अहं पदार्थ मानव मर्त्य हैं जग में , आते और चले जाते । अमर्त्य तो केवल ईश्वर है सब गीत उसी के ही गाते।। ज्ञानी जन कहें हमको कीर्ति की ना इच्छा है। उन्नति में बाधक है कीर्ति ,कथन ऋषियों का सच्चा है ।। जितने भर भी हुए महात्मा , सबकी इच्छा एक रही। हम […]