उगता भारत समाचार पत्र के कैलेंडर 2023 का किया गया विमोचन, अनेक वैदिक विद्वानों ने रखे अपने विचार

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ग्रेटर नोएडा (अजय आर्य / संजय कुमार ) यहां स्थित अंसल कॉलोनी में उगता भारत समाचार पत्र परिवार की ओर से पत्र के वैचारिक तथा स्वर्गीय श्री राजेंद्र सिंह आर्य जी की 111 वी जयंती के अवसर पर अथर्व वेद पारायण यज्ञ के पांचवे और अंतिम दिन विशेष कार्यक्रम में उगता भारत समाचार पत्र कैलेंडर 2023 का विमोचन कार्य संपन्न हुआ। इसके बारे में जानकारी देते हुए पत्र के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य ने बताया कि इस बार इस कैलेंडर में हिंदी मासों और तिथियों को और भी बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होने कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुति से निश्चय ही लोगों को अपने सांस्कृतिक इतिहास और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहे राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आनंद कुमार ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रवादी शक्तियों को इस समय एक साथ आने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वेद और यज्ञ की संस्कृति को बचाने के लिए महर्षि दयानंद के सपनों के भारत का निर्माण करना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वह शीघ्र ही एक ऐसा मोर्चा बनाएंगे जिसमें समान विचारधारा के दल या संगठन एक साथआकर एक राजनीतिक शक्ति का निर्माण कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 18 57 की क्रांति के नायक धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ के चेयरमैन श्री तस्वीर सिंह चपराना ने कहा कि माता पिता के प्रति समर्पण का भाव भारतीय सांस्कृतिक संस्कारों की महान परंपरा है। उनके नाम पर इस प्रकार के यज्ञ आदि का आयोजन करना न केवल उनकी विरासत और स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की अच्छी परंपरा को प्रकट करता है बल्कि इससे पर्यावरण शुद्धि भी होती है। इस प्रकार एक साथ दो कामों के करने से सब का भला ही होता है।
इसी प्रकार आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान कुलदीप विद्यार्थी ने अपने संबोधन में कहा कि देश को इस समय ऐसी ताकतों से बड़ा खतरा है जो आर्य संस्कृति के विनाश में लगी हुई हैं। इसके लिए हमें अपने वैदिक मूल्यों के प्रति और भी अधिक समर्पित होने की आवश्यकता है। इसी प्रकार के विचार व्यक्त करते हुए महाशय जगमाल सिंह ने अपने भजनों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन किया और बताया कि इस देश में किस प्रकार श्रीराम और लक्ष्मण जैसे भाई हुए हैं, जिन्होंने एक दूसरे के प्रति समर्पित होकर आर्य संस्कृति की रक्षा की।
कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए समाचार पत्र के मुख्य संरक्षक प्रोफ़ेसर विजेंद्र सिंह आर्य ने वैदिक संस्कृति और संस्कारों को अपना घर परिवार निर्माण से राष्ट्र निर्माण की सुंदर तस्वीर को प्रस्तुत किया। जबकि चेयरमैन श्री देवेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति और इतिहास के प्रति समर्पण का भाव उन्हें अपने पूज्य पिता महाशय राजेंद्र सिंह आर्य से मिला। जिन्होंने समर्पण के भाव को अपनाकर राष्ट्र धर्म और संस्कृति की सेवा की थी। इसी प्रकार पत्र के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति देते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय इतिहास का विकृति करण नहीं बल्कि विलुप्तिकरण किया गया है। जिसके लिए उन्होंने भारत के मानचित्र के माध्यम से यह बात स्पष्ट की कि भारत में किन-किन हिंदू राजाओं का कितना बड़ा बड़ा विशाल साम्राज्य रहा है, परंतु हमें मुगलों और अंग्रेजों के बारे में पढ़ाया जाता है जो कि पूर्णतया गलत है।
कार्यक्रम में मेजर वीर सिंह आर्य, स्वामी सुमित्रानंद जी महाराज, स्वामी वेदानंद जी महाराज, आचार्य सुबोध जी, राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दानवीर सिंह आर्य, सूरजपुर आर्य समाज के प्रधान मूलचंद शर्मा, आर्य समाज गाजियाबाद के मंत्री रहे तेजपाल सिंह आर्य, सरपंच रामेश्वर सिंह, ग्राम पीला आर्य समाज से उपस्थित रहे निरंजन सिंह आर्य, राकेश कुमार आर्य, वेद पाल सिंह आर्य , मझौली से पहुंचे आचार्य अमित व आचार्य सुमित ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर सूबेदार जतन सिंह, वेद पाल आर्य, रविंद्र आर्य, ब्रह्मपाल सिंह आर्य, दीनदयाल शर्मा, विजेंद्र सिंह आर्य, भूदेव सिंह आर्य, सतवीर सिंह आर्य, इलम चंद्र नागर, सत्येंद्र सिंह आर्य, सन्त सिंह बंसल, रईस राम भाटी, ओमवीर सिंह भाटी, प्रेम सिंह आर्य, प्रेमचंद आर्य, सतीश नंबरदार, प्रधान आजाद सिंह, इंदर सिंह आर्य, मंगल सिंह आर्य, डॉक्टर ब्रह्म सिंह, डॉक्टर मनोज आर्य, संदीप गर्ग, अनिल भाटी, परमानंद कुशवाहा, राजेश बैरागी, जितेंद्र डेढ़ा , महेंद्र सिंह आर्य, चरण सिंह आर्य, धर्मेंद्र आर्य, प्रीतम सिंह आर्य, रामजस आर्य, कैलाश चंद्र आर्य आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष देव मुनि जी महाराज ने अध्यक्षीय भाषण के माध्यम से सभा का समापन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन आर्य जगत के युवा नेता और अच्छे विचारक आर्य सागर खारी द्वारा किया गया। इससे पूर्व आर्य जगत के सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य विद्या देव जी महाराज द्वारा अथर्ववेद पारायण यज्ञ संपन्न कराया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रों की मनोहारी व्याख्या आचार्य दुष्यंत द्वारा भी प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा लिखित पुस्तक “सत्यार्थ प्रकाश में इतिहास विमर्श” का विमोचन भी किया गया। डॉक्टर आर्य कि यह 65 मी पुस्तक है।

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