अविश्वास प्रस्ताव के समय योगी मॉडल की भी चर्चा होनी अपेक्षित थी

images - 2023-08-11T190451.355

संसद में मोदी सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर विपक्ष ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को संसद के मंच से और भी अधिक मुखरता के साथ प्रस्तुत करने का सरकार को अवसर उपलब्ध करा दिया। प्रधानमंत्री मोदी और उनके लोगों के द्वारा भी इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया गया। इस सारे राजनीतिक घटनाक्रम में विपक्ष भ्रमित दिखाई दिया। पराजित मानसिकता के भाव विपक्ष की ओर से अपने विचार रखने वाले हर एक वक्ता के चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। प्रधानमंत्री ने स्वयं इस बात के लिए विपक्ष का धन्यवाद ज्ञापित किया कि उसने उन्हें अपनी सरकार की उपलब्धियों को लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर अर्थात संसद के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का अवसर उपलब्ध कराया।
जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी चिर परिचित शैली में विपक्ष को धोना आरंभ किया तो उनका आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि उनके सामने चुनौती कोई भी नहीं है। विपक्ष को उस समय अपना चेहरा छुपाना कठिन हो गया जिस समय प्रधानमंत्री मोदी अपनी पूर्ण भाव भंगिमा के साथ उसे लपेट रहे थे। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या अपनी इसी फजीहत को कराने के लिए ही विपक्ष सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था? यदि ऐसा था तो माना जा सकता है कि विपक्ष के पास इस समय राजनीतिक परिपक्वता वाला कोई मस्तिष्क नहीं है। अल्हड़गीरी से राजनीति नहीं चलती । राजनीति के लिए परिपक्वता का होना आवश्यक है। अच्छी रणनीति यह होती कि प्रधानमंत्री मोदी को विपक्ष घेरकर कटघरे में लाकर खड़ा करता।
उसके लिए अच्छे से अच्छे वक्ताओं को चुना जाता। इसके अतिरिक्त सांसद के अब तक के इतिहास में जब-जब भी अविश्वास प्रस्ताव आए हैं तो तत्कालीन विपक्षी नेताओं द्वारा प्रस्तुत की गई तार्किक बहस का भी अध्ययन किया जाता और प्रधानमंत्री के अश्वमेध के घोड़े को रोकने का ऐसा प्रबंध किया जाता जिससे एक बार सरकार को पसीना तो आ ही जाता। तब लगता कि विपक्ष वास्तव में अपनी भूमिका के प्रति गंभीर है और वह सरकार को घेरना चाहता भी है और जानता भी है । लोकतंत्र में सरकार को घेरना बहुत आवश्यक होता है, परंतु फिजूल की बातों पर संसद के समय को नष्ट करके और अल्हड़पन दिखाकर यदि किसी भी सरकार को घेरा जाएगा तो उससे सरकार को ऊर्जा ही मिलती है और लोगों की नजरों में यह संकेत जाता है कि विपक्ष अपनी सही भूमिका का निर्वाह नहीं कर रहा है।
इस अविश्वास प्रस्ताव के लाने से पहले विपक्ष ने पराजित मानसिकता का प्रदर्शन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि उसकी पराजय निश्चित है परंतु फिर भी वह इस प्रस्ताव को ला रहा है। जबकि राजनीति में ऐसा नहीं होता है। राजनीति में आपके पास गिनती का खेल पूरा करने के लिए आंकड़े नहीं भी हों तो भी आपको शत्रु पर हावी रहने के लिए अंतिम क्षण तक भी यह कहना पड़ता है और कहना भी चाहिए कि अंतिम विजय हमारी होगी। विपक्ष ने निराशा के भाव दिखाकर सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय और अवसर प्रदान कर दिया। चिंता की कोई लकीर तक सरकार के मस्तक पर दिखाई नहीं दी। राजनीति की पिच पर सत्ता पक्ष के सामने विपक्ष ने जो बॉल फेंकी थी उस पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बार-बार छक्के लगाए।
