जन्म के महीने से व्याक्ति का व्यक्तित्व तो झलकता है साथ ही किसी के जन्म का महीना उसके स्वास्थ्य के बारे में भी बताता है, तो आप भी जानिये, क्या कहता है आपके जन्म का महीना? किस महीने में पैदा हुए आप!आप किस महीने में पैदा हुए हैं, इसका आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। […]
Month: September 2015
डेंगू का उपचार समय पर न हो तो यह जानलेवा भी हो सकता है, इसके उपचार के लिए आप घर में मिलने वाले इन आसान नुस्खोंह से इससे बचाव कर सकते हैं। इन नुस्खों से दूसरों की मदद भी करें। 1.डेंगू के लिए घरेलू नुस्खेडेंगू का प्राकोप आजकल बहुत तेजी से फैल रहा है। यह […]
वैदिक जीवन चार आश्रम और चार वर्णों पर केन्द्रित व्यवस्था व प्रणाली है। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास यह चार आश्रम हैं और शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण यह चार वर्ण कहलाते हैं। जन्म के समय सभी बच्चे शूद्र पैदा होते हैं। गुरूकुल व विद्यालय में अध्ययन कर उनके जैसे गुण-कर्म-स्वभाव व योग्यता होती है […]
महर्षि दयानन्द ने पहले पूना प्रवचन और बाद में थ्योसोफिकल सोसायटी के लिए अपना संक्षिप्त आत्मकथन लिखते हुए, इन दो अवसरों पर न तो अपने जन्म स्थान को ही पूरी तरह से सूचित किया और न हि जन्म के मास व तिथि का उल्लेख किया। अतः उनके सुविज्ञ अनुयायियों पर यह दायित्व आ गया कि […]
डॉ. मधुसूदन 1. कृषकों की आत्महत्त्याओं को घटाने के लिए।प्रायः ६० करोड की कृषक जनसंख्या, सकल घरेलु उत्पाद का केवल १५ % का योगदान करती है। और उसीपर जीविका चलाती है।विचारक विचार करें।अर्थात, भारत की प्रायः आधी जनसंख्या और, केवल १५% सकल घरेलु उत्पाद? बस? जब वर्षा अनियमित होती है, तब इन का उत्पाद घट कर […]
सेब: सेब में एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। लेकिन गूदे से पांच गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट इसके छिलके में होता है। जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड कैमिस्ट्री के शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके छिलकों में एंटी डिजीज व एंटी कैंसर जैसे गुण होते हैं। इसलिए सेब को छिलके समेत ही खाएंकेला: केले […]
दक्षिण भारत के संत (१६) त्यागराजा
बी एन गोयल जिस व्यक्ति को भारत के शास्त्रीय संगीत में थोड़ी भी रुचि होगी उसे संगीतकार त्यागराज के बारे में अवश्य जानकारी होगी। भारतीय शास्त्रीय संगीत को दो भागों में बांटा जाता है – उत्तरी और दक्षिणी । उत्तरी को हिंदुस्तानी संगीत कहते हैं और दक्षिणी को कर्नाटक संगीत कहा जाता है। कर्नाटक संगीत […]
सृष्टि की रचना करने के बाद से ईश्वर मनुष्यों को जन्म देता, पालन करता व उनकी सभी सुख सुविधा की व्यवस्थायें करता चला आ रहा है। हमारी यह सृष्टि लगभग 1 अरब 96 करोड़ वर्ष पूर्व ईश्वर के द्वारा अस्तित्व में आई है। सृष्टि को बनाकर ईश्वर ने वनस्पतियों व प्राणीजगत को बनाया और इसमें […]
भाषा माध्यम है वास्तविक शिक्षा का
अशोक प्रवृद्ध बोलने वाली भाषा शब्दों से बनती है । शब्द अर्थ से युक्त हों तो भाषा बन जाती है । अत: बोलने वाली भाषा अर्थयुक्त वाक्य है । भाषा की श्रेष्ठता भावों को सुगमता से व्यक्त करने की सामथ्र्य है । भावों को व्यक्त करने की सामथ्र्य को ही भाषा की शक्ति माना जाता […]
मृत्युजंय दीक्षित श्रेष्ठश्रम को साधना और समर्पण वृद्धि की जोड़ मिले तो समाज में नि:संदेह समृद्धि पैदा होगी। श्रम से अर्थोत्पादन होता है और अर्थ ही इच्छापूर्ति का साधन है। श्रम ही यज्ञ है साधन और अनुसंधान उसके उपचार हैं। कुशलता इस साधन की उपलब्धि है। भगवान विश्वकर्मा जी ने अपने श्रेष्ठ कार्यो के द्वारा […]