मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के समक्ष उठाये कई अहम मुद्दे

प्र्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिश कर्ता जकी-उर-रहमान लखवी को जेल से रिहा करने के मामले एवं पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में कार्रवाई के प्रस्ताव को चीन द्वारा रोक जाने पर भारत की गंभीर चिंता को आज चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सामने मजबूती से उठाया। साथ ही उन्होंने 46 अरब डॉलर लागत वाले आर्थिक गलियारे के मुद्दे को भी उनके सामने रखा।

इससे पहले जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) को करीब लाने और इन देशों के बीच व्यापक साझेदारी के लिए चीन और भारत को मिलकर काम करने की अपील की।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की पिछले महीने हुई बैठक के दौरान भारत ने लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर लखवी को सुनवायी के दौरान रिहा किए जाने को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन चीन के प्रतिनिधि ने इस आधार पर प्रस्ताव को ब्लॉक कर दिया कि भारत ने इस संबंध में समुचित सूचनाएं मुहैया नहीं करायी हैं।

ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से पहले दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट तक चली इस बैठक के दौरान मोदी ने लखवी मुद्दे के साथ चीन द्वारा बनाए जा रहे 46 अरब डॉलर लागत वाले आर्थिक गलियारे पर भी देश की चिंता से जिनफिंग को अवगत कराया। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। विदेश सचिव एस. जयशंकर ने मोदी-शी बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन द्वारा प्रस्ताव को रोके जाने के मुद्दे को मजबूती से उठाया। उन्होंने भारत की चिंताओं से अवगत कराया। पिछले एक वर्ष में दोनों नेताओं की यह पांचवी बैठक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की चिंताओं को जिस स्पष्टवादिता के साथ कही उससे चीनी पक्ष प्रभावित है। ऐसा महसूस हुआ कि हमें उस पर बात करते रहना चाहिए। यह पूछने पर कि मुद्दे पर बातचीत का प्रारूप क्या होगा, उन्होंने कहा कि नेता जहां छोड़ेंगे, अधिकारी वहां से शुरू करेंगे। उन्होंने कहा? कि कोई विशेष तंत्र नहीं है। पर विदेश मंत्रालय चीनी दूतावास के साथ बात कर सकता है। इसकी अनेक प्रक्रियाएं हैं। मोदी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग को चिंताओं से अवगत कराते हुए उन्हें यह भी बताया कि चीन की इस कार्रवाई को भारत के लोग किस रूप में देखते हैं। भारत ने इससे पहले कहा था कि चीन की कार्रवाई दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में हो रही प्रगति से मेल नहीं खाती है। मुंबई हमले के सरगना लख्वी को पाकिस्तान ने अप्रैल महीने में जेल से रिहा कर दिया।लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और जमात-उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद के करीबी रिश्तेदार लखवी को दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था और 25 नवंबर 2009 में छह अन्य लोगों के साथ उसपर 26-11 हमले के आरोप तय हुए थे। हमलों में 166 लोग मारे गए थे। बैठक के बाद विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि संबंधों में नई उर्जा की और उत्साह के साथ सीमा मुद्दे, विश्वास बहाली संबंधी कदमों, सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने और सीमा पर अधिक ‘मिटिंग प्वाइंट’ बनाने पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता और परमाणु आपूर्ति समूह की सदस्यता के लिए भारत के दावे के मुद्दे को भी चर्चा के दौरान उठाया गया। विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने काफी देर तक मई में हुई मोदी की गर्मजोशी भरी चीन यात्रा और राष्ट्रपति शी के गृहनगर शिआन की उनकी यात्रा पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पिछली बैठक से अभी द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति, विशेष रूप से वाणिज्यिक और आर्थिक सहयोग में, की समीक्षा की। बातचीत के दौरान ब्रिक्स समूह में सहयोग और बीजिंग के समर्थन वाले एशियाई अवसंचरना निवेश बैंक, जिसमें भारत दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है, पर भी चर्चा हुई। शी के साथ अपनी बैठक पर मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति शी से फिर से मिलना बहुत अच्छा रहा। हमारी बातचीत काफी विस्तृत थी और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति शी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं। प्रधानमंत्री ने चीन के विभिन्न शहरों में सफलतापूर्वक पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन पर चीनी नेता को धन्यवाद भी दिया।

पिछले साल जुलाई में ब्राजील के फोर्तालेजा में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात के बाद से यह उनकी चौथी द्विपक्षीय बैठक है। सितंबर 2014 में शी ने भारत का दौरा किया था जबकि मोदी ने इस साल मई में चीन की यात्रा की थी। शी और मोदी ने अपनी द्विपक्षीय यात्राओं के दौरान एक दूसरे के गृह नगरों का भी दौरा किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप चतुर्वेदी ने बताया कि एक साल में दोनों नेताओं की यह पांचवी मुलाकात भारत और चीन संबंध में गहराई को दर्शाती है।

जिनपिंग ने कहा कि इस बैठक से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह सकारात्मक संदेश मिला था कि दुनिया के दो बड़े विकासशील राष्ट्र साझा विकास के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल के वर्षो में भारत और चीन ने अपने व्यापार सहयोग को विस्तार दिया है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में प्रगति की है।

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