images

भारतीय संस्कृति का ही नहीं बल्कि विश्व संस्कृति के मूल स्रोत भी वेद है । वेदों के दिए संस्कारों और उन्हीं की व्यवस्था के आधार पर सारे संसार की व्यवस्था चलती रही है । आज भी वैदिक ज्ञान ही संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है और यदि संसार में कहीं मानवता जीवित है तो उसके बारे में भी निसंकोच कहा जा सकता है कि वह वैदिक ज्ञान और उसके संस्कारों के कारण ही जीवित है।

ज्ञान कर्म और उपासना यह तीन प्रकार की शिक्षाएं या विद्याएं हमारे वेदों में दी गई है । ऋग्वेद में ऋषि अग्नि द्वारा ईश्वर से प्राप्त ज्ञान को संकलित किया गया है और यह ज्ञान से संबंधित है। यजुर्वेद ऋषि वायु द्वारा प्राप्त किया गया कर्म के विषय का वेद है। सामवेद ऋषि आदित्य द्वारा प्राप्त है । जिसका विषय उपासना है । इसके अलावा चौथा वेद अथर्ववेद ऋषि अंगिरा द्वारा प्राप्त है और जिसका विषय विज्ञान है। अर्थात ज्ञान ,कर्म और उपासना ऋग्वेद , यजुर्वेद , सामवेद , अथर्ववेद में क्रमशः उपलब्ध हैं। इनके चार उपवेद हैं आयुर्वेद, धनुर्वेद ,गंधर्व वेद ,अर्थ वेद या शिल्प वेद।
आयुर्वेद में रोग, धनुर्वेद में सेना, गंधर्व वेद में गायन, अर्थ वेद में धन संबंधित विषय है।
चार ब्राह्मण होते हैं । शतपथ , ऐतरेय , साम ,गोपथ। शतपथ में ऋग्वेद के ब्राह्मण, ऐतरेय में यजुर्वेदीय ब्राह्मण, सामवेद में सामवेदीय ब्राह्मण, गोपथ में अथर्ववेदीय ब्राह्मण हैं।
उपनिषद 11 होते हैं । जो निम्न प्रकार हैं – ईश, कठ, मुंडक, मंडुक्य, तैत्तिरीय, बृहद आरण्यक ,केन ,प्रश्न, ऐतरेय, छांदोग्य।
6 उपांग ,शास्त्र या दर्शन होते हैं।
मीमांसा ,वेदांत ,न्याय, वैशेषिक ,सांख्य ,योग।
वेदांग 6 होते हैं :-
शिक्षा, कल्प,व्याकरण, निरुक्त ,छंद ,ज्योतिष।
स्मृति ग्रंथ निम्न प्रकार हैं :-
मनुस्मृति ,याज्ञवल्क्य स्मृति आदि।
नीति शास्त्र निम्न प्रकार है —
नीतिशतकम् , श्रंगार -शतकम , वैराग्य शतक। यह तीनों महाराज भर्तृहरि द्वारा रचित है। इनके अलावा चाणक्य नीति चाणक्य द्वारा रचित है । शुक्र नीति शुक्राचार्य द्वारा रचित है । महर्षि दयानंद सरस्वती वैदिक सिद्धांत त्रई, सत्यार्थ प्रकाश।
ऋग्वेदादिभाष्य – भूमिका, संस्कार विधि।
पाणिनी व्याकरण, अष्टाध्यायी ,महाभाष्य ,निघंटु, निरुक्त।

विद्वानों ने उपनिषदों को वेदों का अंतिम भाषण वेदांत का नाम भी दिया है। उपनिषद शब्द रूप और नि उपसर्ग तथा षद धातु के सहयोग से बना है । श्रद्धा का प्रयोग गति अर्थात गमन , ज्ञान और प्राप्ति के संदर्भ में होता है । इसका तात्पर्य होता है कि जिस विद्या से परम ब्रह्म अर्थात ईश्वर का स्वामित्व प्राप्त हो उसके साथ तादात्म्य स्थापित हो , वह विद्या उपनिषद कहलाती है । उपनिषद में श्रद्धा के तीन अर्थ और भी हैं – विनाश गति और ज्ञान प्राप्ति और शिथिल करना। इस प्रकार उपनिषद का अर्थ हुआ जो ज्ञान पाप का नाश करें ,सच्चा ज्ञान प्राप्त कराएं, आत्मा के रहस्य को समझाए ,अज्ञान को शिथिल करे , वह उपनिषद है।

