सृजनाभिनंदनम कार्यक्रम में किया गया कई पुस्तकों का विमोचन : राष्ट्र निर्माण में साहित्य और साहित्यकार का होता है विशेष योगदान : डॉ श्याम सिंह ‘ शशि ‘

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नई दिल्ली । यहां स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में सृजनाभिनंदनम संस्था की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक रहे वरिष्ठ साहित्यकार ,कवि, लेखक और अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित श्री राकेश छोकर ने हमें बताया कि इस अवसर पर प्रथम सत्र की अध्यक्षता सुविख्यात विद्वान लेखक और स्वनामधन्य पदम श्री डॉ श्याम सिंह शशि द्वारा की गई। डॉ शशि जी द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि राष्ट्र निर्माण में साहित्य और साहित्यकार का विशेष योगदान होता है। जैसा साहित्य होता है वैसी ही पीढ़ी का हम निर्माण कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य को उत्कृष्ट शैली में प्रस्तुत करना प्रत्येक साहित्यकार का दायित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण कहा जाता है। इसलिए किसी भी लेखक कवि या साहित्यकार को साहित्य लेखन के समय साहित्य की पवित्रता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी इस समय विश्व की सबसे प्रमुख तीन भाषाओं में सम्मिलित है। वैश्विक स्तर पर हिंदी का तीसरा स्थान होना हम सबके लिए गौरव की बात है।


दूसरे सत्र की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीयप्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि आज सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त ,जयशंकर प्रसाद जैसे कवियों की श्रृंखला को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है । जिनकी लेखन शैली में भारत के गौरवपूर्ण अतीत की झलक दिखाई देती थी। जब देश के सामने विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी हों, तब अपने गौरवपूर्ण अतीत को स्थापित करना हम सब का नैतिक दायित्व है। इसलिए साहित्यकार कवि या लेखक को अपने अतीत की शानदार प्रस्तुति करने के अपने पवित्र धर्म से विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बात हिंदी की हो रही हो तो संस्कृतनिष्ठ शुद्ध हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हिंदी की बात करते हुए हम उर्दू की शैली को अपना लें।
इस अवसर पर खादी ग्रामोद्योग के पूर्व चेयरमैन डॉ यशवीर सिंह ने कार्यक्रम के आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत और भारतीयता की सेवा के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। इस अवसर पर 170 पुस्तकों के लेखक डॉ विनय कुमार सिंघल की आधा दर्जन से अधिक पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर उनके 75 वें जन्मदिवस को भी अमृत काल के रूप में मनाया गया।
उनके साहित्य निर्माण में प्रोफेसर वीना जी और श्रीमती अंजु कालरा दासन का भी विशेष योगदान रहा है। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध लेखक श्री यशवंत भंडारी यश की पुस्तक ” यथार्थ का धरातल ” और कार्यक्रम के संयोजक श्री राकेश छोकर की पुस्तक ” सत्य से परे ” और श्रीमती रीता नामदेव की भी एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
दिल्ली के पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रहे श्री ओम सपरा जी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सांस्कृतिक संपदा से संपन्न देश है। इसकी सांस्कृतिक समृद्धि संपूर्ण विश्व को परिवार के रूप में देखने की रही है । इस प्रकार मानवता भारतीय संस्कृति और साहित्य का मूल विवेच्य विषय है। आज भी हमें इसी दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में श्री प्रोफेसर राकेश राणा, चंद्रमणि सिंह, यशवंत भंडारी यश, संजीव कुमारी गुर्जर आदि अनेक विद्वानों ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर अनेक साहित्यकारों ,विचारको और लेखकों को संस्था की ओर से सम्मानित भी किया गया। जिनमे वरिष्ठ अधिवक्ता समाज सेवी , दर्शनों के विद्वान और उगता भारत ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री देवेंद्र सिंह आर्य का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जिन्हें संस्था के एक प्रमुख संरक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। डॉ शशि जी और डॉक्टर यशवीर सिंह द्वारा श्रीमती संजीव गुर्जर , वरिष्ठ समाजसेवी श्री धर्मवीर सिंह नागर, प्रोफेसर राकेश राणा , अजय कुमार आर्य और डॉक्टर राकेश कुमार आर्य को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का सफल संचालन श्रीमती विभा राज वैभवी द्वारा किया गया। जबकि द्वितीय सत्र का संचालन कार्यक्रम संयोजक श्री राकेश छोकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर अनेक कवियों ने अपना कविता पाठ भी किया। संस्था के बारे में जानकारी देते हुए श्री राकेश छोकर ने हमें बताया कि यह संस्था सृजनशील विद्वानों कवियों और लेखकों की प्रतिभा को मुखरित करने के लिए स्थापित की गई है। संस्था का प्रमुख उद्देश्य साहित्यकारों का सम्मान करना तो है ही साथ ही उन्हें राष्ट्र चेतना को मुखरित कर युवा निर्माण के लिए प्रशिक्षित करना भी है। क्योंकि आज राष्ट्र के समक्ष अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं । जिनमें समाज निर्माण, युवा निर्माण , चरित्र निर्माण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। जिन्हें एक अच्छा साहित्यकार ही पूर्ण कर सकता है।

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