तुलसी के राम बाल्मीकि के राम से कई रूपों में भिन्न हैं। ऐसा प्रक्षेपों के कारण तो हुआ ही है साथ ही अर्थ का अनर्थ कर देने से भी हुआ है। असंगत अर्थों को और अतार्किक बातों को हमने पत्थर की लकीर मान लिया और लकीर के फकीर बनकर उन असंगत अर्थों को तोता की […]
Category: डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से
‘किसी भी भाषा के एक ही शब्द में थोड़ा परिवर्तन कर देने मात्र से शब्दों के अर्थों में परिवर्तन आ जाया करता है। जैसे ताप, संताप, प्रताप और परिताप। ताप का अर्थ गर्मी है, संताप का अर्थ है-जो व्यक्ति को व्यथित करे, दुखी करे, प्रताप का अर्थ है जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित […]
‘किसी भी भाषा के एक ही शब्द में थोड़ा परिवर्तन कर देने मात्र से शब्दों के अर्थों में परिवर्तन आ जाया करता है। जैसे ताप, संताप, प्रताप और परिताप। ताप का अर्थ गर्मी है, संताप का अर्थ है-जो व्यक्ति को व्यथित करे, दुखी करे, प्रताप का अर्थ है जो किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित […]
हमारे यहां दीपावली का पर्व सृष्टि के प्रारंभ से ही मनाया जाता रहा है। इस पर्व का विशेष महत्व है। दीपों का यह प्रकाश पर्व हमारे अंत: करण में व्याप्त अज्ञान अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश करने का प्रतीक पर्व है। हमारे यहां पर प्रत्येक सद्गृहस्थ के लिए आवश्यक था कि घर में अग्नि […]
हमारे यहां दीपावली का पर्व सृष्टि के प्रारंभ से ही मनाया जाता रहा है। इस पर्व का विशेष महत्व है। दीपों का यह प्रकाश पर्व हमारे अंत: करण में व्याप्त अज्ञान अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश करने का प्रतीक पर्व है। हमारे यहां पर प्रत्येक सद्गृहस्थ के लिए आवश्यक था कि घर में अग्नि […]
हमारे देश में अल्पसंख्यक शब्द का बार बार प्रयोग होता है विशेषत: चुनावी मौसम में तो कितने ही नेता वर्षाती मेढक की भांति अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक टर्रा टर्राकर चुनावी वैतरणी से पार उतरने का प्रयास करते हैं। भारत में यह समस्या स्वतंत्रता के पश्चात अधिक विकट हुई है। भारत में इन अल्पसंख्यकों की समस्या के कारण […]
हमारे देश में अल्पसंख्यक शब्द का बार बार प्रयोग होता है विशेषत: चुनावी मौसम में तो कितने ही नेता वर्षाती मेढक की भांति अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक टर्रा टर्राकर चुनावी वैतरणी से पार उतरने का प्रयास करते हैं। भारत में यह समस्या स्वतंत्रता के पश्चात अधिक विकट हुई है। भारत में इन अल्पसंख्यकों की समस्या के कारण […]
खुलेपन और आधुनिकता के नाम पर भारत में नित्य प्रति कुछ ऐसी घटनायें घटित हो रही हैं कि जो भारतीयता के लिए ही नही अपितु वैश्विक समाज के लिए भी संकटप्रद सिद्घ होंगी। खुलेपन और आधुनिकता को मानवाधिकारों के साथ कुछ इस प्रकार जोड़कर दिखाने का प्रयास किया जाता है कि उनसे मानवाधिकारों का मानो […]
पुरोहित कपिल दो सोने की मोहरें पाने के लिए राजा को आशीर्वाद देने गये। राजा ने कहा-”जितना चाहिए मांग लो।” कपिल के मन में लोभ आ गया। वे बोले-”राज सोचकर आता हूं।” कपिल सोचने लगे-दो सोने की मोहरों से क्या होगा? चार मांग लूं? अरे, जब राजा ही मनमानी इच्छा पूरी कर रहा है, तो […]
आज हम स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक हैं। हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी है, इस भाषा को बोलने वाले विश्व में सबसे अधिक लोग हैं। अंग्रेजी को ब्रिटेन के लगभग दो करोड़ लोग मातृ भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं, जबकि हिंदी को भारत वर्ष में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मध्य […]