आज मौत कितनी सस्ती हो गयी है कि ऐसे कई गिरोह सक्रिय है जो सिर्फ चन्द रुपयो के लिए किसी की भी हत्या कर देते है फिर चाहे जिसकी हत्या करानी है वह कोई भी क्यों न हो वे यह भी नही सोचते कि उस व्यक्ति कि हत्या से कितने बच्चे अनाथ हो जायेंगें उसके […]
Author: अमन आर्य
आज का चिंतन-29/01/2014
व्योम की तरंगों से संभव है विचारों का सूक्ष्म आदान-प्रदान – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com हममें से कई लोगों का यह अनुभव रहा है कि अक्सर हमें वे लोग संपर्क साधने की कोशिश करते हैं जिनके जेहन में हम आ जाते हैं अथवा जो हमारे जेहन में आ जाते हैं। कई बार यह […]
राकेश कुमार आर्यकांग्रेस का कर्णधार (पी.एम. पद का प्रत्याशी) आगामी चुनावों में कौन होगा? इस पर पार्टी मोदी के सामने अपने युवराज को लाने से बचने का बहाना बना रही है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस में पी.एम. पद का प्रत्याशी घोषित करना उसकी परंपरा नही रही है। बात तो सही है, जिस पार्टी […]
आज का चिंतन-26/01/2014
गण और गणनायक दोनों स्वीकारें मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखाएँ – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com तंत्र का सुव्यवस्थित और दीर्घकालीन संचालन और स्थायित्व बनाए रखने के लिए उससे जुड़े हुए प्रत्येक अंग-उपांग को स्वस्थ और काबिल बनाए रखना पहली शर्त और प्राथमिक अनिवार्यता है। जड़ और जीवन दोनों के लिए अपनी कुछ मर्यादाएं हैं जिनका […]
गणराज्य से लाएँ स्वराज्य
आज गणतंत्र दिवस है। वह दिन जो गण के नाम समर्पित है। जो गण का अपना, अपने लिए और अपने द्वारा संचालित है। आम गण का अपना ही जब सब कुछ है फिर गण का कोई वजूद कहीं क्यों नहीं दिख रहा है? गण के नाम पर जो कुछ हो रहा है, हुआ है और होने वाला है […]
हिंसा और मांसाहार के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर लेने के पश्चात इस मुद्दे पर चिंतन करने की आवश्यकता है कि आज जो दुनिया के पर्यावरण की स्थिति है, उसके अनुसार मनुष्य शाकाहारी बनकर जीवित रहेगा या फिर उसे मांसाहार अपनाकर अपना जीवन व्यतीत करना होगा? प्रकृति का नियम है कि हर चीज अपनी असलियत […]
आज का चिंतन-23/1/2014
खून नहीं वो पानी है जो देश के काम न आए – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com समाज और देश बुजुर्गों के अनुभवों और युवाओं के ज्ञान तथा ताकत के बूते चलता है और इसीलिए कहा जाता है कि युवा शक्ति समुदाय और देश की रीढ़ है। इस युवा पीढ़ी पर दोहरे-तिहरे दायित्व स्वतः ही […]
डा. अशोक आर्यमानव अपने जीवन को सदा सुखों में ही देखना पसंद करता है । वह सदा सुखी रहना चाहता है । सुखी रहने के लिए उसे अनेक प्रकार के यत्न करने होते हैं । अनेक प्रयास करने होते हैं । इन यत्नों के बिना , इन प्रयासों के बिना, इन पुरुषार्थों के बिना वह […]
आज का चिंतन-22/01/2014
सज्जनों को हमेशा मिलता है ईश्वरीय शक्तियों का संरक्षण – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com दुनिया भर में इंसानों की तमाम प्रकार की प्रजातियों के बीच सज्जनों का वजूद भी हमेशा रहा है। वर्तमान कलियुग में भी सज्जनों को भले ही हाशिये पर समझा जाता हो, प्रचार से दूर हों, मगर सज्जनों का अस्तित्व हर क्षेत्र में न्यूनाधिक […]
आज का चिंतन-19/01/2014
हमेशा बह जाती हैं भरोसे की भैंसें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com भरोसा एक ऎसा शब्द है जो हर किस कर्म में निश्चिन्तता का मूलाधार होता है। इस एकमात्र शब्द से हर कोई सुकून पा लेता है और पारस्परिक सहकारिता का धर्म निभाने वाले धन्य होते रहते हैं। लेकिन हाल के कुछ वर्षों से […]