उपनिषद के अध्ययन से ब्रह्म से साक्षात्कार किया जा सकता है । इसे इसलिए अध्यात्म विद्या भी कहा जा सकता है। महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, कवि रविंद्रनाथ टैगोर, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ,संत विनोबा भावे ,आचार्य बलदेव उपाध्याय, गोविंद बल्लभ पंत, पंडित रविशंकर शुक्ल, स्वामी परमानंद ने उपनिषदों का अध्ययन करके बताया है कि इन्हीं उपनिषदों में सच्चा ज्ञान छिपा हुआ है।
उक्त के अलावा मुगल राजकुमार दाराशिकोह, अलबरूनी ,शॉपेनहावर ,इमर्शन मैक्स मूलर, प्रोफेसर ह्युम ,प्रोफेसर जी आर्क, डॉक्टर एनी बेसेंट और बेवर ने भी भारतीय उपनिषदों को ईश्वरीय ज्ञान के महानतम ग्रंथ बताया है। ईश्वर , जीव और प्रकृति के संबंधों की विवेचना कर मनुष्य में छिपी सर्वोत्कृष्ट संभावनाओं को प्रकट करने वाले उपनिषद ही हैं।
इन उपनिषदों के सामने सुकरात ,अरस्तु ,अफलातून आदि दार्शनिकों के लिखे गए ग्रंथ सतही प्रतीत होते हैं। हम जानते हैं कि ज्ञान के सर्वाधिक प्राचीनतम ग्रंथ भारतीय वेद हैं । उपनिषद इन वेद ग्रंथों को सहज रूप से समझने तथा समझाने का प्राचीन ऋषियों का सतत प्रयास है। उपनिषद ही आदि भौतिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं। उपनिषदों में संपूर्ण विश्व को शक्ति प्रदान करने की दिव्य शक्ति है। यह उपनिषद प्राणीमात्र के हित के लिए तथा समूची मानव जाति के लिए रचे गए हैं। इनके अंदर ईश्वर जीव और प्रकृति के शाश्वत संबंधों की विस्तृत व्याख्या तथा भारतीय ऋषि मुनियों के आध्यात्मिक चिंतन की ऐसी पराकाष्ठा है जो अन्यत्र कहीं दृष्टिगोचर नहीं होती।
अलबेरूनी नाम का अरब देश का रहने वाला विदेशी विद्वान जब भारत आया तो उसने उपनिषदों और गीता की शिक्षाओं का अध्ययन किया । उनके अध्ययन से उसे जब आत्मिक शांति प्राप्त हुई तो उसके मुंह से अनायास ही ये शब्द निकल गए —’उपनिषदों की सार-स्वरूपा ‘गीता’ भारतीय ज्ञान की महानतम् रचना है।’
दारा शिकोह शाहजहां का एक बहुत ही प्यारा बेटा था। यह राजकुमार उपनिषदों से असीम अनुराग रखता था । यही कारण था कि वह किसी भी प्रकार की सांप्रदायिकता से निरपेक्ष रहकर मानवतावाद से प्रभावित था । यदि उसकी परंपरा भारत में आगे चलती रहती तो इससे न केवल मुगल वंश को भारतवर्ष में स्थायित्व प्राप्त होता बल्कि भारत के लोग मुगल वंश को अपना मानकर उसके शासन की के स्थायित्व की कामना भी करने लगते । इस राजकुमार अर्थात शहजादे ने उपनिषदों के अध्ययन के उपरांत कहा था — ” मैने क़ुरान, तौरेत, इञ्जील, जुबर आदि ग्रन्थ पढ़े। उनमें ईश्वर सम्बन्धी जो वर्णन है, उनसे मन की प्यास नहीं बुझी। तब हिन्दुओं की ईश्वरीय पुस्तकें पढ़ीं। इनमें से उपनिषदों का ज्ञान ऐसा है, जिससे आत्मा को शाश्वत शान्ति तथा आनन्द की प्राप्ति होती है। हज़रत नबी ने भी एक आयत में इन्हीं प्राचीन रहस्यमय पुस्तकों के सम्बन्ध में संकेत किया है। ”
दारा शिकोह पर यह वैदिक धर्म के उपनिषदों का ही प्रभाव था कि वह हिंदू धर्म के प्रति बहुत ही विनम्र भाव रखता था । यह इस देश का दुर्भाग्य रहा कि उसे मारकर औरंगजेब देश का बादशाह बन गया और दारा शिकोह की परंपरा इस देश में आगे नहीं बढ़ पाई।
जर्मन दार्शनिक आर्थर शोपेन हॉवर एक ऐसा विदेशी विद्वान है जो उपनिषदों की शिक्षाओं को पाकर नाच उठा था । उसे लगा था कि आज उसने अपने जीवन का सबसे बड़ा खजाना पा लिया है । उसकी आत्मा की तृप्ति क्या हुई वह तृप्ति के आनंद में इतना भावविभोर हो गया कि उपनिषदों को सिर पर रख कर नाचने लगा। उसका मत है कि — ” मेरा दार्शनिक मत उपनिषदों के मूल तत्त्वों के द्वारा विशेष रूप से प्रभावित है। मैं समझता हूं कि उपनिषदों के द्वारा वैदिक-साहित्य के साथ परिचय होना, वर्तमान शताब्दी का सनसे बड़ा लाभ है, जो इससे पहले किसी भी शताब्दी को प्राप्त नहीं हुआ। मुझे आशा है कि चौदहवीं शताब्दी में ग्रीक-साहित्य के पुनर्जागरण से यूरोपीय-साहित्य की जो उन्नति हुई थी, उसमें संस्कृत-साहित्य का प्रभाव, उसकी अपेक्षा कम फल देने वाला नहीं था। यदि पाठक प्राचीन भारतीय ज्ञान में दीक्षित हो सकें और गम्भीर उदारता के साथ उसे ग्रहण कर सकें, तो मैं जो कुछ भी कहना चाहता हूं, उसे वे अच्छी तरह से समझ सकेंगे उपनिषदों में सर्वत्र कितनी सुन्दरता के साथ वेदों के भाव प्रकाशित हैं। जो कोई भी उपनिषदों के फ़ारसी, लैटिन अनुवाद का ध्यानपूर्वक अध्ययन करेगा, वह उपनिषदों की अनुपम भाव-धारा से निश्चित रूप से परिचित होगा। उसकी एक-एक पंक्ति कितनी सुदृढ़, सुनिर्दिष्ट और सुसमञ्जस अर्थ प्रकट करती है, इसे देखकर आंखें खुली रह जाती है। प्रत्येक वाक्य से अत्यन्त गम्भीर भावों का समूह और विचारों का आवेग प्रकट होता चला जाता है। सम्पूर्ण ग्रन्थ अत्यन्त उच्च, पवित्र और एकान्तिक अनुभूतियों से ओतप्रोत हैं। सम्पूर्ण भू-मण्डल पर मूल उपनिषदों के समान इतना अधिक फलोत्पादक और उच्च भावोद्दीपक ग्रन्थ कही नहीं हैं। इन्होंने मुझे जीवन में शान्ति प्रदान की है और मरते समय भी यह मुझे शान्ति प्रदान करेंगे।”

