अशोक प्रवृद्ध बोलने वाली भाषा शब्दों से बनती है । शब्द अर्थ से युक्त हों तो भाषा बन जाती है । अत: बोलने वाली भाषा अर्थयुक्त वाक्य है । भाषा की श्रेष्ठता भावों को सुगमता से व्यक्त करने की सामथ्र्य है । भावों को व्यक्त करने की सामथ्र्य को ही भाषा की शक्ति माना जाता […]
Author: अमन आर्य
मृत्युजंय दीक्षित श्रेष्ठश्रम को साधना और समर्पण वृद्धि की जोड़ मिले तो समाज में नि:संदेह समृद्धि पैदा होगी। श्रम से अर्थोत्पादन होता है और अर्थ ही इच्छापूर्ति का साधन है। श्रम ही यज्ञ है साधन और अनुसंधान उसके उपचार हैं। कुशलता इस साधन की उपलब्धि है। भगवान विश्वकर्मा जी ने अपने श्रेष्ठ कार्यो के द्वारा […]
1) गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत 2) खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैंl 3) पाचन क्रिया को सही रखना 4) गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और […]
आप अपनी त्वचा का बहुत ख्याल रखती हैं लेकिन आंखों का क्या… जो आपको सारी दुनिया की खूबसूरती दिखाती हैं। इस बात का ख्याल रखते हुए अपनी आंखों के बारे में सोचना शुरू करिए और उनकी रोशनी को सदा के लिए अच्छा बनाएं रखने के लिए उचित खाद्य सामग्रियों के बारे में सोचिए। छोटी-छोटी बातों […]
लोकतंत्र को सशक्त बनाएगा ‘राइट टू रिकॉल’
निधि शर्मा जनता को आवाज बुलंद करने के लिए प्रतिनिधि के रूप में हथियार तो दिए गए हैं, लेकिन इन हथियारों के उद्देश्यों की पूर्ति न होने पर इन्हें बदलने का अधिकार नहीं दिया गया है। आज इस असहाय परिस्थिति को बदलना काफी जरूरी हो गया है। इसमें बदलाव देश के सभी राज्यों में ग्रामीण […]
एस. सी. जैन अब हम देखें कि मनू द्वारा तैयार की गयी स्मृति और अंग्रेजों द्वारा तैयार की गयी स्मृति में जमीन आसमान का अंतर है। अंग्रेज द्वारा हमारे ग्रंथों व साहित्य में से कुछ वाक्य को निकाल कर रिकॉर्ड कर दिया जाता है कि भारत वासी गाय का मांस खाते हैं। यह सब बाहर […]
क्या आपके बाल मात्र 20 या 30 की उम्र में ही सफेद होना शुरु हो चुके हैं? अगर हां, तो यह इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे भोजन में सही प्रकार का पोषण ना मिलना। अगर आप अपने सफेद बालों को काले करने के लिये हेयर डाई का प्रयोग करते हैं, तो उसे तुरंत ही […]
अमित भंडारी सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हर रोज नए अवसर खुल रहे हैं। इस क्षेत्र में युवा पीढ़ी की दिलचस्पी शुरू से ही रही है। इसकी वजह इस क्षेत्र में योग्य और प्रशिक्षित व्यक्तियों की भारी मांग है। लेकिन बदलते समय के साथ कंपनियां और ग्राहकों की प्राथमिकताएं भी बदली हैं। अब कंपनियां ऐसे […]
जीवित माता-पिता की सेवा
(यह आलेख हम पूज्य पिता महाशय राजेन्द्र आर्य जी की 24वीं पुण्यतिथि-13 सितंबर 2015 के अवसर पर प्रकाशित कर रहे हैं। अब से कुछ समय पश्चात श्राद्घ आरंभ होंगे। जिसे पितृकाल भी कहा जाता है। ऐसे अवसर पर यह आलेख समसामयिक है। (प्रस्तुति: सूबेदार मेजर वीर सिंह आर्य) आर्य समाज के पथ-प्रदर्शक एवं प्रवत्र्तक महर्षि […]
अंकुर विजयवर्गीय कुछ साल पीछे जाइये। 2007-08 की वैश्विक मंदी याद है न आपको। विश्व अर्थव्यवस्था अभी भी उससे पूरी तरह उभर नहीं पाई है। और अब उससे भी बड़ी वैश्विक मंदी की दस्तक पडऩे लगी है। आशंका है कि अक्टूबर 2015 में दुनिया की अर्थव्यवस्था के संकटग्रस्त होने की खबरें खुले आम हो जायेंगी। […]