केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार पर महंगार्इ और भ्रष्टाचार से निपटने में अक्षम रही सरकार के प्रति अपना गुस्सा झाड़ते हुए एक युवक हरविन्दर ने चाँटा जड़ दिया। यह चाँटा सुरेश कलमाड़ी पर फैंके गये जूते (26 अप्रैल 2011), अरून्धति राय पर फैंके गये जूते (फरवरी 2009), प्रशान्त भूषण की की गर्इ पिटार्इ (12 अक्टूबर 2011) और पूर्व केन्द्रीय दूर संचार मंत्री सुखराम पर किये गये हमले (19 नवम्बर 2011) का नवीनतम स्वरूप है।

चाँटे पर सभी नेताओं ने चिन्ता प्रकट की है। सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने ढंग से इसकी निन्दा की है। निन्दा का कारण उनकी शरद पवार के प्रति सहानुभूति नही है, अपितु उन्हें अपनी चिन्ता है क्योंकि हमाम में ये सब नंगे हैं और इन्हें मालूम है कि अगली प्रतिक्रिया में क्या हो सकता है? व्यकित कभी भी बाहरी चीजों से उतना नही डरता जितना अपने काले कारनामों की काली छाया भीतर से उसे डराती है। एक महात्मा इसीलिये सर्वत्र निर्भीक विचरण करता है क्योंकि उसका अपना आत्मबल उसका सदा मार्गदर्शन करता है, इसीलिये उस पर किसी व्यकित के द्वारा हाथ उठाने की हिम्मत नही होती। जबकि एक डकैत सुरक्षा चक्र में रहकर भी भयभीत रहता है। क्योंकि उसके काले कारनामें उसके आत्मबल को चट कर जाते हैं।

हमारे नेता सुरक्षा चक्र में भी स्वयं को असुरक्षित क्यों महसूस करते हैं? चाँटे पर नेताओं से अलग जनता की प्रतिक्रिया पर यदि ध्यान दिया जाये तो ज्ञात होता है कि जनता ने टी॰वी॰पर आये चाँटे के दृश्य से मजा लिया है।उसे शरद की सजा पर नही अपितु व्यवस्था को मिली सजा पर मजा आया है।सजा पर मजा की यह जनता की रजा व्यवस्था को चिन्ता के लिए नही अपितु चिन्तन के लिए मजबूर करती है। क्योंकि व्यवस्था का चरित्र दोगला ही नही बल्कि कलंकित हो चुका है। जनसेवा राजनीति से यूं उड़ चुकी है जैसे हवा में कपूर उ़ड उड़ जाता है । राष्ट्र सेवा कहीं राजनीति में दीखती ही नही। वह तो राजनीति के समीक्षकों के लिये रेगिस्तान की मृग मरीचिका बन गयी है। इसलिये यशवन्त सिन्हा ने कहा कि यदि नही संभले तो हिंसा होगी। हिंसा से उनका तात्पर्यक्रांति से है। क्रिया की प्रतिक्रिया से है, जब राष्ट्र धर्म अपने कर्तव्य से विमुख होगा तो उसकी प्रतिक्रियाअराजकता में दीखेगी, इस बात से है। ऐसी ही प्रतिक्रिया अन्ना हजारे की रही है। जिन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा किबस एक ही थप्पड़….। इसका अभिप्राय भी यही है कि व्यवस्था पर एक नही अनेक थप्पड़ पड़ने की आवश्यकता है।

इन दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया हिंसा को बढ़ावा देने की नही है, बल्कि अहिंसा की रक्षार्थ-स्वधर्म में स्थिर करने के लिये राजनीति को सही दिशा देने के लिए उनका एक संकेत है। हम भी हिंसा की निन्दा करते हैं- पर इस शर्त के साथ कि ‘चाँटे पर चिन्तन अवश्य होना चाहिये। रामधारी सिंह दिनकर की ये पंकितयाँ याद रखने लायक है:-

नर का भूषण विजय नही,
केवल चरित्र उज्ज्वल है”

