युधिष्ठिर धर्म के अनुसार आचरण करने वाले होने के कारण ‘धर्मराज’ कहलाए । जिनके मन, वचन और कर्म में सदा सत्य समाहित होता था । इसी प्रकार से रघुकुल में अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र ने धर्म की रक्षा के लिए वाराणसी अर्थात काशी में स्वयं अपने आप को और अपने पुत्र व पत्नी को भंगी […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
भारत में छद्म धर्मनिरपेक्षियों का एकमात्र उद्देश्य इस देश में साम्राज्यवाद को बढ़ावा देना है। यह बढ़ावा देने की प्रवृत्ति उनके हिन्दू विरोध को देखने से स्पष्ट हो जाती है। इस हिन्दू विरोध की प्रवृत्ति के कारण इतिहास के कई झूठ ऐसे हैं जो इस देश में पहले तो विदेशियों के द्वारा गढ़े गये और […]
इदं न मम की भारतीय परंपरा
भारत में अत्यंत प्राचीन काल से ‘इदन्नमम्’ की सार्थक जीवन परंपरा रही है और हमारे पूर्वजों ने इसी सार्थक जीवन परंपरा के माध्यम से विश्व व्यवस्था का विकास किया है। इस परंपरा का प्रारंभ देखिये कहां से होता है? निश्चय ही उस पल से जब ईश्वर ने अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा नाम के ऋषियों […]
ओ३म् =========== आर्यसमाज की स्थापना वेदों के महान विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में की थी। ऋषि दयानन्द के माध्यम से ही देश के अधिकांश लोगों को इस तथ्य का ज्ञान हुआ कि वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर से प्राप्त हुआ। वेदों में मनुष्य जीवन को […]
========== मनुष्य श्रेष्ठ गुण, कर्म व स्वभाव को ग्रहण करने से बनता है। विश्व में अनेक मत, सम्प्रदाय आदि हैं। इन मतों के अनुयायी ईसाई, मुसलमान, हिन्दू, आर्य, बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी आदि अनेक नामों से जाने जाते हैं। मनुष्य जाति को अंग्रेजी में भ्नउंद कहा जाता है। यह जितने मत व सम्प्रदायों के लोग […]
दादरी । ( सुंदरलाल शर्मा ) बादलपुर गांव में पिछले 6 दिनों से चल रही रसोई में आज 500 खाने के पैकेट बनाकर जरूरतमंद लोगों को पूर्व की भांति वितरित किए गए। आज बादलपुर में चल रही रसोई में विशेष रुप से आदर्श युवा समिति बादलपुर का सहयोग प्राप्त हुआ तहसील दादरी में प्रशासन को […]
चित्त की वृत्तियां और उनका निरोध
हमारे शरीर में स्थित अंतःकरण में चित्त स्थित होकर अपना कार्य करता है। उसका बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। चित् से वृत्तियां उठा करती हैं। चित्त से उठने वाली ये वृत्तियां दो प्रकार की होती हैं – प्रथम बहुमुखी और द्वितीय अंतर्मुखी। मनुष्य को सफल जीवन जीने के लिए चित्त की वृत्तियों को एकाग्र करना […]
अभी हमने हनुमान जयंती मनाई है । साथ ही टी0वी0 चैनलों पर रामायण को भी देख रहे हैं । जिसमें हमारे कई पात्रों के साथ प्रचलित रामायण में पूर्णतया अन्याय किया गया है । विज्ञान के युग में अवैज्ञानिक , अतार्किक और मूर्खतापूर्ण बातें देशवासियों को और नई पीढ़ी को बताई जा रही हैं। जिनसे […]
इस पर भर्तृहरिजी अपने एक श्लोक में प्रकाश डालते हैं :- क्वाचिद्भूमौ शय्याक्वचिदपि च पर्यंकशयनम् क्वचिच्छाकाहारी क्वचिदपि च शाल्योदन रूचि:। क्वचिन्तकन्थाधारी क्वचिदपि च दिव्याम्बर धरो, मनस्वी कार्यार्थी न गणपति दुखं न च सुखम्।। (नीतिशतक 83) भर्तहरि जी स्पष्ट कर रहे हैं कि जो व्यक्ति संकल्प शक्ति के धनी होते हैं, विचारधील और उद्यमी होते हैं, […]
महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देख परेशान हुए पूर्व सीएम देवेन्द्र फडनवीस ने तबलीगी जमातियों को लेकर बढ़ा बयान दिया है। फडनवीस ने कहा है कि दिल्ली के मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के लोग संक्रमित होकर पूरे देश में घूम रहे हैं, जो कि एक मानव बम की […]