आर्य समाज के सुप्रसिद्ध विद्वान पंडित चमूपति जी

images (16)

पंडित चमूपति आर्यसमाज के प्रसिद्ध विद्वान और प्रचारक थे। आप हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी व फारसी आदि अनेक भाषाओं के विद्वान थे। आप अच्छे कवि एवं लेखक भी थे। आपने कई भाषाओं में अनेक प्रसिद्ध ग्रन्थों की रचना की है। उन्होने गुरुकुल में अध्यापन भी किया और आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के उपदेशक व प्रचारक भी रहे। आज आपकी जन्मजयन्ती 15 फरवरी (1893) पर “आर्य लेखक परिषद्” की ओर से श्रद्धापूर्वक कोटिशः नमन।

आचार्य पं. चमूपति महर्षि दयानन्द के मिशन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख महापुरुषों में से एक महापुरुष थे। वह अतीव प्रतिभासम्पन्न मनीषी, त्यागी, तपस्वी, विद्वान तथा वैदिक धर्म व संस्कृति के लिये समर्पित असाधारण मनुष्य थे। ईसाई मत, इस्लाम तथा आर्य सिद्धान्तों का उन्हें गम्भीर ज्ञान था। इनकी लेखनी में जादू तथा भाषण में रस था।

पण्डित चमूपति का जन्म 15 फरवरी 1893 को बहावलपुर के खैरपुर रामेवाला में हुआ था। बहावलपुर अब पाकिस्तान में है। उनका मूल नाम चम्पत राय था। उनके पिता का नाम बसन्दाराम मेहता था और माता का नाम उत्तमी देवी था। मैट्रिक तक की शिक्षा आपने अपने जन्म ग्राम खैरपुर में उर्दू एवं अंग्रेजी भाषाओं मे प्राप्त की। बहावलपुर के इजर्टन कालेज से आपने उर्दू, फारसी एवं अंग्रेजी में बी•ए• किया। बी•ए• तक आप देवनागरी अक्षरों से अनभिज्ञ थे। आर्यसमाज से प्रभावित होकर आपने संस्कृत में एम•ए• करने का संकल्प लिया और परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रशंसनीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

विद्यार्थी जीवन में आप सिख मत की ओर आकर्षित हुए थे। आपने सिख मत की पुस्तक “जपुजी” का उर्दू में काव्यानुवाद किया। इस पुस्तक से निकटवर्ती क्षेत्रों में आपको प्रसिद्धि प्राप्त हुई। जन्म से दार्शनिक प्रवृत्ति के कारण पौराणिक विचारधारा से आपकी संस्तुष्टि नहीं हुई, जिसका परिणाम यह हुआ कि आप नास्तिक बन गए। इसके पश्चात आपने स्वामी विवेकानन्द के साहित्य का अध्ययन किया और कुछ समय पश्चात महर्षि दयानन्द के साहित्य का पारायण किया। इस साहित्यिक ऊहापोह से आप पुनः आस्तिक बन गए। अब आप प्राणपण से आर्यसमाज के कार्यों में रुचि लेने लगे। सन् 1919 में आपने स्वामी दयानन्द के पद्यमय उर्दू जीवन चरित्र ‘‘दयानन्द आनन्द सागर” का लेखन व प्रकाशन किया। इस ग्रन्थ में आपने स्वामी दयानन्द जी के लिये “सरवरे मखलूकात” अर्थात् ‘मानव शिरोमणि’ विशेषण का प्रयोग किया है।

गुरुकुल से उनका सम्बन्ध बहुत पुराना था। वे मुल्तान के गुरुकुल के मुख्य अधिष्ठाता बने थे और उस गुरुकुल का संचालन करने में उन्हें बड़ी सफलता मिली थी। आचार्य रामदेव उनके गुणों पर मुग्ध होकर उन्हें लाहौर ले आये थे और ‘दयानन्द सेवासदन’ का आजीवन सदस्य बनने के लिये तैयार किया था। अनेक वर्षों तक पण्डित जी ने लाहौर में रहकर ‘आर्य’ का सम्पादन किया। वक्ता और लेखक के रूप में आर्यसमाज में उनकी खूब ख्याति हुई।