हमारी स्पष्ट मान्यता है कि विपक्ष का अभिप्राय विपरीत पक्ष नहीं होता है अपितु विशेष पक्ष होता है। भारत की वर्तमान राजनीति में विपक्ष का अभिप्राय विपरीत पक्ष या विरोधी पक्ष हो गया है । सरकार की हर बात का विरोध करना विपक्ष ने अपनी राजनीति का अनिवार्य अंग मान लिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की यह बात पूर्णतया ठीक है कि यदि विपक्ष को हमारे द्वारा लाए गए किसी भी बिल में कोई कमी दिखाई देती है तो उसे वह अपने भाषणों के माध्यम से स्पष्ट करे, जनहित और देश हित में विपक्ष अपना ऐसा दायित्व तथा संबंधित बिल में यह आवश्यक संशोधन लाकर भी कर सकता है, जिससे जनता का और भी अधिक लाभ हो सके । विपक्ष ऐसा ना करके केवल यह कहकर संतोष कर लेता है कि हम ना कोई सही सलाह देंगे और ना ही सही कार्य करने के लिए सरकार को बाध्य करेंगे। कार्य को सही करना सरकार का काम है और कार्य में अड़ंगा डालना हमारा काम है । देश का समझदार मतदाता इस बात को बड़ी गंभीरता से देख रहा है और वह समझ रहा है कि यदि विपक्ष अपनी इसी भूमिका के लिए कार्य करता रहेगा तो यह लोकतंत्र के लिए अभिशाप ही होगा।
देश का मतदाता अब इस बात से बहुत अधिक हताश और निराश हो चुका है कि 2014 से जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं तब से ही विपक्ष केवल अड़ंगा डालने की राजनीति कर रहा है। वह रचनात्मक सहयोग और रचनात्मक सुझाव देने के अपने संवैधानिक धर्म से बहुत दूर जा चुका है। हमारे संसदीय लोकतंत्र में जिस विपक्ष की इच्छा व्यक्त की गई है या जिसे स्थान देने के लिए संविधान निर्माताओं ने तत्संबंधी प्राविधान बनाए हैं उन प्राविधानों की तथा देश के संविधान निर्माताओं की भावनाओं का सम्मान करने में विपक्ष इस समय नाकाम होता जा रहा है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को संसद की कार्यवाही में उपस्थित रहना चाहिए। वह आरोप लगाकर भाग जाते हैं और फिर जनता के बीच जाकर झूठी दहाड़ मारते हैं। इधर-उधर जाकर झूठी दहाड़ मारने से बेहतर है कि वह प्रधानमंत्री का सामना लोकसभा में करें और पूरी गंभीरता के साथ सरकार को घेरते हुए अपने राजनीतिक कला कौशल को दिखाएं ।
यदि हम पूर्ण निष्पक्षता के साथ आकलन करें तो अविश्वास प्रस्ताव के बहाने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही संसद को केवल बंधक बनाए रखा। संसद में विधायी कार्य नहीं हुए केवल अपने-अपने राजनीतिक हित साधने के लिए दोनों पक्ष काम करते रहे और इस मंच का इस प्रकार दुरुपयोग और दोहन किया, जिसे लोकतंत्र के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कहा जा सकता। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी को इस अवसर पर मणिपुर के विषय में भी कोई विशेष घोषणा करनी चाहिए थी और उनकी यह घोषणा केवल यही हो सकती थी कि वहां पर किसी भी ऐसे वर्ग को संरक्षण नहीं दिया जाएगा जो देश विरोधी गतिविधियों में लगा हुआ है। स्पष्ट रणनीति के तहत यह भी घोषणा की जानी चाहिए थी कि मणिपुर की हिंसा के मौलिक कारणों की तहकीकात कर उन लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी जो वहां के मूल लोगों के साथ किसी भी प्रकार के अत्याचार पूर्व में करते रहे हैं और अब उनका दोहन व शोषण कर रहे हैं। यदि केंद्र की मोदी सरकार इस प्रकार का साहस दिखाती तो निश्चय ही उसके इस प्रकार के साहस को सारे देश से समर्थन मिलता। यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि भाजपा के पास योगी जैसा चेहरा होने के उपरांत भी योगी के कार्यों का अनुकरण उच्च स्तर पर नहीं किया जा रहा है।
माना कि योगी एक प्रांत के मुख्यमंत्री हैं और उनका अनुकरण केंद्र सरकार नहीं कर सकती , पर उनकी कार्यशैली से मिले अच्छे परिणामों को स्वीकार कर तदनुसार आचरण तो किया जा सकता है। देश के विपक्ष को तो योगी मॉडल की चर्चा करनी ही नहीं थी पर मणिपुर को लेकर केंद्र सरकार ने भी उस पर चर्चा नहीं कि ऐसा क्यों हुआ?.

डॉ राकेश कुमार आर्य

(लेखक प्रख्यात इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin
grandpashabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
tipobet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
Kolaybet Giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
onwin giriş
onwin giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş