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श्वान वृत्ति के होते हैं अधीर और उतावले

जिधर देखो उधर अनावश्यक उतावलापन हावी है। आदमी हर काम जल्दी से जल्दी कराना और होते देखना चाहता है। धैर्य और गांभीर्य मनुष्य का गुण है जबकि उतावलापन और अधीरता वह नकारात्मक पक्ष है जो अधिकांश लोगों में देखने को मिलता है। अपने या किसी भी प्रकार के अच्छे कामों को शीघ्रता से पूर्ण कर […]

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सब जगह मुँह न मारें मौलिक दक्षता निखारें

जीवन में सफलता पाने का सीधा सा अर्थ यही है कि उन विधाओं में उच्चतम स्तर की दक्षता प्राप्त करें जिनमें हमारी मौलिक अभिरुचि और दिलचस्पी हो। हर इंसान में दो-चार मौलिक प्रवृत्तियाँ ऎसी होती ही हैं कि जिन्हें आत्मीयता से अंगीकार कर उस दिशा में आगे बढ़ा जाए तो जीवन का लक्ष्य पाने में […]

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नैनो में तू गोद दे, नंदनंदन की सूरत प्यारी

एक समय की बात है, जब किशोरी जी को यह पता चला कि कृष्ण पूरे गोकुल में माखन चोर कहलाता है तो उन्हें बहुत बुरा लगा उन्होंने कृष्ण को चोरी छोड़ देने का बहुत आग्रह किया पर जब ठाकुर अपनी माँ की नहीं सुनते तो अपनी प्रियतमा की कहा से सुनते। उन्होंने माखन चोरी की […]

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पटेल और इंदिरा: मोदी के अटपटे बोल

कैसा विचित्र संयोग है? देश के दो महान नेताओं के बड़े दिन एक ही तिथि पर पड़ते हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म-दिन और इंदिरा गांधी की पुण्य-तिथि, दोनों 31 अक्तूबर को आते हैं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल का जन्म-दिन बड़ी धूमधाम से मनाने की कोशिश की। उन्होंने बहुत अच्छा […]

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बाबुओं को शाह नहीं, सेवक कैसे बनाएं?

केंद्र सरकार ने अपने खर्च में से 10 प्रतिशत की कटौती करने की जो घोषणा की है, उसका तो खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन हम लगे हाथ यह प्रश्न भी पूछ लें तो किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए कि सरकार में फिजूलखर्ची क्या सिर्फ 10 प्रतिशत ही होती है? ‘अधिकाधिक सुशासन […]

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महत्वपूर्ण लेख

टुकड़े-टुकड़े जोड़, जिसने भारत बनाया

आधुनिक भारत के शिल्पी सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचार, कर्म और उनकी स्मृतियां मन को रोमांच और गौरव से भर देती हैं। वे ऐसे राष्ट्रभक्त महापुरुष थे जिनके लिए ‘राष्ट्र सबसे पहले’ था। सरदार सही मायने में राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे और हैं। उनकी जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाने […]

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….अब प्रधानमंत्री मोदी का इंतजार

 पुण्‍य प्रसून वाजपेयी ४८ मौत, ५०० बीमार, राष्ट्रपति का इंकार और अब प्रधानमंत्री मोदी का इंतजार संसद सदस्य बनने के बाद ऱाष्ट्रकवि दिनकर ने लिखा था, “हो गया एक नेता मैं भी !तो बंधु सुनो, / मैं भारत के रेशमी नगर में रहता हूं, /  जनता तो चट्टानों का बोझ सहा करती, / मैं चादंनियों […]

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महत्वपूर्ण लेख

डिब्बे ही हो जाते हैं डिब्बाबंद खाने-पीने वाले

आजकल डिब्बाबंद खान-पान सामग्री का प्रचलन जोर पकड़ता जा रहा है। जब से हमने परिश्रम करना छोड़ दिया है तभी से हम तैयार खान-पान के आदी हो गए हैं।

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मन चंगा तो कठोती में गंगा

नियत में खोट, प्रतिष्ठा पर चोटडॉ.शशि तिवारी कहते है मन चंगा तो कठोती में गंगा’, लेकिन मन अत्यधिक चंचल होता है पल में हां और पल में न कहतेे एवं एक पाले से दूसरे पाले में ढुंलकते देर भी नहीं लगनी लक्ष्मी भी चंचल होती हैं, मन और लक्ष्मी किस पर कृपा बरसा दे ठीक-ठीक […]

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बहुत सो चुके, अब तो जगें

जागरण का समय आ ही गया है। जाने कितनी बार नए संकल्पों और नई भोर के साथ जागरण का संदेश देने वाले पर्व-त्योहार और नए-नए अवसर हमारे सामने आते रहते हैं। पर हम इतने आलसी हैं कि हर बार कल्पनाओं में खो जाते हैं, संकल्प लेते हैं, लक्ष्यों में खुद को बाँधते हैं, कुछ नया […]

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