दयानन्द सेवासदन के समाजोत्थान के कार्यों को करते हुए आपने आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी पत्र ‘‘वैदिक मैगजीन” एवं हिन्दी पत्र ‘‘आर्य” के सम्पादन का कार्य भी किया। आपकी विद्वता एवं निष्ठा के प्रभाव से इन पत्रों ने अपूर्व सफलता प्राप्त कीं और अविभाजित पंजाब सहित देशभर में दोनो पत्र लोकप्रिय हुए। सन् 1926 से आरम्भ कर आठ वर्षों तक आपने गुरुकुल कांगड़ी में उपाध्याय, अधिष्ठाता एवं आचार्य आदि पदों को सुशोभित किया।

आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब की ओर से सन् 1925 में आप वैदिक धर्म एवं संस्कृति के प्रचारार्थ अफ्रीका गये। इस यात्रा के समय पौराणिक विद्वान पं• माधवाचार्य ने आपको शास्त्रार्थ के लिये आमंत्रित किया जिसमें वह पंडित चमूपति जी को अपमानित कर सकें और अपने शिष्यों पर अपना प्रभाव जमा सकें। अनेक लोगों की उपस्थिति में शास्त्रार्थ आरम्भ हुआ। शास्त्रार्थ में प्रसंगवश पंडित चमूपति जी ने शालीनतापूर्वक कहा कि पं• माधवाचार्य की पत्नी को पुत्री मानने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं, अपितु प्रसन्नता है। निराली शैली में कहे गए इन शब्दों का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ा। शास्त्रार्थ उनके इन्हीं शब्दों पर समाप्त हो गया। पं• माधवाचार्य की पं• चमूपति जी का अपमान करने की योजना विफल हो गई।

एक बार पं• चमूपति वैदिक साधना आश्रम तपोवन, देहरादून आये थे। एक दिन जब उन्होंने तपोवन के निकट सरोवर में एक हिन्दू को मछलियां पकड़ते हुए देखा तो उनके मुख से निकला “देखो यह इस्लामी हिन्दू धर्म है”। अपने एक व्याख्यान में एक बार पंडित जी ने मुसलमानों की हज की रीति एवं व्यवहार का उल्लेख कर भावपूर्ण शब्दों में कहा, “हज करते समय कोई मोमिन सिर की जूं तक नहीं मार सकता, सिला हुआ वस्त्र भी नहीं पहन सकता। यह है वैदिक इस्लाम”। इस्लाम के इस अहिंसक रूप के पंडित चमूपति जी समर्थक थे।

सत्यार्थप्रकाश की भूमिका में स्वामी दयानन्द ने लिखा है कि सत्य को मानना एवं मनवाना तथा असत्य को छोड़ना और छुड़वाना उन्हें अभीष्ट है। इसी को वह मनुष्य जीवन का लक्ष्य स्वीकार करते थे। पं• चमूपति जी ने ऋषि दयानन्द जी के विचारों को सर्वात्मा अपनाया व उनका अपने उपदेशों व रचनाओं के द्वारा प्रचार किया। दिनांक 15 जून सन् 1937 को 44 वर्ष की आयु में लाहौर में आपका निधन हुआ।

आर्यसमाज के वयोवृद्ध विद्वान प्रा• राजेन्द्र जिज्ञासु जी ने आपकी जीवनी लिखी है। जिज्ञासु जी ने पं• चमूपति जी के लेखों व लघु पुस्तकों का दो खण्डों में एक संग्रह सम्पादित किया था जो वर्षों पूर्व हिण्डोन सिटी से आर्य साहित्य के यशस्वी प्रकाशक श्री प्रभाकरदेव आर्य जी ने ‘‘विचार वाटिका” के नाम से प्रकाशित किया था। अब यह ग्रन्थ अनुपलब्ध है। प्रा• जिज्ञासु जी ने पं• चमूपति जी की उर्दू पुस्तक ‘‘दयानन्द आनन्द सागर” का हिन्दी अनुवाद कर उसे भी प्रकाशित कराया है। इस पुस्तक के कारण ही चमूपति जी को मुस्लिम रियासत बहावलपुर से अपने निवास गृह से निर्वासित किया गया था। कितना बड़ा त्याग उन्होंने किया था इसका शायद हम अनुमान नहीं कर सकते। पं• चमूपति जी की अनेक उर्दू पुस्तकों के अनुवाद भी सुलभ हैं।

