मनुष्योें में ईश्वर से जिस हिसाब से बुद्धि दी है उसके अनुरूप उसमें बुद्धि के उपयोग का विवेक भी दिया है और दुरुपयोग की सारी संभावनाएं भी उसके लिए भरपूर खुली रखी हैं। यह उस पर निर्भर है कि वह इन बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग करे या दुरुपयोग। हर इंसान अपने लिए उपयोग करना चाहता […]
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letter for PM Click Here हमारे भारत के गौरव, आदरणीय भाई नरेन्द्र मोदी जीप्रधानमंत्री, भारत सरकार7 आरसीआर नई दिल्लीसादर प्रणाम।‘पवित्रेण मा शतायु सा’परमपिता परमात्मा हर प्रकार से आपकी रक्षा करें। मान्यवर, मैं एक सेवानिवृत्त शिक्षक हूं और आपके स्वच्छ भारत तथा समृद्घ भारत के अभियान का हृदय से प्रशंसक हूं। आपके सुकोमल हृदय में राष्ट्र-प्रेम […]
अवसर दें नई प्रतिभाओं को
रत्नगर्भा वसुन्धरा होने के बावजूद भारतभूमि में आज का सबसे बड़ा संकट प्रतिभाओं के लिए अवसरों की अनुपलब्धता का है। रोजगार और राजनीति का क्षेत्र छोड़ भी दिया जाए तो हर तरफ यह संकट बना हुआ है कि अब आगे क्या होगा? योग्य और प्रतिभा सम्पन्न लोगों की कोई कमी नहीं है इसके बावजूद उन्हें […]
हमारे हर कर्म को करने से पहले या हमारे जीवन की कोई सी अच्छी-बुरी घटना होने से पूर्व हमारी आत्मा को उसके स्पष्ट संकेत प्राप्त हो जाते हैं और वह कम से कम दो बार हमें इस बारे में कभी स्पष्ट तो कभी प्रतीकात्मक रूप से इसके बारे में संकेत देती ही है। यह अलग […]
अर्थहीन हो गया है रावण दहन
लगता नहीं कि आज के मौजूदा माहौल में रावण दहन अर्थहीन हो गया है, औचित्य खो चुका है और जिस संदेश को देने के लिए रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता रहा है, प्रतीकात्मक लंका को जलायी जाती रही है, वह संदेश स्वीकारने का साहस अब किसी में बचा ही नहीं है। […]
गोलोकवासी शिव कुमार गोयलकुछ दशक पूर्व एक वामपंथी लेखक ने गोरक्षा की मांग करने वालों को भ्रमित व दकियानूसी बताते हुए लेख में विचार व्यक्त किये थे कि केवल भारत के इने-गिने लोग ही गाय को पूजनीय बताते हैं जबकि वेदों तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों में गोमांस खाये जाने का विवरण मिलता है।उस समय परम […]
जहाँ गंदगी वहाँ वास्तुदोष
शुद्धता और प्रकाश ईश्वरीय और शुभ्र सकारात्मक माहौल के लक्षण हैं जबकि इसके विपरीत गंदगी और अंधकार नकारात्मकता के द्योतक हैं। हम ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय…’ को अपनाने वाली संस्कृति के अनुगामी हैं जहाँ तम अर्थात अंधकार को हटाकर या उस पर विजय पाकर ज्योति अर्थात आलोक पाने के की परंपरा रही है। मन-मस्तिष्क, तन और […]
जैसा मन होता है वैसा परिवेश सृजित होता है। इसलिए जीवन में हमेशा कल्पनाओं, लक्ष्यों और भावनाओं को इतना ऊँचा रखें कि इनके साकार हो जाने पर शाही और आनंदमय जीवन प्राप्त हो सके। जो हमारे मन में सूक्ष्म धरातल पर होता है वही कालान्तर में अनुकूलताएं और वैचारिक भावभूमि का सुदृढ़ आधार पाकर स्थूल […]
नवरात्रि हो या और कोई समय, हम सभी लोग दैवी मैया की आराधना में ऎसे जुटेरहते हैं जैसे कि दैवी मैया साक्षात प्रकट होकर अपने सारे काज कर देंगीऔर हमें कुछ नहीं करना पड़ेगा। अधिकांश धर्मभीरूओं का यही मत होता है किभगवान को भजने से वह किसी पौराणिक मिथक की तरह अचानक प्रकट हो जाएगा […]
सिल बट्टा का विज्ञान
प्राचीन भारत के ऋषियों ने भोजन विज्ञानं, माता और बहनों की स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए सिल बट्टा का अविष्कार किया ! यह तकनीक का विकास समाज की प्रगति और परियावरण की रक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया। आधुनिक काल में भी सिल बट्टे का प्रयोग बहुत लाभकारी है.१. सिल बट्टा पत्थर […]