राजनीतिज्ञों का धर्म यदि जनसेवा और राष्ट्रसेवा है तो उनके विषय में यह मानना पड़ेगा कि उनके चरित्र का निर्माण जनसेवा और राष्ट्रसेवा से ही होता है। चौबीसों घण्टे उनका चिन्तन इन्ही दोनो बातों पर चालू रहना चाहिये। ऐसे लोगों पर चाँटा नही चलता है, ना ही लोग किराये की माला उन्हें पहनाते हैं, अपितु अपने हर्द्य मंदिर का भगवान बनाकर श्रद्धा पुष्पों से उनका मौन वन्दन और अभिनन्दन करते हैं। किसी कवि ने कहा है :-

”पनिहारी रखे जलघट सिर पर, घूंघट उठा बात भी करती है।
किन्तु चित्त लगा रहता उसका अपनी गगरी में
इसी तरह करते दैनिक कार्य, होता रहे आत्म चिन्तन
और रहे ध्यान पर विकारों में।।

नेताओं का यह चिन्तन समाप्त हो गया तो उन्हें चिन्ता ने आ घेरा है और जनता चिन्ता मग्न नेताओं के खिलाफ ‘चाँटे पर उतर आयी है। मानो वह कर रही है और झकझोर रही है कि जागों और अपनी आत्मा के साथ अपने आप ही बातचीत करना सीखो। चेतन की पुकार को सुनो और चिन्तन शील होकर राष्ट्र की समस्याओं का समाधान खोजो। ‘सुकरात के शब्दों में जनता नेताओं को बता रही है कि जिसमें सोचने की शकित खत्म हो गयी है, समझ लीजिए वह व्यकित बर्बाद हो गया है।’

नेताओं को चाहिये कि वे चिन्ता के मूल को तलाशने पर भी चिन्तन करें। उनकी चिन्ता का मूल उनकी अनन्त चिन्ताओं में छिपा पड़ा है। इन अनन्त इच्छाओं ने उन्हें लोकतंत्र में रहते हुए भी राजकीय वैभवों का दास बना दिया है। इसलिये उन्हें अविवेक ने आ घेरा है और कदाचित यही कारण है कि वो अपने ‘धर्म को पहचानने में भी असहाय और अक्षम हो गये हैं। रामचरित उपाध्याय ने लिखा है :-

चिन्ता जननी चाह है, ताको पति अविवेक।
जो विवेक की चाह तो राम नाम जपु एक।।

संसद में आरोप-प्रत्यारोप और एक दूसरे को निम्न स्तर की भाषा बोलने वाले राजनीतिज्ञ आजकल मंचों पर ‘राजनेता के रूप में दिखार्इ नही देते, वह इस प्रकार लोगों को हंसाने का प्रयास करते है कि लोगों को लगता है कि जैसे वो एक नेता को नही बलिक जोकर को सुन रहे है। संसद की कार्यवाही के प्रति लोगों का आकर्षण कम हो गया है। तथात्मक और गरिमामयी भाषा से ओत-प्रोत भाषण चन्द लोगों को छोड़कर अब संसद में देने वाले राजनेताओं का अकाल सा पड़ गया है।

ऐसी परिसिथतियों में ‘चाँटे की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबन्द करने की ओर पहल करने से भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जनता की सोच में आ रहे परिवर्तन पर विचार किया जाये। व्यवस्था की समीक्षा किया जाना समय की आवश्यकता है। यदि नही जागे तो जनता जगायेगी पर वह कितना उचित होगा? यह अभी तय कर लिया जाये :-

‘तुम मानो या न मानो जाने जहाँ अखितयार है,
हम नेको बद हुजूर को समझाए देते हैं।।

1947 में देश में क्रांति नही हुर्इ थी, पुरानी शराब को नर्इ बोतल में डाला गया था, बस इतना काम हुआ था। देश की जनता ने 64 साल अपने नेताओं को इसी उम्मीद से दिये हैं कि ये लोग व्यापक स्तर पर परिवर्तन कर मौन क्रांति कर डालेंगे। पर जनता की बात को नेताओं ने नही समझा। भारत की आत्मा खून के आँसू रो रही है पर यह इतनी दयालु है और इतनी ममता से भरी है कि फिर भी खूनी क्रांति नही चाहती। माँ की इस पुकार को नेता सुन लें और देश का भला करने के लिए उठ खड़े हों। सचमुच अब हमारी सबकी भलार्इ का यही एकमात्र उपाय है।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş