देश के आम बजट में राजनीति नहीं, दिखाई देती है राष्ट्र नीति

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 ललित गर्ग

सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में पूंजीगत खर्चों में 35.4 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, इससे रोजगार में वृद्धि होगी। यह बहुत बड़ा फैसला है। वित्त मंत्री ने बजट में क्रिप्टोकरंसी पर भी निवेशकों की उलझन दूर कर दी। उन्होंने इससे हुए मुनाफे पर 30 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा।

सशक्त एवं विकसित भारत निर्मित करने, उसे दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनाने और कोरोना महामारी से ध्वस्त हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दृष्टि से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आम बजट इसलिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि मोदी सरकार ने देश के आर्थिक भविष्य को सुधारने पर ध्यान दिया, न कि लोकलुभावन योजनाओं के जरिये प्रशंसा पाने अथवा कोई राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की है। यह कदम एक ऐसे समय उठाया गया जब राजनीतिक दृष्टि से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं और उन्हें लघु आम चुनाव की भी संज्ञा दी जा रही है। राजनीतिक हितों से ज्यादा देशहित को सामने रखने की यह पहल अनूठी है, प्रेरक है।

कोरोना की संकटकालीन एवं चुनौतीभरी परिस्थितियों में लोककल्याणकारी एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बल देने वाला यह बजट अभिनन्दनीय एवं सराहनीय है। यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था के उन्नयन एवं उम्मीदों को आकार देने की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। इसके माध्यम से समाज के भी वर्गों का सर्वांगीण एवं संतुलित विकास सुनिश्चित होगा। इस बजट से भले ही करदाताओं के हाथ में मायूसी लगी हो, टैक्स स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन इससे देश की अर्थव्यवस्था का जो नक्शा सामने आया है वह इस मायने में उम्मीद की छांव देने वाला है। यह महत्वपूर्ण है कि सरकार ने पूंजीगत व्यय में भारी-भरकम व्यय करने की योजना बनाई उसके साकार होने से अंततः आम आदमी को ही लाभ मिलेगा। इसके साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। अर्थव्यवस्था को गति देने का काम शहरीकरण की उन योजनाओं को आगे बढ़ाने से भी होगा जिनकी प्रावधान बजट में किया गया है। इस बजट में शहर एवं गांवों के संतुलित विकास पर बल दिया है, जो इस बजट की विशेषता है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में पूंजीगत खर्चों में 35.4 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, इससे रोजगार में वृद्धि होगी। यह बहुत बड़ा फैसला है। वित्त मंत्री ने बजट में क्रिप्टोकरंसी पर भी निवेशकों की उलझन दूर कर दी। उन्होंने इससे हुए मुनाफे पर 30 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा। वित्त वर्ष 2023 में रिजर्व बैंक डिजिटल करंसी लाएगा, इसका ऐलान भी निर्मला सीतारमण ने किया। इन दोनों बातों से लगता है कि सरकार ने क्रिप्टोकरंसी को एक एसेट तो मान लिया है, लेकिन वह इन्हें बढ़ावा नहीं देना चाहती। यहां तक कि समृद्ध तबके को भी दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ के टैक्स पर सरचार्ज घटाकर राहत दी गई है। अस्सी लाख सस्ते घरों के लिये 48 हजार करोड़ का प्रावधान करके निम्न-मध्यम आय वर्ग के लिए हाउसिंग सेक्टर में सौगात दी गई है।

