सांस्कृतिक परम्पराओं के चलते पूरे विश्व में अपना विशेष स्थान बनाता भारत

कुंभ का मेला

आर्थिक क्षेत्र में प्रगति की दृष्टि से भारत की अपनी विशेषताएं हैं, जो अन्य देशों में नहीं दिखाई देती हैं। उदाहरण के लिए भारत में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों एवं मेलों आदि में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं द्वारा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से इन मेलों/कार्यक्रमों में भाग लिया जाता है बल्कि इन श्रद्धालुओं द्वारा इन स्थानों पर किये जाने वाले खर्च से स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने एवं रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित करने में भी अपना योगदान दिया जाता है। इसी प्रकार, धार्मिक पर्यटन भी केवल भारत की विशेषता है। प्रतिवर्ष करोड़ों परिवार धार्मिक स्थलों पर, विशेष महुरतों पर, पूजा अर्चना करने के लिए इकट्ठा होते है। जम्मू में माता वैष्णोदेवी मंदिर, वाराणसी में भगवान भोलेनाथ मंदिर, अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर, उज्जैन में बाबा महाकाल मंदिर, दक्षिण में तिरुपति बालाजी मंदिर आदि ऐसे श्रद्धास्थल है जहां पूरे वर्ष भर ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। प्रत्येक 3 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले कुम्भ के मेले में भी करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु ईश्वर की पूजा अर्चना हेतु प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक एवं उज्जैन में पहुंचते हैं। शीघ्र ही, 14 जनवरी 2025 से लेकर 26 फरवरी 2025 तक प्रयागराज में महाकुम्भ मेले का आयोजन किया जा रहा है। महाकुम्भ की 44 दिनों की इस इस पूरी अवधि में प्रतिदिन एक करोड़ श्रद्धालुओं के भारत एवं अन्य देशों से प्रयागराज पहुंचने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है, इस प्रकार, कुल मिलाकर लगभग 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुगण उक्त 44 दिनों की अवधि में प्रयागराज पहुंचेंगे। करोड़ों की संख्या में पहुंचने वाले इन श्रद्धालुगणों द्वारा इन तीर्थस्थलों पर अच्छी खासी मात्रा में खर्च भी किया जाता है। जिससे विशेष रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को तो बल मिलता ही है, साथ ही करोड़ों की संख्या में देश में रोजगार के नए अवसर भी निर्मित होते हैं एवं होटल उद्योग, यातायात उद्योग, पर्यटन से जुड़े व्यवसाय, स्थानीय स्तर के छोटे छोटे उद्योग एवं विभिन्न उत्पादों के क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यापारियों के व्यवसाय में भी अतुलनीय वृद्धि होती दिखाई देती है।

इसी प्रकार, भारत में विवाहों के मौसम में सम्पन्न होने वाले विवाहों पर किए जाने वाले भारी भरकम खर्च से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है। वर्ष 2024 के, मध्य नवम्बर से मध्य दिसम्बर के बीच, भारत में 50 लाख विवाह सम्पन्न हुए हैं। उक्त एक माह की अवधि के दौरान सम्पन्न हुए इन विवाहों पर भारतीय परिवारों द्वारा 7,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि का खर्च किया गया है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में सम्पन्न हुए विवाहों पर 5,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि का खर्च किया गया था। उक्त वर्णित 50 लाख विवाहों पर औसतन प्रति विवाह 14,000 डॉलर, अर्थात लगभग 13 लाख रुपए की राशि का खर्च किया गया है एवं 50,000 विवाहों पर तो एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि का खर्च किया गया है। भारत में प्रति विवाह होने वाला औसत खर्च, परिवार की औसत प्रतिवर्ष की कुल आय का तीन गुणा एवं देश में औसत प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के 5 गुणा के बराबर रहता है। भारत में विवाहों पर पूरे वर्ष में कुल 13,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का खर्च किया जाता है जो चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। चीन में प्रतिवर्ष विवाहों पर 17,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर का खर्च किया जाता है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आगामी वर्ष में भारत, विवाहों पर किए जाने वाले खर्च की दृष्टि से, चीन को पीछे छोड़कर पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर आ जाएगा। भारत में प्रति वर्ष एक करोड़ विवाह सम्पन्न होते हैं। भारत में सर्दियों के मौसम को विवाहों का मौसम कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं हैं क्योंकि पूरे वर्ष भर में सम्पन्न होने वाले विवाहों में से लगभग 50 प्रतिशत विवाह सर्दियों के मौसम में ही सम्पन्न होते हैं।

