चीन एक ऐसा पड़ोसी देश है जिसकी किसी बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता

china army

विजय क्रांति

नौ महीने तक लद्दाख के पैंगोंग झील इलाके में भारी जमावड़े के बाद भारतीय और चीनी सेनाओं द्वारा अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने से दोनों देशों के बीच सैनिक तनाव कुछ कम तो जरूर हुआ है, लेकिन भारत में अभी भी चीन की नीयत के प्रति संदेह कम नहीं हो रहा है। संसद में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि लंबी आनाकानी के बाद चीन पीछे हटने को इस कारण राजी हुआ कि उसे समझ आ गया कि भारत चीनी दादागीरी के आगे झुक जाने की नीति छोड़ चुका है और अब वह अपनी एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेगा।

रक्षामंत्री ने खास तौर से कैलास पर्वत शृंखला की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सेना के मोर्चा संभालने का जिक्र किया, जिसके कारण पूरे इलाके पर उसका दबदबा बन गया था और चीनी सेना के लिए हालत चिंताजनक हो गए थे, लेकिन रक्षा विषेशज्ञों को चिंता है कि अगर चीन किसी दिन मुकर गया तो उसके लिए फौज और टैंकों को फिर से फिंगर-4 तक लाना बहुत मुश्किल नहीं होगा। क्या इस स्थिति में भारतीय सेना उतने आराम से फिर से कैलास की चोटियों पर मोर्चे बना सकेगी?

रक्षा विषेशज्ञों को इस पर शंका है कि चीन अधिक समय तक आक्रामक रवैया छोड़कर शांत बैठा रहेगा। वे गलवन घाटी में चीनी सैनिकों की उस हरकत की याद दिला रहे हैं, जब चीनी सैनिकों ने अचानक भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। चीन का इतिहास बताता है कि वह कोई भी समझौता अपनी सुविधा और मजबूरी के तहत ही करता है। परिस्थितियां बदलने पर या हालात अपने अनुकूल होने पर पिछले वादों और सहमतियों को ताक पर रखकर नया आक्रामक रवैया अपना लेना उसके व्यवहार का हिस्सा बन चुका है। इसलिए पैंगोंग झील के इलाके में मौजूदा शांति का अर्थ यह कतई नहीं लिया जा सकता कि इस इलाके में चीन और भारत का विवाद हल हो गया है और भविष्य में चीनी सेना वहां पर फिर से घुसने का प्रयास नहीं करेगी। पिछले कई दशकों में यह पहला अवसर है जब किसी इलाके में घुस आने और अपनी चौकियां बना लेने के बाद चीन अपनी सेना को वापस बुलाने पर राजी हुआ। पैंगोंग झील इलाके में चीन के पीछे हटने के कई आयाम हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है। पहली बात यह कि लद्दाख के गलवन, हॉट स्प्रिंग-गोगरा और देपसांग में विवाद अभी ज्यों का त्यों है। ये सभी इलाके हिमालय के बहुत ऊंचे हिस्से में हैं, जहां सॢदयां अत्यधिक कठिन होती हैं। चीनी सेना के लिए यह पहला मौका है, जब किसी टकराव वाली हालत में उसे इतने ठंडे इलाके में तैनात किया गया, जबकि भारतीय सेना को गलवन के निकट सियाचिन में पाकिस्तान से लोहा लेने का बहुत लंबा अनुभव है। चीनी सेना के पैंगोंग से पीछे हटने का एक कारण यह भी है कि वह सॢदयों में हथियारबंद टकराव को टालना चाहता था। इसलिए सर्दियां खत्म होने के बाद चीन की नीयत फिर से नहीं बदल जाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
दूसरे, चीनी सेना के लिए इस इलाके में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत ने दरबुक से श्योक नदी और अक्साई चिन से एकदम सटी हुई अपनी हवाई पट्टी दौलत बेग ओल्डी तक सड़क बना ली है, जो गलवन से होकर गुजरती है। इस सड़क ने भारतीय सेना को सियाचिन तक के इलाके पर अपनी पकड़ मजबूत करने की सुविधा दे दी है। इसके कारण चीन के कराकोरम राजमार्ग पर खतरा बहुत बढ़ गया है। तीसरा कारण यह है कि गलवन में हमले का फैसला बीजिंग के निर्देश पर हुआ। बीजिंग के लिए परेशानी की एक बड़ी बात यह थी कि मोदी सरकार ने अपने सैन्य नेतृत्व को चीनी सेना की किसी भी हरकत से निपटने के लिए खुद फैसला करने और मौके पर तुरंत कार्रवाई करने की छूट दे दी थी। इससे पहले नई दिल्ली ने सेना के हाथ बांधे हुए थे और जवाबी कार्रवाई के लिए किसी सैन्य फैसले पर अमल करने से पहले सैन्य नेतृत्व को रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की अफसरशाही की फाइलों के लंबे गलियारों में इतना ज्यादा समय नष्ट करना पड़ता था कि तब तक चीनी सेना कब्जा करने के बाद पक्के मोर्चे भी बना चुकी होती थी।