देवेंद्र सिंह आर्य
चेयरमैन : उगता भारत

Comment:

meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betcio giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino
holiganbet
holiganbet
holiganbet
holiganbet
holiganbet
sonbahis
casinolevant
holiganbet
sonbahis
holiganbet
sonbahis
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
betist
tipobet
holiganbet
betist giriş
holiganbet
holiganbet giriş
sonbahis giriş
sonbahis giriş
sonbahis
Hititbet Giriş
Hititbet Güncel Giriş
holiganbet
matadorbet
betist
tipobet
betist giriş
matadorbet
tipobet
sonbahis
holiganbet
matadorbet
tipobet
tipobet
betist
tipobet
betist
holiganbet
betist
holiganbet
matadorbet
betist
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betyap giriş
vdcasino
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vipslot giriş
vdcasino giriş
betist
matadorbet
casinolevant
holiganbet
sonbahis
bettilt giriş
hilbet giriş
bettilt giriş
tipobet
betist
vipslot giriş
matadorbet
betist giriş
matadorbet giriş
betist
betist
matadorbet giriş
holiganbet giriş
sonbahis giriş
betist
matadorbet
betist
matadorbet
holiganbet
betist giriş
betist
holiganbet
sonbahis
matadorbet
betist
sonbahis
matadorbet giriş
hititbet giriş
betist giriş
betist güncel giriş