भारत में विवाहों पर होने वाले भारी भरकम राशि के कुल खर्च में से प्रीवेडिंग फोटोग्राफी, वेडिंग फोटोग्राफी, पोस्टवेडिंग फोटोग्राफी पर लगभग 10 प्रतिशत की राशि का खर्च किया जाता है। विवाह के स्थान के चयन एवं साज सज्जा पर वर्ष 2023 में 18 प्रतिशत की राशि का खर्च किया गया था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है क्योंकि भारतीय परिवारों द्वारा विवाह अब अन्य शहरों यथा गोवा, पुष्कर, उदयपुर एवं केरला जैसे स्थानों पर सम्पन्न किया जा रहे हैं। खानपान आदि पर कुल खर्च का लगभग 10 प्रतिशत भाग खर्च किया जा रहा है। म्यूजिक आदि पर लगभग 6 प्रतिशत की राशि का खर्च किया जा रहा है। इसी प्रकार, ज्वेलरी, ऑटो बाजार एवं सोशल मीडिया आदि पर भी अच्छी खासी राशि का खर्च किया जाता है। इससे, उक्त समस्त क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित होते हैं। अतः भारत में विवाहों के मौसम में होने वाले भारी भरकम राशि के खर्च से देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर को तेज करने में सहायता मिलती है।

हाल ही में सम्पन्न हुए विवाहों के मौसम में भारतीय परिवारों द्वारा किए गए खर्च के चलते अब ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की तृतीय तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर को गति मिलेगी जो द्वितीय तिमाही में गिरकर 5.2 प्रतिशत के स्तर पर आ गई थी। विनिर्माण क्षेत्र एवं सेवा क्षेत्र में विकास दर अधिक रहने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। बंग्लादेश में राजनैतिक अस्थिरता के चलते रेडीमेड गार्मेंट्स के क्षेत्र में विनिर्माण इकाईयां बंद हो रही हैं एवं वैश्विक स्तर पर रेडीमेड गर्मेंट्स के क्षेत्र में कार्यरत सप्लाई चैन की इकाईयां बांग्लादेश के स्थान पर अब भारत से निर्यात को प्रोत्साहित कर रही हैं। जिससे भारत में रेडीमेड गर्मेंट्स एवं फूटवीयर उद्योग में कार्यरत इकाईयों को इन उत्पादों को अन्य देशों को निर्यात करने के ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं।

उक्त कारकों के चलते भारत में परचेसिंग मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स नवम्बर 2024 माह के 58.6 से बढ़कर वर्तमान में 60.7 हो गया है। इस इंडेक्स के ऊपर जाने का आश्य यह है कि विनिर्माण के क्षेत्र में गतिविधियों में गति आ रही है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी 6.21 प्रतिशत से घटकर 5.48 प्रतिशत पर नीचे आ गया है, अर्थात, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति की दर भी नियंत्रण में आ रही है। जिससे आगे आने वाले समय में नागरिकों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि होगी। हाल ही के वर्षों में विनिर्माण उद्योग, सेवा क्षेत्र एवं गिग अर्थव्यवस्था में रोजगार के करोड़ों नए अवसर निर्मित हुए हैं और वर्ष 2005 के बाद से इस वर्ष विभिन्न कम्पनियों द्वारा सबसे अधिक नई भर्तियां, रिकार्ड स्तर पर, की गई हैं। इस सबके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा फरवरी 2025 माह में मोनेटरी पॉलिसी में रेपो दर में कमी किए जाने की प्रबल सम्भावना बनती दिखाई दे रही है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति की दर अब नियंत्रण में आ रही है। इस वर्ष भारत में मानसून का मौसम भी बहुत अच्छा रहा है एवं विभिन्न फसलों की बुआई रिकार्ड स्तर पर हुई है जिससे इन फसलों की पैदावार भी रिकार्ड स्तर पर होने की सम्भावना है। किसानों के हाथों में अधिक पैसा आएगा एवं उनके द्वारा विभिन्न उत्पादों की खरीद पर भी अधिक राशि का खर्च किया जाएगा। कुल मिलाकर, इन समस्त कारकों का सकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर होने जा रहा है और वित्तीय वर्ष 2024-25 की तीसरी एवं चोथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के तेज रहने की प्रबल सम्भावना व्यक्त की जा रही है।

– प्रहलाद सबनानी

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