भारत की गुलामी के कालखंड में भारतीय शास्त्रों पर टीकाकारों ने कई टीकाएँ लिखी गई. उन्हीं कुछ टीकाओं में से शब्दों के वास्तविक अर्थ अपना मूल अर्थ खोते चले गए. इतना ही नही मनुस्मृति में भी मिलावट की गई. डा. पी.वी. काने की समीक्षा के अनुसार मनुस्मृति की रचना ईसापूर्व दूसरी शताब्दी तथा ईसा के […]
Month: September 2014
गोडसे ने गांधी को क्यों मारा-4
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उपचुनावों ने खड़े किये शाह की साख पर सवाल
देश के अलग अलग राज्यों में हुए उपचुनाव के अभी रुझान ही आने शुरू हुए थे कि टीवी चैनलों ने मोदी लहर का दम निकाल दिया। परिणाम आने पर चैनल विशेषज्ञों ने भांति भांति से यह साबित कर दिया कि कैसे देश में मोदी लहर की हवा निकल चुकी है। चैनलों पर पहुंचे बीजेपी के […]
विरोधी कौन ?
आजकल हर कोई किसी न किसी को अपना विरोधी बता कर परेशान हो रहा है, बेवजह तनाव मोल ले रहा है और जिन्दगी को अनावश्यक रूप से बोझिल बना रहा है। विरोध के बारे में स्पष्ट अवधारणा यही है कि विरोध सिर्फ उस बात का होता है, और होना चाहिए जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों […]
शहीदों की कहानी स्मारक की जुबानी
बसु मित्र मैं धमदाहा का शहीद स्मारक ,आजादी के दीवानों की कहानी आज भी मुझमें आसानी से देख और सुन सकते है। चलिए मेरे साथ सन् 42 , जब पुरे देश में अहसयोग आंदोलन पूरे चरम पर था, लोग अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा रहे थे उस समय आंदोलन का प्रभाव पूर्णियां जिले के […]
डॉ0 संतोष राय भारत माता के गगनांचल रूपी आंचल में ऐसे-ऐसे नक्षत्र उद्दीप्त हुये हैं, जो न केवल भारत भूमि को बल्कि संपूर्ण विश्व भू मंडल को अपने प्रकाश पुंजों से आलोकित किया है। ऐसे ही एक महान नक्षत्र का उदय भारत की पावन भूमि पर हुआ जो संपूर्ण जगत में नाथूराम गोडसे के नाम […]
आपदाओ में भेदभाव एक गम्भीर चुनोती
आज सारा देश कश्मीर में बाढ से चिंतित है व मानवता की दुहाई देकर दिल खोलकर सहायता कर रहा है । प्राक्रतिक आपदा है इसलिए प्राथमिकता पर सब हो रहा हैं और होना भी चाहिये। परन्तु मै कहना चाहता हु कि 25 साल से जो मूल कश्मीरी समाज था उसको जब वहा से जेहाद के […]
भारत चुप क्यों रहे?
चीनी राष्ट्रपति भारत पहुंचने के पहले मालदीव और श्रीलंका गए। मालदीव और श्रीलंका दोनों भारत के पड़ौसी राष्ट्र हैं। दोनों संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र हैं। दोनों को अधिकार है कि वे अपने यहां जिसको चाहें, बुलाएं और हर राष्ट्र को अधिकार है कि वह उनके यहां जाए। इन पड़ौसी राष्ट्रों को इस मामले में भारत […]
गौ गंगा और गायत्री की, महिमा जिनने जानीसमझो सफल है उनकी, यह पावन जिंदगानी माँ सम दे वात्सल्य गाय, अरु देय सुधा सम नीरजो सेवन नित इसका करे, होय विविध बहु वीर सकल सिद्धि दाता गौ-माता, वेदन यही बखानीतुलसी व्यास कबीर सूर, सबकी ये अमृत वानी भला माँ गंगे की महिमा, सकें कौन कवि गायजग […]
औरों को न समझें अपनी तरह
इंसान की फितरत होती है कि वह जिस माहौल में पला-बढ़ा और रचा-बसा होता है उसी के आभामण्डल के साथ जीता हुआ हर क्षण उसी में इतना रमा होता है कि उसे दूसरे सारे लोग भी अपनी ही तरह नज़र आते हैं। उसके भीतर गहरे तक इन भावों का जमावड़ा बना रहता है कि वह […]