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हम इंसान हैं या जंगली

क्या से क्या होता जा रहा है। सब तरफ इंसानियत स्वाहा हो रही है और इंसान अपने आपको भुलाता जा रहा है। कोई कंचन-कामिनी के पीछे पागल है, कोई अपनी सल्तनत चाहता है, कोई पैसों का भूखा है, कोई जमीन-जायदाद का। कोई मजहब के नाम पर सिक्का चलाना चाहता है, कोई क्षेत्र, भाषा और व्यक्ति […]

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संकीर्ण दायरों में न बांधे विलक्षण प्रतिभाओं को

आदमी जब तक कोई उपलब्धि प्राप्त नहीं कर पाता, जब तक भीड़ का हिस्सा बना रहता है तब वह चाहे कितना मेधावी, उपयोगी, परोपकारी, सेवाभावी और विलक्षण हो, उसकी ओर कोई झाँकने की कोशिश भी नहीं करता। बेचारा इंसान अपनी व्यक्तिगत मेहनत, कड़े संघर्षों और जाने किन-किन समस्याओं और चुनौतियों से जूझता हुआ अपने आपको […]

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अन्य कविता

पहल

– अविनाश वाचस्‍पति पहल खुद पहलकारक हो तो अच्‍छा लगता है पर पहेली का न बने न पैदा हो पहले से पहल ही रहता है पहल का हल सदा विचारों की फसल उपजाता है शून्‍य से खुद को भीतर तक जलाया है झुलसाया है सच बतलाऊं भीतर तक तपाया है पहल पर्याय का हो कविता, […]

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अमेरिका का पहला सच

 अमेरिका के रक्षा मंत्रालय की एक रपट में यह पहली बार स्वीकार किया गया है कि भारत के विरुद्ध आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है। पाकिस्तान की फौज भारत के मुकाबले बहुत कमजोर है इसलिए इस कमी की भरपाई वह आतंकवाद के जरिए करना चाहती है। नरेंद्र मोदी की शपथ के समय भी हेरात […]

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अच्छी−अच्छी बातोंवाले प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ बताते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया कि वे उन पर भरोसा रखें। उनका यह ‘प्रधानसेवक’ देश के गरीबों का एक−एक पैसा वापस लाएगा। वह काले धन की वापसी में कोई कसर उठा नहीं रखेगा। मोदी को यह क्यों कहना पड़ा? इसीलिए कि उनके वित्तमंत्री अरुण जेटली के बयान […]

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श्वान वृत्ति के होते हैं अधीर और उतावले

जिधर देखो उधर अनावश्यक उतावलापन हावी है। आदमी हर काम जल्दी से जल्दी कराना और होते देखना चाहता है। धैर्य और गांभीर्य मनुष्य का गुण है जबकि उतावलापन और अधीरता वह नकारात्मक पक्ष है जो अधिकांश लोगों में देखने को मिलता है। अपने या किसी भी प्रकार के अच्छे कामों को शीघ्रता से पूर्ण कर […]

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सब जगह मुँह न मारें मौलिक दक्षता निखारें

जीवन में सफलता पाने का सीधा सा अर्थ यही है कि उन विधाओं में उच्चतम स्तर की दक्षता प्राप्त करें जिनमें हमारी मौलिक अभिरुचि और दिलचस्पी हो। हर इंसान में दो-चार मौलिक प्रवृत्तियाँ ऎसी होती ही हैं कि जिन्हें आत्मीयता से अंगीकार कर उस दिशा में आगे बढ़ा जाए तो जीवन का लक्ष्य पाने में […]

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नैनो में तू गोद दे, नंदनंदन की सूरत प्यारी

एक समय की बात है, जब किशोरी जी को यह पता चला कि कृष्ण पूरे गोकुल में माखन चोर कहलाता है तो उन्हें बहुत बुरा लगा उन्होंने कृष्ण को चोरी छोड़ देने का बहुत आग्रह किया पर जब ठाकुर अपनी माँ की नहीं सुनते तो अपनी प्रियतमा की कहा से सुनते। उन्होंने माखन चोरी की […]

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पटेल और इंदिरा: मोदी के अटपटे बोल

कैसा विचित्र संयोग है? देश के दो महान नेताओं के बड़े दिन एक ही तिथि पर पड़ते हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म-दिन और इंदिरा गांधी की पुण्य-तिथि, दोनों 31 अक्तूबर को आते हैं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल का जन्म-दिन बड़ी धूमधाम से मनाने की कोशिश की। उन्होंने बहुत अच्छा […]

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बाबुओं को शाह नहीं, सेवक कैसे बनाएं?

केंद्र सरकार ने अपने खर्च में से 10 प्रतिशत की कटौती करने की जो घोषणा की है, उसका तो खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन हम लगे हाथ यह प्रश्न भी पूछ लें तो किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए कि सरकार में फिजूलखर्ची क्या सिर्फ 10 प्रतिशत ही होती है? ‘अधिकाधिक सुशासन […]

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