क्रोध करने का अभिप्राय अन्याय करने जैसा है : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक जी महाराज

IMG-20220926-WA0008


दो प्रकार के रोग होते हैं। एक — शारीरिक, और दूसरे — मानसिक। “खांसी ज़ुकाम बुखार टीबी कैंसर इत्यादि ये शारीरिक रोग हैं। और काम क्रोध लोभ ईर्ष्या द्वेष अभिमान इत्यादि ये मानसिक रोग हैं। दोनों प्रकार के रोग व्यक्ति को दुख देते हैं। दोनों से बचने का प्रयत्न करना चाहिए।”
इनमें से ‘क्रोध’ भी एक भयंकर रोग है। व्यक्ति छोटी-छोटी बात पर क्रोध कर लेता है। क्योंकि उसे लगता है, कि “क्रोध करने से मुझे लाभ होगा।” वह समझता है, कि “जब मैं क्रोध करूंगा, तो सामने वाला व्यक्ति मेरे क्रोध करने से सुधर जाएगा।” “ऐसा सोचना उसकी भूल है।” उसे यह सोचना चाहिए, कि “जब कोई दूसरा व्यक्ति उस पर क्रोध करता है, तब क्या उसका सुधार हो जाता है? नहीं होता। बल्कि उसे भी दूसरे व्यक्ति पर क्रोध आता है।” तो जो स्थिति उस व्यक्ति की है, वही सभी की है। इसलिए क्रोध करने पर यह समझना ग़लत है, कि “मेरे क्रोध से दूसरा व्यक्ति अपनी गलती छोड़कर सुधर जाएगा, या अपनी भूल का सुधार कर लेगा।”
वास्तविकता तो यह है, कि “जब तक दूसरा व्यक्ति स्वयं सुधरना नहीं चाहेगा, तब तक वह नहीं सुधरेगा।” उसके लिए आप क्रोध करें, या न करें, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। “हां, यदि आप उसे प्रेम से मीठी भाषा में समझाने का प्रयास करें, तो शायद वह सुधर भी जाए। परंतु गारंटी फिर भी नहीं है। यह तो उसके संस्कारों पर निर्भर करता है।” “यदि उसके संस्कार अच्छे होंगे, तो वह सुधर भी सकता है। और यदि उसके संस्कार अच्छे नहीं होंगे, तो वह नहीं सुधरेगा। इसलिए क्रोध तो नहीं करना चाहिए।”
“यदि कोई व्यक्ति क्रोध करता है, तब दूसरे का सुधार हो, या न हो, परन्तु वह अपनी हानि तो अवश्य ही करता है।” “अतः जो व्यक्ति स्वयं को बुद्धिमान मानता हो, कम से कम वह अपनी हानि तो न करे।” क्योंकि ‘अपनी हानि करना’, यह तो कोई बुद्धिमत्ता का लक्षण नहीं है। “इसलिए यदि आप दूसरे व्यक्ति को सुधारना चाहते हों, तो प्रेम से बात करें, शायद वह सुधर जाए।”
और यदि कहीं किसी घर परिवार या संस्था आदि में आप अधिकारी हों, उसका नियंत्रण करना आपकी जिम्मेदारी हो, “तब भी वहां पर व्यवस्था को ठीक रखने के लिए, आप ‘मन्यु’ का प्रयोग कर सकते हैं, अर्थात न्याय पूर्वक दंड तो दे सकते हैं, तब भी ‘क्रोध’ तो नहीं करना चाहिए।” “क्योंकि क्रोध में तो ‘अन्याय’ ही होता है। और मन्यु अर्थात ठीक ठीक दंड देना, इस व्यवस्था में ‘न्याय’ होता है।”
यदि आप क्रोध करेंगे, तो इसका अर्थ हुआ कि आप अन्याय करेंगे। “और इसका परिणाम बाद में यह निकलेगा, कि आपको लज्जित होना पड़ेगा, चाहे स्वयं के सामने, चाहे दूसरों के सामने।” “जब आपका क्रोध शांत हो जाएगा, तब आपको लज्जा का अनुभव होगा, कि मैंने गलत व्यवहार किया।” ऐसी लज्जा की स्थिति का अनुभव न करना पड़े, इसलिए अच्छा यही है, कि “क्रोध न किया जाए।” “ऐसा तो कर सकते हैं, कि पूरी परिस्थितियों का अध्ययन कर के यदि आपका वहां अधिकार हो, तो गलती करने वाले को, उसके सुधार के लिए, उचित न्याय पूर्वक दंड देकर अपने कर्तव्य का पालन करें, और आनंद में रहें। क्रोध करने से तो अवश्य ही बचें।”
—- स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, रोजड़ गुजरात।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hititbet
hititbet
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino
vdcasino
hititbet
hititbet
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
betmarino
betmarino
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş