महात्मा गांधी के पुत्र हरिलाल गाँधी ने 27 जून 1936 को नागपुर में इस्लाम कबूल किया था और 29 जून 1936 को मुंबई में उसने इसकी सार्वजनिक घोषणा की कि वो हरिलाल गाँधी से अब्दुल्लाह बन गया है। 1 जुलाई 1936 को जकारिया ने अब्दुल्लाह के घर की बैठक में बैठे हुए रोष भरे शब्दों […]
Category: इतिहास के पन्नों से
(के.एस. तूफान – विभूति फीचर्स) साहित्य समाज का दर्पण है। जिस प्रकार का समाज होगा, साहित्य भी उसी प्रकार रचा जाएगा। दलित चेतना का काल हम रामायणकाल से ही मान सकते हैं, हालांकि उस समय दलितों के पक्ष में कोई खास नहीं लिखा गया और जो लिखा भी गया, वह आज की भांति न तो […]
लेखक :- श्री पंडित जगदेव सिंह सिद्धांति इतिहास संरक्षक :- चौधरी कबूल सिंह शोरों (मुज्जफरनगर) प्रस्तुति :- अमित सिवाहा वर्तमान सृष्टि के आरम्भ काल में ही आर्यावर्त में मानव जाति ने वास कर लिया था। समयानुसार आर्यावर्त भारत नाम से विख्यात हुआ। इस प्रकार भारतीय राष्ट्र का इतिहास अति प्राचीन है। गत करोड़ वर्षों के […]
अहले सुन्नत के मुताबिक संगीत हराम है। इसलिये जो कोई भी मुसलमान इसमें अतीत में शामिल रहा है या वर्तमान में है या भविष्य मेंं होगा वह सुन्नत ए रसूल के मुताबिक क्या कहलाया जायेगा ? ऐसा ही एक हरामखोर था औरंगजेब। क्योंकि उसने जहां एक तरफ संगीत को दफन किया वहीं दूसरी तरफ संगीत […]
-प्रियांशु सेठ आर्यसमाज ने विभिन्न सम्प्रदायों के अनुयायियों की शुद्धि कर उन्हें वैदिक धर्म में दीक्षित करके उनपर महान् उपकार किये हैं। ईश्वर के सत्य स्वरूप से परिचित कराकर उसको पाने का वेदोक्त मार्ग बतलाना आर्यसमाज का जन सामान्य पर सबसे बड़ा उपकार है। आर्यसमाज के वेदोक्त विचारों ने जहां अपना प्रभाव सत्यप्रेमी और निष्पक्ष […]
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी राजा सगर संतानहीन थे :- भगवान राम के पूर्वजों में राजा सगर एक महत्त्व पूर्ण राजा हुए थे। राजा सगर की दो पत्नियाँ थीं जिन्होंने अपनी तपस्या से उनके पापों को दूर कर दिया था। उन्हें लंबे समय तक कोई संतान नहीं हुई, इसलिए वे अपनी दोनों पत्नियों के साथ हिमालय […]
Dr DK Garg यधपि गौतम बुद्ध ने चार वेद नहीं पढ़े थे। क्योंकि प्रारम्भ से ही उनके मन में वेद ज्ञान के प्रति भ्रांतिया पैदा कर दी गयी थे। परन्तु गौतम बुद्ध द्वारा जो चार आर्य सत्य बताए है वह चारो वेदो के प्रति उनकी श्रद्धा और इन चार वेदों में मुख्यत क्या है ,ये […]
सन 1757 तुर्क लुटेरा अहमद शाह अब्दाली लूटपाट करता पंजाब में घुसा। आम बाजारों को लूटना, सामान्य जन का सामूहिक कत्लेआम, स्त्रियों बच्चों को गुलाम बनाना तो सामान्य बात थी, पर इसके अतिरिक्त एक और काम हुआ। अमृतसर स्वर्ण मंदिर को अपवित्र कर दिया गया। तालाब में गाय काट कर डाली गई, और मन्दिर पर […]
आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी च्वयन आश्रम पर सगर का जन्म :- अयोध्या के राजा बाहु का राज्य पूर्व में शकों के साथ आए हैहयों और तालजंघों ने छीन लिया था। यवन, पारद, कम्बोज, पहलव (और शक), इन पांच कुलों (राजाओं के) ने हैहयों के लिए और उनकी ओर से हमला किया। शत्रुओं ने बाहु […]
* (डॉ. मोहन यादव-विनायक फीचर्स) भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल एक काले और क्रूर अध्याय के रूप में है। इस दिन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल के प्रावधानों के तहत हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। भारतीय […]