बिखरे मोती आत्म – साक्षात्कार के संदर्भ में:- आतम भावना जी सदा, देह – भाव को त्याग। घट भीतर परमात्मा, जाग सके तो जाग॥1677॥ जिनके कारण मनुष्य का रिश्ता कहलाता है:- कीर्ति जैसा धन नहीं, माता जैसा देव। संयम जैसा गुण नहीं, नर होता भूदेव॥1678॥ भूदेव – अर्थात् पृथ्वी का देवता भूल की भूल आत्मा […]
घट भीतर परमात्मा, जाग सके तो जाग