वैश्विक स्तर पर नया आकार ले रहा है भारत का सांस्कृतिक वैभव

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भारतीय सनातन संस्कृति, सभ्यता और परम्पराएं विश्व में सबसे अधिक प्राचीन मानी जाती है। भारतीय संस्कृति को विश्व की अन्य संस्कृतियों की जननी भी माना गया है। भारत की संस्कृति और सभ्यता आदि काल से ही अपने परम्परागत अस्तितिव के साथ अजर अमर बनी हुई है। भारत में गीत संगीत, नाटक परम्परा, लोक परम्परा, धार्मिक संस्कार, अनुष्ठान, चित्रकारी और लेखन के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा संग्रह मौजूद है जो मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में जाना जाता है। इसे संजोने, संवारने और निखारने का महती प्रयास हाल ही के समय में बहुत मजबूती के साथ किया जा रहा है। विशेष रूप से पिछले एक दशक में भारत की संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं जिससे न केवल विश्व के लोगों को देश के माटी की सौंधी खुशबू मिली है बल्कि पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति को जानने एवं समझने का प्रयास भी कर रही है। भारत का अतीत वर्तमान से भी सुंदर एवं प्रभावशाली रहा है।

भारत ने राजनैतिक स्वतंत्रता 75 वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर ली थी, परंतु भारत की सनातन संस्कृति आदि काल से चली आ रही है एवं लाखों वर्ष पुरानी है। भारत को ‘सोने की चिड़िया’ के रूप में जाना जाता रहा है और भारतीय सनातन संस्कृति का लोहा पूरे विश्व ने माना है। धर्म, दर्शन, विरासत, तीज, त्यौहार, जायका और अनेकता में एकता के दर्शन करने को पूरी दुनिया भारत की ओर आकर्षित होती रही है। भारत को देव भूमि भी कहा गया है, यह अर्पण की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है और यह समर्पण की भूमि है।

भारत आदि काल से ही एक जीता जागता राष्ट्र पुरुष है, यह मात्र एक जमीन का टुकड़ा नहीं है। भारत के कंकड़ कंकड़ में शंकर का वास बताया जाता है। हाल ही के कुछ वर्षों में भारत के आर्थिक विकास में विरासत पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है और भारत में आर्थिक विकास के साथ ही सांस्कृतिक विकास पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। जिसके चलते अन्य देशों की तुलना में भारत की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी हुई है। बल्कि अब तो अन्य कई देश, विकसित देशों सहित, भी अपने आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक समस्याओं के हल हेतु एवं अपने आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से भारतीय सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

हाल ही के समय में भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, संवारने और उसकी संवृद्धि के लिए विशेष रूप से पिछले दशक के दौरान अथक प्रयास किए गए हैं। हजारों वर्षों की भारतीय सभ्यता और संस्कृति का आकर्षण ही कुछ ऐसा है कि कितने ही झंझावात क्यों न आए परंतु भारतीय सनातन संस्कृति अटूट रही। हालांकि कुछ देशों, जैसे ग्रीक, यूनान, ईरान आदि, की तो सभ्यताएं ही समूल नष्ट हो गईं। भारत में अभी हाल ही में आजादी के 75 वर्षों के बाद अमृत काल मनाया गया है। आजादी के अमृत महोत्सव की आधिकारिक यात्रा 12 मार्च 2021 को प्रारम्भ हुई। जिसे आजादी की 75 वर्षगांठ के लिए 75 सप्ताह की गिनती शुरू की थी जो उत्सवों के साथ निरंतर गतिमान रही। इस बीच उत्सवों की लम्बी शृंखला चली और 15 अगस्त 2023 तक यह यात्रा निर्बाध गति से चलती रही। आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान 166,000 से अधिक कार्यक्रम देश और दुनिया में आयोजित किए गए। जिसमें हर घर तिरंगा, वन्दे भारतम, कलांजलि जैसे कई बड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे।

अमृत महोत्सव के पांच स्तम्भ हैं – स्वतंत्रता संग्राम@ 75, विचार@ 75, समाधान@ 75, कार्य@ 75, उपलब्धियां@ 75। जनभागीदारी से मनाया जा रहा आजादी का अमृत महोत्सव, देश की इन 75 वर्षों की उपलब्धियों को पूरी दुनिया के सामने रखने का एक प्रयास है और इसके साथ ही अगले 25 वर्षों के लिए संकल्पों की रूपरेखा भी रखी जा रही है।