लद्दाख में चीन ने जो कार्रवाई की, उसके पीछे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का यह इरादा था कि सीमित लड़ाई में लद्दाख का मोर्चा फतह कर वह कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी सम्मेलन में हीरो बनकर उभरेंगे, लेकिन भारतीय सेना ने चीनी सेना को जैसी चुनौती दी, उसके बाद उन्हें डर सताने लगा कि लंबे समय तक सीमा पर भारत के साथ उलझे रहने से उनकी छवि एक कमजोर नेता की बनेगी और आजीवन पद पर बने रहने के बजाय ‘लेने के देनेÓ भी पड़ सकते हैं। चूंकि यह आशंका है कि चीन सीमा पर फिर से कोई हरकत कर सकता है इसलिए भारत को उससे निपटने के लिए एक नई रणनीति अपनाने की जरूरत है। मोदी सरकार को यह समझना जरूरी है कि चीन के इरादों से आत्मरक्षा पर टिकी पुरानी नीति से नहीं निबटा जा सकता। आॢथक और सैनिक शक्ति बढऩे के साथ चीन का दंभ बढ़ता जा रहा है। चीन रावण सरीखा बन चुका है। उसके सिरों को उगने से तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक उसकी नाभि के अमृतकुंड को नहीं सुखा दिया जाए। आज के चीन के असली अमृतकलश तिब्बत, शिंजियांग और दक्षिणी मंगोलिया जैसे उपनिवेश हैं। इनके अथाह स्रोतों को लूटकर वह अपना आॢथक साम्राज्य खड़ा किए हुए है और भारत, नेपाल, भूटान और मध्य एशिया के देशों की नाक में दम किए हुए है। चीन का इलाज गलवन, पैंगोंग और देपसांग में एक दो किमी के लिए मेज पर वार्तालाप से नहीं होगा। इसके बजाय भारत के लिए सही रणनीति यह होगी कि वह तिब्बत और शिंजियांग पर चीन के औपनिवेशिक कब्जे को चुनौती देते हुए उसे बताए कि तिब्बत की जिस जमीन पर खड़ा होकर वह लद्दाख और अरुणाचल के भूभाग पर दावे करता आ रहा है और सैनिक धमकियां दे रहा है, वहां उसकी उपस्थिति गैरकानूनी है। अगर मोदी सरकार चीन को इस सच का आईना दिखाने का साहस करती है तो तिब्बत की आजादी के इच्छुक अमेरिका, यूरोप और जापान इस अभियान में कूदने को तैयार हैं।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
parmabet giriş
piabellacasino giriş
betovis giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
milanobet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betgaranti mobil giriş
parmabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
savoybetting giriş
parmabet giriş
jojobet giriş
betlike giriş
betcup giriş
hitbet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betcup giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
nesinecasino giriş
rekorbet giriş
rekorbet giriş
pumabet giriş
pumabet giriş
nesinecasino giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betnano giriş