क्या आपको डोकलाम याद है ? आपने चीन की उस हरकत को किस नजरिये से देखा था ? अगर आपको याद हो तो डोकलाम का संकट शुरू हुआ था 16 जून 2017 से ! जिस दिन वह संकट प्रारम्भ हुआ उस दिन तक भारतीय मीडिया में क्या प्रमुख खबर चल रही थी, क्या आपको याद […]
क्या आपको डोकलाम याद है ? आपने चीन की उस हरकत को किस नजरिये से देखा था ? अगर आपको याद हो तो डोकलाम का संकट शुरू हुआ था 16 जून 2017 से ! जिस दिन वह संकट प्रारम्भ हुआ उस दिन तक भारतीय मीडिया में क्या प्रमुख खबर चल रही थी, क्या आपको याद […]
उत्तरी दिल्ली के बवाना गांव निवासी स्वर्गीय श्री न्यादर सिंह के परिवार ने बीते सोमवार को ईद वाले दिन मुस्लिम धर्म को छोड़कर वापिस हिंदू धर्म अपना लिया। धोबी समाज से संबंध रखने वाले स्वर्गीय श्री न्यादर सिंह के चार पुत्र हैं । सबसे बड़े पुत्र श्री कप्तान सिंह जी ने भारतीय सेना में अपने […]
भारत मे 2 झूठ बोले जाते हैं :– 1 कानून सबके लिए समान है। 2 शासन की दृष्टि मे सभी धर्म समान हैं। पालघर मे साधुओं की नृशंस हत्या पर न्यायालय मौन है पर उत्तरप्रदेश मे दंगाइयों को बचाते समय जज साहब को कानून याद आ जाता है। एक खबर मे आंशिक गलती पर opindia […]
इस लेख में आप मुंबई को कोई एक शहर का नाम नही बल्कि सभी बड़े नगरों व प्रवासी मजदूरों को रखने वाले राज्यों का एक प्रतिनिधि नाम समझें। मुंबई शब्द को एक प्रवृत्ति माने जो इन दिनों मेहनतकश, गरीब और गांव छोड़कर शहर आये हुए लोगों को हिकारत, नीची और उपेक्षा भरी दृष्टि से देख […]
जब लद्दाख में चीन भारत के विरुद्ध अपनी सेना बढ़ा रहा है और वहां पर दोनों देशों के बीच तल्खी कुछ अधिक ही बढ़ती जा रही है , तब चीन और भारत के बीच में पड़ने वाला नेपाल भी भारत को आंखें दिखाने लगा है । जिससे शंका होती है कि नेपाल की इस प्रकार […]
लोकेन्द्र सिंह (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से जुड़े रहे हैं।) स्वदेशी का विचार लोगों के मन में बैठ गया तो लाखों लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। स्थानीय प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिलगा। उनके उत्पाद की मांग बढ़ेगी तो किसे लाभ […]
अजय कुमार जनता को परेशानियों से बचाने के लिए लॉकडाउन के दौरान राशन-पानी, दूध-सब्जी-फल की दुकानें, मेडिकल स्टोर, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें, रिपेयरिंग सेंटर तक खुल रहे हैं तब निजी चिकित्सक अपने क्लीनिक या नर्सिंग होम खोलने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं। कोरोना महामारी के समय जब इसके संक्रमण को रोकने […]
डा. प्रदीप श्याम रंजन 21वीं सदी अपनी पूरी शक्ति से गतिमान है और इस वेग के बहाव में कई चीजें चाहे-अनचाहे अपना स्वरुप परिवर्तित कर रही हैं. संकुचित परिवार, ब्यस्त माता-पिता, ब्यस्तता से उपजा समयाभाव और समयाभाव की आभासी प्रतिपूर्ति करते तकनीकी साधनों पर अतिनिर्भरता के फलस्वरुप बचपन की एक विश॓ष किस्म विकसित होती जा […]
सुरेश जैन 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जी का दुनिया को जियो और जीने दो का संदेश हम सब के मनन और चिंतन में फिर से जागृत हो गया है। लॉकडाउन में शहरों और छोटे कस्बों की बात करें तो पशु-पक्षियों के प्रेम और दया में वृद्धि हुई है। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस मानव […]
शिव त्रिपाठी सर्वाधिक दुर्दशा देश के असंगठित क्षेत्र के उन करोड़ों मजदूरों को झेलनी पड़ी है व पड़ रही है जो खासकर दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक आदि राज्यों में वर्षों से रोजी रोटी कमाकर अपने व अपने परिवारजनों का पेट पाल रहे थे। कोरोना महामारी के चलते सर्वाधिक दुगर्ति देश के असंगठित […]