पं• चमूपति संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी आदि भाषाओं के उच्चकोटि के विद्वान, लेखक, कवि एवं वक्ता थे। उन्होने अपने जीवन में देश, धर्म एवं संस्कृति के लिये जो कार्य किये और इन पर हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू में जो उच्च कोटि की रचनायें दी हैं।

हिन्दी : सोम सरोवर, जीवन ज्योति, योगेश्वर कृष्ण, वृक्षों में आत्मा, हमारे स्वामी, रंगीला रसूल

उर्दू: दयानन्द आनन्द सागर, मरसिया ए गोखले, जवाहिरे जावेद, चौदहवीं का चांद, मजहब का मकसद आदि

अंग्रेजी : महात्मा गांधी ऐण्ड आर्यसमाज, यजुर्वेद (अनुवाद), गिलिम्पसेस आफ दयानन्द
सोम-सरोवर बहुत उच्च कोटि की रचना है। उन्होंने इस पुस्तक में सामवेद के मन्त्रों की भावपूर्ण व्याख्या की है। गद्य में होने पर भी इस पुस्तक को पढ़कर पद्य का सा आनन्द आता है। एक बार श्री वीरेन्द्र जी, सम्पादक, आर्यमर्यादा, जालन्धर ने सम्पादकीय में लिखा था कि इस पुस्तक पर उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया जा सकता था परन्तु पुरस्कार देने में पक्षपात के कारण वह इस पुस्तक पर पुरस्कार प्राप्त नहीं कर सके।

पं. चमूपति जी की ऋषि दयानन्द के बारे में कहते हैं-

आज केवल भारत ही नहीं, सारे धार्मिक सामाजिक, राजनैतिक संसार पर दयानन्द का सिक्का है। मतों के प्रचारकों ने अपने मन्तव्य बदल लिए हैं, धर्म पुस्तकों के अर्थों का संशोधन किया है, महापुरुषों की जीवनियों में परिवर्तन किया है। स्वामी जी का जीवन इन जीवनियों में बोलता है। ऋषि मरा नहीं करते, अपने भावों के रूप में जीते हैं। दलितोद्धार का प्राण कौन है? पतित पावन दयानन्द। समाज सुधार की जान कौन है? आदर्श सुधारक दयानन्द। शिक्षा के प्रचार की प्रेरणा कहां से आती है? गुरुवर दयानन्द के आचरण से। वेद की जय जयकार कौन पुकारता है? ब्रह्मार्षि दयानन्द। माता आदि देवियों के सत्कार का मार्ग कौन सिखाता है? देवी पूजक दयानन्द। गोरक्षा के विषय में प्राणिमात्र पर करूणा दिखाने का बीड़ा कौन उठाता है? करुणानिधि दयानन्द।

आओ ! हम अपने आप को ऋषि दयानन्द के रंग में रंगें। हमारा विचार ऋषि का विचार हो, हमारा आचार ऋषि का आचार हो, हमारा प्रचार ऋषि का प्रचार हो। हमारी प्रत्येक चेष्टा ऋषि की चेष्टा हो। नाड़ी नाड़ी से ध्वनि उठे – महर्षि दयानन्द की जय।

पापों और पाखण्डों से ऋषि राज छुड़ाया था तूने।
भयभीत निराश्रित जाति को, निर्भीक बनाया था तूने॥
बलिदान तेरा था अद्वितीय हो गई दिशाएं गुंजित थी।
जन जन को देगा प्रकाश वह दीप जलाया था तूने॥

Comment:

betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
alobet
vegabet giriş
vegabet giriş
restbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
roketbet giriş
imajbet giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
begaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
roketbet giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
Betkolik giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
Safirbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
norabahis giriş
roketbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş