहला ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रारम्भ हुआ था ।यह तभी सम्भव हुआ था जब हमारे भीतर आजादी की ललक काम कर रही थी। कुछ लोगों ने 1857 की क्रान्ति […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा (है बलिदानी इतिहास हमारा ) अध्याय – 17 (क) बाबा औघड़नाथ अर्थात महर्षि दयानंद और 18 57 की क्रांति

1857 का ‘अंग्रेजो ! भारत छोड़ो आन्दोलन’ सर चार्ल्स ट्रेवेलियन ने सन 1853 की संसदीय समिति के सामने ‘भारत की अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों के अलग-अलग राजनीतिक परिणाम’ – शीर्षक से एक लेख लिखकर प्रस्तुत किया था । इस लेख में उसने लिखा था कि :- “भारतीय राष्ट्र के विचारों को दूसरी ओर मोड़ने का केवल […]

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भारतीय क्षत्रिय धर्म और अहिंसा ( है बलिदान इतिहास हमारा ) अध्याय -16 ( ख) भारत में अंग्रेजों के शासन काल के 100 वर्षों में हुए विद्रोहों की सूची

महाराष्ट्र मण्डल की स्थापना 1757 में हुए पलासी के युद्ध के पश्चात किस प्रकार अंग्रेज भारत में जम गए और उन्होंने अपना साम्राज्य विस्तार करना आरम्भ किया ? – इतिहास का यह निराशाजनक तथ्य तो हमें बताया व पढ़ाया जाता है परंतु इसी समय सिंधिया , होलकर , गायकवाड और भौसले जैसे चार राजघरानों के […]

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