आजकल संक्रमण का दौर अक्सर आता-जाता रहता है। यह संक्रमण अन्यमनस्कता और उद्विग्नता के सायों को हमारे साथ कर देता है जहाँ मन का उचट जाना स्वाभाविक है और जब मन उचटने लगता है तब मस्तिष्क और शरीर भी अपने-अपने ढंग से शिथिलता को प्राप्त कर लिया करते हैं। यह वह अवस्था है जिसमें आदमी […]
Author: अमन आर्य
डॉ. मधुसूदन (एक) प्रवेश और लाभ: इस पद्धति में, देवनागरी लिपि सीखना आवश्यक नहीं। सफलता भी तुरंत प्राप्त होती है। अनपढ भी हिन्दी बोलना सीख सकता है।यदि, बडी मात्रा में संसाधन लगाकर हिन्दी वार्तालाप तमिलनाडु में फैलाया जाए, तो,हिन्दी के लिए अनुकूल जनमानस बनाने में भी यह पद्धति सफल हो सकती है।तीर्थ स्थानों के मार्ग […]
हम सब हैं जासूस
बाहर चलने वाली हवाओं और हलचलों से इंसान हमेशा प्रभावित रहा है। उसे हमेशा यह जिज्ञासा रही है कि लोग क्या कर रहे हैं, बाहर क्या हो रहा है, कौन क्या कह रहा है, क्या सुन रहा है और क्या कर सकता है, क्या हो सकता है, क्या होना चाहिए। हम सभी लोग इसी महामारी […]
गो, गोपाल, गोधरा-पृथ्वी
सियाराम दास त्यागीइस वैज्ञानिक युग में घोर अवैज्ञानिक मतिभ्रम फेेला हुआ है। तभी तो नास्तिकता, हिंसा स्वार्थ लोलुपता आदि अवगुणों को अधिकाधिक प्रश्रय मिल रहा है। मानवता पथभ्रष्ट हो गयी है। मनुष्य का मस्तिष्क और शरीर दोनों विकृत से प्रतीत हो रहे है। यही कारण है कि विज्ञान के अंधभक्त प्राय: धर्म के नाम से […]
राजेन्द्र सिंह अखिल वेद-चारों वेद इस सर्वप्राचीन राष्ट्र भारतवर्ष की धार्मिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक राजधर्मीय और ऐतिहासिक चेतना का मूल प्रेरणा स्रोत है। वेद प्रतिपादित कालगणना को आधार बनाकर आप द्वारा 2064-65 विक्रमी से श्री मोहन कृति आर्ष तिथि पत्रक निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है। काल गणना संबंधी अनेक प्रचलित भ्रमों का निवारण करने वाले […]
हर आदमी के अपने शौक होते हैं जिनके लिए वह खर्च करता है। विवेकशील लोग सीमित दायरे में रहकर खर्च करते हैं जबकि विवेकहीनों के खर्च का दायरा असीमित होता है। कई लोग ऎसे भी होते हैं जो सीमा से अधिक खर्च कर दिया करते हैं लेकिन ये विवेकहीन नहीं बल्कि अत्यन्त उदार और फक्कड़ […]
सोचें, क्या है हमारा अपना
हम बहुत सारे इंसानों को हमारे अपने और खूब सारी वस्तुओं को अपनी मानने में हमेशा गर्व का अनुभव करते हैं और यह गर्व हमें अपनी मृत्यु तक बना रहता है। सिर्फ मृत्यु के कुछ क्षण पहले शरीर से प्राण निकलते वक्त चंद सैकण्ड ही ऎसे होते हैं जब हर इंसान को अपनी संपदा, गलतियों […]
सितारे-हिन्द की हिन्दी भाग-2
डा0 इन्द्रा देवीहिन्दूओं में सन् 1823 ई0 में जन्मे राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्द अंग्रेजों के उसी तरह कृपा पात्र थे। जैसे कि सर सैयद अहमद हिन्दी की रक्षा के लिए उन्हें खड़ा होना पडा। वह पहले हिन्दी संरक्षक थे। जो शिक्षा विभाग में इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए। उस समय दूसरे विभागों की भांति शिक्षा […]
श्रद्घा और विश्वास जगे जबओ३म् ध्यान में चित्त लगे तबओ३म् ध्यान का लाभ समाधिहों सब दूर दुरिन्त अरू व्याधि ।। 67 ।। निर्मल करके मन का दर्पणओ३म् पिता को करो समर्पणवो प्रभु अनुकंपा का भागीओ३म् नाम का जो अनुरागी ।। 68 ।। ओ३म् रसों में सर्वोत्तम रसपान करने इसका तज आलसओ३म् सुधा रस पान करें […]
मनुष्योें में ईश्वर से जिस हिसाब से बुद्धि दी है उसके अनुरूप उसमें बुद्धि के उपयोग का विवेक भी दिया है और दुरुपयोग की सारी संभावनाएं भी उसके लिए भरपूर खुली रखी हैं। यह उस पर निर्भर है कि वह इन बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग करे या दुरुपयोग। हर इंसान अपने लिए उपयोग करना चाहता […]