मित्र हो या भाई, इनका हक कभी नहीं मारना चाहिए। नहीं तो उस ठग जैसा हाल होता है। ‘ नानी कहना चाही एक कहानी।‘किस ठग जैसा, नानी। ‘सब बच्चों ने एक साथ पूछा।नानी कहने लगी कहानी। एक देश में रहते दो ठग थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी। कई रईसजादों को ठग चुके थे पर […]
Month: July 2014
नई दिल्ल्ाी। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा है कि सुनंदा पुष्कर की मौत में सोनिया गांधी के दामाद राबट्र बाड्रा का हाथ हो सकता है। स्वामी ने कहा कि अगर इस मामले पर सरकार ने जरा सी भी कोताही बरती तो इसके लिये हम अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे। आगे स्वामी […]
रूपकुण्ड की मेरी यात्रा
मैं काफी वर्षों से रूपकुंड जाने का इच्छुक था मैंने सोचा की नंदा देवी राज जात यात्रा के दौरान मैं रूपकुंड जाऊँगा पर लगातार दो साल से राज जात यात्रा किसी न किसी कारणवस स्थगित होने के कारण रूपकुंड जाने का प्लान नहीं बन पा रहा था पर इस साल मैंने सोचा की यात्रा हो […]
उखड़े दरबार का प्रलाप
-डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत की जनता ने लोक सभा के चुनावों में जो जनादेश दिया है उससे बुद्धिजीवियों के उस समुदाय में खलबली मची हुई है जो अब तक इस देश के जनमानस को सबसे बेहतर तरीक़े से समझने का दावा करता रहा है । बुद्धिजीवियों का यह समुदाय कैसे निर्मित हुआ , इस […]
बार-बार आती है मुझको, मधुर याद बचपन तेरी।गया, ले गया, तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी।।चिंता सहित खेलना सजा वो फीका निर्भय स्वच्छंद।कैसे मुल्क जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद।।ऊंच-नीच का ज्ञान नही था, छुआछूत किसने जानी।बनी हुई थी झोंपड़ी और चिंछड़ों में रानी।।रोना और मचल जाना थी, क्या आनंद दिखाते थे।बड़े बड़े […]
जब देश पुकारे
भारत के नौजवान, ऐ गांधी सुभाष की संतान,जब देश पुकारे जगना है, हिम्मत कर आगे बढऩा है। 1. भ्रष्टाचार का जब बोल बाला हो, सत जन का मुंह काला हो।नेताओं में मंत्रिपद की सौदेबाजी हो, दलालों का बोलबाला हो।।यश-अपयश की बात नही, देश धर्म की बात नही।अपनी कुर्सी अपना पेट नेताओं की बात यही।।भारत को […]
नहरें नहरें हमको पानी देकर, सबकी प्यास बुझाती हैं।इनका पानी पीकर ही तो, फसलें भी लहराती हैं। चंदा मामा पापा! हम भीचंदा मामा, से मिलने को जाएंगे।आसमान की सैर करेंगे, तोड़ के तारे लाएंगे। साईकिल पापा! एक साईकिल ला दो, उस पर पढऩे जाएंगे।छुट्टी वाले दिन पार्क में, उसको खूब चलाएंगे। -धर्मेन्द्र गोयल
डा0 इन्द्रा देवीस्वांगों में पौराणिक ऐतिहासिक एवं लौकिक सभी कथाओं का समावेश होता है। तथा इनका समाज से सीधा सम्बन्ध होता है। कथानक में जमीदारों के अत्याचार पारिवारिक कलह व्यभिचार जातिभेद और सामाजिक विषमता को उभारा जाता है। जन से सम्बन्धित रीति रिवाजों प्रथाओं और मान्यताओं का बोलबाला रहता है। कथा में प्रवाह होता है […]
शुगर एक ऐसा मर्ज़ है, जिससे व्यक्ति की ज़िंदगी बहुत बुरी तरह प्रभावित हो जाती है… वह अपनी पसंद की मिठाइयां, फल, आलू, अरबी और कई तरह की दूसरी चीज़ें नहीं खा पाता… इसके साथ ही उसे तरह-तरह की दवाएं भी खानी पड़ती हैं… दवा कोई भी नहीं खाना चाहता, जिसे मजबूरन खानी पड़ती हैं, […]
कश्मीर: आजादी हां, अलगाव ना
डॉ0 वेद प्रताप वैदिक मैं आजकल के जिस टीवी चैनल पर जाता हूं, कश्मीर का सवाल जरूर उठा दिया जाता है। जब मैं एंकरों और दूसरे साहबान से पूछता हूं कि आप बताइए कश्मीर का हल क्या है तो उनके पास कोई ठोस, सगुण, साकार जवाब नहीं होता है। हां, आजकल एक नई बात सबके […]