भीष्म पितामह और क्रिसमस डे की वास्तविकता

bhishm pitamah

क्या आप भी बोलते हैं हैप्पी क्रिसमस डे?
क्या आप भी देते हैं बड़े दिन की बधाइयां?
यदि हां तो जानिए इसकी वास्तविकता

बड़ा दिन या बढ़ा दिन!
क्या है इसका इतिहास?
क्या यह जीसस से जुड़ा हुआ है?
क्या यह santa-claus से जुड़ा हुआ है।
क्या यह भीष्म पितामह से संबंध रखता है?

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। तथा जब धर्म संबंधी शास्त्रीय बातें और दान की विधि पितामह के श्री मुख से युधिष्ठिर आदि ने सुन ली और सब शंकाओं का समाधान प्राप्त कर लिया ।धर्म अर्थ के विषय में उठने वाले संपूर्ण संशय को मिटा लिया। और सब चुप हो गए उस समय सारा राज मंडल देर तक स्तब्ध होकर बैठा रहा तो महर्षि व्यास जी ने भीष्म पितामह से पूछा कि अब राजा युधिष्ठिर शांत हो चुके हैं। इनके शोक और संदेह निवृत हो चुके हैं। यह अपने भाइयों, अनुगामी ,राजा और भगवान श्री कृष्ण के साथ आपके समीप बैठे हुए हैं। अब आप इन्हें हस्तिनापुर जाने की आज्ञा दीजिए।
ऐसा सुनकर महाराज युधिष्ठिर को हस्तिनापुर जाने की आज्ञा अपनी मधुर वाणी में भीष्म पितामह ने दी।
बेटा! जब सूर्यनारायण दक्षिणायन से निवृत्त होकर उत्तरायण पर आ जाएं उस समय फिर हमारे पास आना।
युधिष्ठिर ने’ बहुत अच्छा’ कहकर पितामह की आज्ञा स्वीकार की और प्रणाम करके परिवार सहित हस्तिनापुर की ओर चले।

तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने 50 दिनों तक हस्तिनापुर में रहने के बाद जब सूर्य देव को दक्षिणायन से निवृत्त होकर उत्तरायण में आए देखा तो उन्हें कुरुश्रेष्ठ पितामह भीष्म जी की मृत्यु का स्मरण हो आया। और वे यज्ञ कराने ब्राह्मणों के साथ हस्तिनापुर से चलने को उद्यत हुए। जाने से पहले उन्होंने भीष्म जी का अंत्येष्टि संस्कार करने के लिए घृत, माला, सुगंधित द्रव्य, रेशमी वस्त्र, चंदन, कालाअगुरु, अच्छे अच्छे फूल तथा नाना प्रकार के रत्न आदि सामग्री भेज दी।

धृतराष्ट्र, गांधारी, माता कुंती, सब भाई, भगवान श्रीकृष्ण, बुद्धिमान विदुर और सात्यकी को साथ लेकर वह हस्तिनापुर नगर से बाहर निकले उनके साथ रथ, हाथी, घोड़े आदि राजोचित उपकरण और वैभव का महान ठाठ बाट था ।महा तेजस्वी युधिष्ठिर भीष्म जी के स्थापित किए हुए विविध अग्नियों को आगे रखकर स्वयं पीछे पीछे चल रहे थे ।यथा समय में कुरुक्षेत्र में शांतनुनंदन पितामह भीष्म जी के पास जा पहुंचे ।उस समय वहां पराशरनंदन व्यास, देव ऋषि नारद और देवल ऋषि उनके पास बैठे थे। तथा महाभारत युद्ध में मरने से बचे हुए और अन्य अन्य देशों से आए हुए बहुत से राजा उन महात्मा की सब ओर से रक्षा कर रहे थे। धर्मराज युधिष्ठिर दूर से ही वीरसैया पर सोए हुए दादा भीष्म जी का दर्शन करके भाइयों सहित रथ से उतर और निकट जाकर उन्होंने भीष्म पितामह तथा व्यास आदि ऋषियों को प्रणाम किया ।इसके बाद उन ऋषियों ने भी उनका अभिनंदन किया। फिर ऋषियों से घिरे हुए पितामह के पास जाकर बोले दादा जी मैं युधिष्ठिर आपकी सेवा में उपस्थित हूं। आपके चरणों में प्रणाम करता हूं। यदि आपको मेरी बात सुनाई देती हो तो आज्ञा दीजिए मैं आपकी क्या सेवा करूं?