भारत की अर्थव्यवस्था को तीव्र गति देने की दृष्टि से यह बजट कारगर साबित होगा, जिसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, रोजगार के नये अवसर सामने आयेंगे, उत्पाद एवं विकास को तीव्र गति मिलेगी। कोरोना महामारी के कारण चालू वित्त वर्ष में आर्थिक क्षेत्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन इन सब स्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट के माध्यम से देश को स्थिरता की तरफ ले जाते दिखाई पड़ रहे हैं। बजट हर वर्ष आता है। अनेक विचारधाराओं वाले वित्तमंत्रियों ने विगत में कई बजट प्रस्तुत किए। पर हर बजट लोगों की मुसीबतें बढ़ाकर ही जाता रहा है। लेकिन इस बार बजट ने कोरोना महासंकट से बिगड़ी अर्थव्यवस्था में नयी परम्परा के साथ राहत की सांसें दी है तो नया भारत- सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी व्यक्त किया है। इस बजट में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रेलों का विकास, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ किसानों, गांवों और गरीबों को ज्यादा तवज्जो दी गयी है। सच्चाई यही है कि जब तक जमीनी विकास नहीं होगा, तब तक आर्थिक विकास की गति सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। इस बार के बजट से हर किसी ने काफी उम्मीदें लगा रखी थीं और उन उम्मीदों पर यह बजट खरा उतरा है। हर बार की तरह इस बार भी शहरों के मध्यमवर्ग एवं नौकरीपेशा लोगों को अवश्य निराशा हुई है। इस बार आम बजट को लेकर उत्सुकता इसलिए और अधिक थी, क्योंकि यह कोरोना महासंकट, पडौसी देशों के लगातार हो रहे हमलों, निस्तेज हुए व्यापार, रोजगार, उद्यम की स्थितियों के बीच प्रस्तुत हुआ है। संभवतः इस बजट को नया भारत निर्मित करने की दिशा में लोक-कल्याणकारी बजट कह सकते हैं। यह बजट वित्तीय अनुशासन स्थापित करने की दिशाओं को भी उद्घाटित करता है। आम बजट न केवल आम आदमी के सपने को साकार करने, आमजन की आकांक्षाओं को आकार देने और देशवासियों की आशाओं को पूर्ण करने वाला है बल्कि यह देश को समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण एवं दूरगामी सोच से जुड़ा कदम है। बजट के सभी प्रावधानों एवं प्रस्तावों में जहां ‘हर हाथ को काम’ का संकल्प साकार होता हुआ दिखाई दे रहा है, वहीं ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से उजागर हो रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रस्तुत यह बजट निश्चित ही अमृत बजट है। जिसमें भारत के आगामी 25 वर्षों के समग्र एवं बहुमुखी विकास को ध्यान में रखा गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आशा के अनुरूप ही बजट का फोकस किसानों, स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास, रोजगार, युवाओं की अपेक्षाओं, विकास और ग्रामीण क्षेत्र पर रखा है। अपने ढांचे में यह पूरे देश का बजट है, एक आदर्श बजट है। इसका ज्यादा जोर सामाजिक विकास पर है। मुश्किल के इस वक्त में भी मोदी सरकार का फोकस किसानों की आय दोगुनी करने, विकास की रफ्तार को बढ़ाने और आम लोगों को सहायता पहुंचाने पर है। अक्सर बजट में राजनीति, वोटनीति तथा अपनी व अपनी सरकार की छवि-वृद्धि करने के प्रयास ही अधिक दिखाई देते है लेकिन इस बार का बजट चुनाव होने के बावजूद राजनीति प्रेरित नहीं है। स्पष्ट है कि सरकार ने चुनावी राजनीतिक हितों के आगे अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के दूरगामी लक्ष्य पर न केवल ध्यान केंद्रित किया बल्कि यह भी रेखांकित किया कि उसका उद्देश्य 2047 तक भारत को एक समर्थ-सक्षम देश के रूप में सामने लाना है।

गरीब तबके और ग्रामीण आबादी की बढ़ती बेचैनी को दूर करने की कोशिश इसमें स्पष्ट दिखाई देती है जो इस बजट को सकारात्मकता प्रदान करती है। इस बजट में किसानों की बढ़ती परेशानियों को दूर करने के भी सार्थक प्रयत्न हुए हैं, जिसे मेहरबानी नहीं कहा जाना चाहिए। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात एमएसपी जारी रहने का उल्लेख करते हुए जिस तरह यह रेखांकित किया कि इस मद में 2.37 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वह यही बताता है कि सरकार ने उस दुष्प्रचार की हवा निकालना आवश्यक समझा जिसके तहत कुछ कथित किसान नेताओं के साथ कई विपक्षी नेता यह झूठ फैलाने में लगे हैं कि यह सरकार एमएसपी खत्म करने का इरादा रखती है। इस पर हैरानी नहीं कि विपक्ष को बजट रास नहीं आया। वह सदैव इसी तरह की नकारात्मक प्रतिक्रिया से लैस दिखता है और यही कारण है कि जनता उसकी आलोचना पर उतना ध्यान नहीं देती जितना उसे देना चाहिए। खेती और किसानों की दशा सुधारना सरकार की प्राथमिकता में होना ही चाहिए, क्योंकि हमारा देश किसान एवं ग्रामीण आबादी की आर्थिक सुदृढ़ता और उनकी क्रय शक्ति बढ़ने से ही आर्थिक महाशक्ति बन सकेगा। और तभी एक आदर्श एवं संतुलित अर्थव्यवस्था का पहिया सही तरह से घूम सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था संवारने की दिशा में इस बजट को मील का पत्थर कहा जा सकता हैं।
इस बजट में जो नयी दिशाएं उद्घाटित हुई है और संतुलित विकास, भ्रष्टाचार उन्मूलन, वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शी शासन व्यवस्था का जो संकेत दिया गया है, सरकार को इन क्षेत्रों में अनुकूल नतीजे हासिल करने पर खासी मेहनत करनी होगी। देश में डिजिटल व्यवस्थाओं को सशक्त एवं प्रभावी बनाने का भी सरकार ने संकल्प व्यक्त किया है। 

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