भारतीय सनातन संस्कृति ने न केवल भारत को एकता के सूत्र में पिरोया है बल्कि पूरे विश्व को ही भारत के साथ जोड़ा है। अब तो भारत में ‘एक भारत – श्रेष्ठ भारत’ के रूप में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा जा रहा है। भारत ने जी-20 समूह के देशों की अपनी अध्यक्षता के दौरान कई अतुलनीय कार्य किए है। पिछले लगभग एक वर्ष के अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सदस्य देशों की 200 से अधिक बैठकों का भारत के विभिन्न शहरों में आयोजन कर भारत ने पूरी दुनिया के समस्त देशों को चौंका दिया है। इस दौरान, भारत ने पूरी दुनिया को ही अपनी महान गौरवशाली सनातन संस्कृति, वैभवशाली विरासत, आध्यात्मिक क्षेत्र, आर्थिक विकास, आदि का परिचय देने में सफलता हासिल की है।

भारत ने हाल ही के वर्षों में अपनी आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं को हल करने एवं अपनी आर्थिक विकास दर को तेज करने में जो सफलता पाई है वह मुख्य रूप से भारत की सनातन संस्कृति एवं परम्पराओं का पालन करते हुए ही प्राप्त की जा सकी है। इसके ठीक विपरीत विशेष रूप से कोरोना महामारी के बाद से विश्व के कई विकसित देश अभी तक कई प्रकार की आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। पूंजीवाद पर आधारित आर्थिक नीतियों के पालन से पश्चिमी देशों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है। विकसित देशों में आज परिवार की प्रधानता एक तरह से समाप्त हो चुकी है। इस संदर्भ में यहां विशेष रूप से अमेरिका की स्थिति का उदाहरण दिया जा सकता है। अमेरिका में आज सामाजिक तानाबाना छिन्न भिन्न हो चुका है। दंपतियों में तलाक की दर बहुत अधिक हो गई है जिसके चलते बच्चे केवल अपनी मां के पास रह जाते हैं एवं बड़ी संख्या में बच्चों को अपने पिता के बारे में जानकारी ही नहीं है।

विकसित देशों में पारिवारिक व्यवस्था के छिन्न भिन्न होने के कारण बुजुर्गों को सरकार की मदद पर निर्भर रहना होता है। अतः इन देशों की सरकारों को सामाजिक सुविधाओं पर भारी भरकम राशि खर्च करनी होती है। कई विकसित देशों में तो बुजुर्गों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है जिसके चलते इन देशों को अपने बजट का बहुत बड़ा भाग सामाजिक सुविधाओं पर खर्च करना पड़ रहा है। फ्रान्स अपने कुल बजट का 31 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुविधाओं पर खर्च कर रहा है, इसी प्रकार इटली 28 प्रतिशत, जर्मनी 26 प्रतिशत एवं अमेरिका 19 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुविधाओं पर खर्च कर रहा है। सामाजिक सुविधाओं पर भारी भरकम खर्च के कारण इन देशों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है एवं इन देशों में प्रति व्यक्ति औसत ऋण बहुत अधिक हो गए हैं। अमेरिका में तो कुल सकल घरेलू उत्पाद का 136 प्रतिशत कर्ज लिया जा चुका है। आज ऋण पर ब्याज के भुगतान हेतु भी कुछ देशों को कर्ज लेना पड़ता है।

पश्चिमी दर्शन की विचारधारा के ठीक विपरीत, भारतीय संस्कृति के अनुसार, व्यक्तिवाद के ऊपर परिवार, समाज, राष्ट्र, सृष्टि एवं परमेशटी को क्रमशः माना गया है। संयुक्त परिवार के प्रचलन के कारण बुजुर्गों की देखभाल परिवार में ही होती है एवं सरकार के बजट पर इस संदर्भ में बहुत अधिक बोझ नहीं आता है। भारतीय सनातन संस्कृति का पालन करते हुए भारत के आर्थिक विकास को देखकर अब विकसित देश भी भारतीय संस्कृति को श्रेष्ठ मानते हुए इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं ताकि वे अपनी आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक समस्याओं को हल कर सकें। कुल मिलाकर अब भारतीय आर्थिक दर्शन ही पूरे विश्व को बचा सकता है, क्योंकि वह कर्म आधारित है और एकात्म मानवता पर केंद्रित है।

प्रहलाद सबनानी
सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक
के-8, चेतकपुरी कालोनी,
झांसी रोड, लश्कर,
ग्वालियर – 474 009
मोबाइल क्रमांक – 9987949940
ई-मेल – psabnani@rediffmail.com

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