आपके बताए हुए समय पर अग्नियों को लेकर में उपस्थित हुआ हूं। आपके महातेजस्वी पुत्र राजा धृतराष्ट्र भी अपने मंत्रियों के साथ यहां पधारे हुए हैं। भगवान श्री कृष्ण, मरने से बचे हुए समस्त राजा और कुरुजांगल देश के लोग भी आए हुए हैं। आप आंखें खोलकर इन सब की ओर देखिए। आपके कथन अनुसार इस समय के लिए जो कुछ करना आवश्यक था वह सब कर लिया गया है। सभी उपयोगी वस्तुओं का प्रबंध हो चुका है।

परम बुद्धिमान युधिष्ठिर के इस प्रकार कहने पर गंगा नंदन भीष्म जी ने आंखें खोल कर अपने चारों ओर खड़े हुए समस्त भरत वंशी राजाओं की ओर देखा ।फिर युधिष्ठिर का हाथ पकड़कर मेघ के समान गंभीर वाणी में यह समयोचित वचन कहा।

बेटा! युधिष्ठिर तुम अपने मंत्रियों के साथ यहां आ गए यह बड़ी अच्छी बात हुई।

“भगवान सूर्य अब दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर आ गए ”

इन तीखे बाणों की शैया पर शयन करते हुए आज मुझे 58 दिन हो गए ।किंतु यह दिन मेरे लिए 100 वर्ष के समान बीते हैं। इस समय चंद्रमास के अनुसार माघ का महीना प्राप्त हुआ है। इसका यह शुक्ल पक्ष चल रहा है। जिसका एक भाग बीत चुका है और 3 भाग बाकी है।
बहुत सारा संबोधन करने के पश्चात अंत में भीष्म पितामह ने श्री कृष्ण जी से कहा कि आप मेरा उद्धार करें और मुझे जाने की आज्ञा दीजिए कृष्ण जी महाराज।

श्री कृष्ण जी ने कहा भीष्म जी मैं आपको सहर्ष आज्ञा देता हूं। आप वसुलोक को जाइए। इस लोक में आपके द्वारा अनु मात्र भी पाप नहीं हुआ है ।राजऋषि आप दूसरे मार्कंडेय के समान पित्र भक्त हैं। इसलिए मृत्यु विनीत दासी की भांति आपके वश में हैं। भगवान के ऐसा कहने पर गंगानंदन भीष्म ने पांडवों तथा धृतराष्ट्र आदि सभी सुहृदों से कहा अब मैं प्राणों का त्याग करना चाहता हूं। तुम सब लोग मुझे इसलिए आज्ञा दो , ऐसा आशीर्वाद देते हुए चुप हो गए ।

तदनंतर वे मन सहित प्राणवायु को क्रमशः भिन्न भिन्न धारणाओं में स्थापित करने लगे। इस तरह योगिक क्रिया के द्वारा प्राण ऊपर चढ़ने लगे। अंततः मृत्यु को प्राप्त हुए।
महाभारत के अनुशासन पर्व से यह सब उल्लेख करने का हमारा दृष्टिकोण मात्र अपने सुविज्ञ पाठकों के समक्ष यह तथ्य स्थापित करना है कि माघ मास के शुक्ल पक्ष में जब सूर्य उत्तरायण हो गए थे तब भीष्म पितामह ने अपने योगिक क्रिया से प्राणों को त्यागा था।

अब इस समय की गणना करते हैं।

महाभारत का युद्ध 18 दिन चला था ।भीष्म पितामह ने 10 दिन तक युद्ध किया था और दसवें दिन बाणों की शैया पर लेट गए थे। उसके 8 दिन बाद तक युद्ध और चला। जब युधिष्ठिर आदि से वार्ता करने के पश्चात 50 दिन का समय युधिष्ठिर को लौट कर आने के लिए दिया कि 50 दिन बाद में आना । युधिष्ठिर जी जब निश्चित समय पर पहुंचते हैं तो उस समय भीष्म पितामह को सरसैया पर पड़े हुए 58 दिन हो चुके थे।
जो करीब करीब 2 माह का समय होता है। माघ से पहला महीना पौष होता है और पौस से पूर्व का महीना आश्विन ( अगहन)होता है। और अश्विन अथवा अगहन से पूर्व का महीना कार्तिक होता है। जिसका अर्थ होता है कि महाभारत का युद्ध कार्तिक माह के द्वितीय पक्ष में प्रारंभ हुआ था।

जब युधिष्ठिर जी भीष्म पितामह के पास पहुंचे तो वह माघ मास के शुक्ल पक्ष था जिसका एक भाग बीत चुका था अर्थात 3 भाग शेष थे।
अर्थात माघ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भीष्म पितामह ने प्राण त्यागे थे। जब सूर्य दक्षिण गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश कर गए थे।
अभी इसको दूसरे दृष्टिकोण से देखते हैं। और वह दृष्टिकोण है हमारा कि भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने के बाद मरे थे और उनकी अंत्येष्टि उत्तरायण होने के बाद हुई थी।

वर्तमान समय में जो अंग्रेजी के महीने प्रचलित हैं उनमें 21 दिसंबर को सबसे छोटा दिन होता है और 22 दिसंबर की स्थिति भी समान रहती है। 23 को सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ना शुरू होता है तथा 24 और 25 को सूर्य उत्तरायण की ओर अग्रसर हो जाता है। इस प्रकार वह करीब 25 दिसंबर का समय था जिस समय भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागा था।

भीष्म पितामह से जुड़ी हुई इस कथानक को जीसस या ईसा मसीह से जोड़ने का ईसाईयों ने प्रयास किया। भीष्म पितामह एक महापुरुष थे। भीष्म पितामह को उनके सिर पर सफेद बालों को एक नया आवरण पहना कर सैंटा क्लॉस बनाए जाने की प्रथा चली।
सेन्टा क्लाज एक काल्पनिक चरित्र है। यह शब्द सेंटा नहीं बल्कि संत है। जिसका उच्चारण अंग्रेजी में सेंट करते हैं। उसी का अपभ्रंश होकर सेंटा बना। भीष्म पितामह जैसा महान संत और कौन हो सकता है? संत की परिभाषा के अनुसार संत उसको कहते हैं जिसमें संतोष हो। भीष्म पितामह जैसा संतोषी कौन हो सकता है? भीष्म पितामह जैसा प्रतिज्ञा करने वाला और कौन हो सकता है। पूरे विश्व धरातल पर भीष्म पिता जैसा संतोषी एवं संकल्प करने वाला व्यक्तित्व खोजने से भी नहीं मिलता है।
जिन्होंने इतनी बड़ी तपस्या की तथा अपने पिता की प्रसन्नता के लिए खुशी के लिए तथा विमाता की शंका को दूर करने के लिए प्रण किया कि मैं शादी ही नहीं कराऊंगा, एवं राजगद्दी पर नहीं बैठूंगा।

इसलिए अपने प्राचीन और गौरवपूर्ण इतिहास के महापुरुषों को पहचानो ।अंग्रेजीयत और अंग्रेजों के एवं ईसाईयों के चक्कर में मत आओ। आपके महापुरुषों के चरित्र महान एवं धवल हैं। उनकी स्मृति करो। उनके चरित्र की पूजा करो। नकली सेंटा क्लॉज से अपने बच्चों को बचाओ। बच्चों को असली संत की पहचान कराते हुए उसकी पूजा करना शुरू करो । वर्तमान युग में जब हम अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में भेजकर 25 दिसंबर से आगे- पीछे 10 दिन तक सैंटा क्लॉस के लाल रंग के कपड़े पहना कर स्कूल में भेजना अपना गौरव मानते हैं तो मानो वहीं हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का विनाश करते हुए होते हैं। अपने बच्चों को, अपनी आगामी पीढ़ी को यह बताइए कि यह बढ़ा दिन अर्थात जो 21 दिसंबर में सबसे छोटा था जो 22 दिसंबर में था वह 23 को बढ़ा 24 को और बढ़ा और फिर 25 दिसंबर को बढ़ा तो यह बढा दिन हुआ ।जिस दिन महातपस्वी संत पितामह भीष्म ने अपने प्राण त्यागे थे। उस बड़े तपस्वी के महानिर्वाण दिवस को बड़ा दिन भी कह सकते हैं। वर्तमान केंद्र और राज्य की सरकार से हमारा अभियाचन है कि भीष्म पितामह को एक राष्ट्र संत के रूप में हमको प्रस्तुत करना चाहिए और अपनी पाठ्य पुस्तकों में सांता क्लाज के स्थान पर भीष्म पितामह को संत के रूप में प्रस्तुत करके अपने बच्चों को अपने इतिहास की जानकारी देनी चाहिए। यह कैसी विडंबना है कि हमारे बच्चे यीशु को जानते हैं, सांता क्लाज को जानते हैं। लेकिन भीष्म पितामह राष्ट्रपिता और राष्ट्र संत को नहीं जानते। जिनके चरित्र इतने उज्जवल और उच्च कोटि के रहे हैं कि उनके सामने काल्पनिक सांता क्लाज और जीसस कहीं ठहर ही नहीं सकते । जिनको हम हिंदू जाति कहते हैं इसको पाटन की तरफ धकेलना में उन कथित हिंदुओं का ही महत्वपूर्ण स्थान है ।

हम हिंदू दूसरों की संस्कृति सभ्यता और महापुरुषों के विषय में बहुत जानते हैं लेकिन अपने महापुरुषों के विषय में बच्चों को बताते नहीं है और ना हम स्वयं जानते । हम जीसस और संत क्लाज की बात अगर करते हैं तो हम आधुनिक अधुनातन माने जाते हैं। हम विकास वादी माने जाते हैं। लेकिन यदि हम भीष्म पितामह की बात करें तो दकिया नूसी गिने जाते हैं। अब इन हिंदुओं को पतन के रास्ते से कौन रोक सकता है ।जब यह खुद ही पतन के रास्ते अपने आप तैयार कर रहे हैं,तो दुनिया की कोई ताकत ऐसी नहीं जो इनको पतन के रास्ते से जाने से रोक सके , अपनी सभ्यता संस्कृति को बचा सके। हम अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढाना पसंद करते हैं। सेंट जेवियर के नाम पर बने स्कूलों में भेजना पसंद करते हैं । जिस सेंट जेवियर ने हिंदुओं पर अत्याचार किए थे ।लाखों हिंदुओं को इसाई बनाया जो नहीं बने उनके कत्लेआम कराया। लेकिन कथित मूर्ख हिंदुओं के लिए संत जेवियर स्कूल में शिक्षा दिलाना गौरव की बात है ।
मैं अपनी बात को कहने में कितना सफल हो पाया यह मैं आपके ऊपर छोड़ता हूं।

– देवेंद्र सिंह आर्य

Comment:

betnano giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betasus giriş
norabahis giriş
betasus giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş