भागीरथ बने मुख्यमंत्री मोहन यादव क्षिप्रा से शुरू हुआ हर नदी, तालाब, कुएं को सहेजने का प्रयास

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(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)
मध्य प्रदेश के कई जिले इन दिनों सूखे से ग्रस्त हैं, कई गांवों में दो-दो किलोमीटर पैदल चल कर पानी लाने को ग्रामीण मजबूर हैं, तो कई शहरों में दो दिन में एक बार पानी आ रहा है। नदी, तालाब, बावड़ी और कुएं अधिकांश सूखे हैं। हैंडपम्प भी अधिकतर दम तोड़ चुके हैं। यह हाल इन दिनों मध्य प्रदेश में अधिकांश जिलों में देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उस उज्जैन के हैं जहां क्षिप्रा नदी के तट पर सदियों से सिंहस्थ का आयोजन होता आ रहा है। यहां बारह वर्ष में एक बार अपार जनसमूह क्षिप्रा नदी में स्नान करने के लिए उमड़ता है।साधुसंतों से लेकर राजनेता और फिल्म सितारों के साथ असंख्य श्रद्धालु भी सिंहस्थ में क्षिप्रा स्नान के लिए आते रहे हैं।विगत कई वर्षो से जब क्षिप्रा नदी सूखने लगी तो यहां नर्मदा नदी का जल लाकर सिंहस्थ के समय डुबकी के लिए जल उपलब्ध कराया जाने लगा। क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने और भरी गर्मी में भी नदी कैसे कल-कल बहती रहे, इस पर मोहन यादव मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार काम कर रहे हैं। इसे लेकर उनके सख्त तेवर भी दिखे, जिसके चलते जो कारखाने नदी में प्रदूषित पानी डाल रहे थे, उन्हें सील करवा दिया और स्वयं अपनी निगरानी में क्षिप्रा को इतना स्वच्छ करवा दिया कि वे खुद भी वहां डुबकी लगाने पहुंच गए। अब पुण्यसलिला क्षिप्रा से प्रेरणा लेकर ही उन्होंने प्रदेश में हर नदी, तालाब, बावड़ी और कुएं को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है । इस योजना को उन्होंने जमीन पर उतारने का ऐलान कर दिया है। यदि यह अभियान सफल रहा तो प्रदेश में पानी को सहेजने और नदियों के साथ ही तालाब, कुएं और बावड़ियों को संवारने का मुख्यमंत्री का यह भागीरथी प्रयास साबित हो सकता है।
लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की व्यस्तता बहुत थी, पहले मध्य प्रदेश में चार चरणों में 29 सीटों पर मतदान हुआ, इसके बाद उनके दौरे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली आदि राज्यों में लोकसभा चुनाव के प्रचार में हुए। इस बीच वे अपने प्रदेश की समस्याओं को लेकर लगातार जानकारी ले रहे थे, जब उन्हें यह पता चला कि भीषण गर्मी के बीच प्रदेश के कई गांव, शहरों में पानी का संकट खड़ा हो गया है, तो उन्होंने अपने चुनिंदा अफसरों को जल संकट से उबारने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। अगर पानी को बचाने और नदी, तालाब को संरक्षित करने की यह योजना सफल रही और सरकारी अफसरों के साथ साथ जनप्रतिनिधियों ने ईमानदारी से अपने कर्तव्य को निभाया तो मध्य प्रदेश लंबे समय तक के लिए जल संकट से मुक्त रह सकता है। यह पूरा अभियान मुख्यमंत्री की इच्छा शक्ति के साथ ही मंत्री, विधायक, सांसद और संभागायुक्त, तथा कलेक्टर की संपूर्ण सहभागिता से ही सफल हो सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाने जा रहे हैं। इस अभियान के तहत नदी, कुंआ, तालाब, बावड़ी आदि को साफ स्वच्छ रखने के लिए जनभागीदारी से गतिविधियां होगी। अभियान जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में चलेगा और कलेक्टर समन्वय करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इस अभियान की शुरूआत पांच जून पर्यावरण दिवस से होगी और गंगा दशमी यानि 16 जून तक यह अभियान चलेगा।
यदि यह अभियान सार्थक रहा तो मध्य प्रदेश की 212 नदियों को संरक्षण मिलेगा और उनकी साफ सफाई होगी। मध्य प्रदेश में नर्मदा, ताप्ती, क्षिप्रा, बेतवा, केन, चंबल, पार्वती, सोन, कालीसिंध, तवा जैसी बड़ी नदियां हैं। वहीं इन नदियों में मिलने वाली सैकड़ों छोटी नदियां भी हैं। इन सभी का संरक्षण होगा तो प्रदेश की इन नदियां में पानी कल-कल बहता हुआ मिलेगा। इनमें से कई नदियों में गाद भर चुकी है तो कई पानी के पर्याप्त स्त्रोत नहीं होने से बरसात के बाद सूख जाती हैं। वहीं प्रदेश में कई ऐतिहासिक बावड़िया हैं, जिनमें पर्याप्त पानी है, लेकिन साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में इनका पानी उपयोग के लायक नहीं बचा है। प्रदेश में कई तालाब है, भोपाल तो झीलों की नगरी के नाम से दुनिया भर में विख्यात है। यहां पर भी कुछ तालाबों को संरक्षण और सफाई की जरुरत है। कुएं भी प्रदेश में बहुत हैं जिन्हें साफ सफाई के साथ जीर्णोद्धार की जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने”जल ही जीवन है” यह केवल घोष वाक्य नहीं है, हम जलस्रोतों से ही जीवन पाते हैं। बिना जल के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, इन वाक्यों से अपने इस नमामि गंगे अभियान का श्री गणेश किया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सामाजिक, शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, जनअभियान परिषद से जुड़े संगठनों से इस अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया है और जनसहभगिता से जल संरचनाओं का चयन एवं संरक्षण करने का आह्वान किया है, ताकि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सघन जनजागृति पैदा हो सके। इससे भविष्य के लिए जल संरक्षण के संबंध में कार्य योजना बनाने में मदद मिलेगी।
जलस्रोतों पर नजर डालें तो प्रदेश में 212 से अधिक नदियां हैं। हमारी पेयजल की आपूर्ति करने में नदियां, बावड़ियां, कुएं व तालाब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धरती पर बढ़ते तापमान के बीच जल की महत्ता सबकी समझ में आ गई है। ऐसे में जल संरचनाओं को अतिक्रमण से मुक्त कराने की भी आवश्यकता है। जिला प्रशासन अगर इन्हें अतिक्रमण मुक्त कराने में सफल रहा तो बहुत बड़ा काम संपन्न हो जाएगा। मोहन यादव की यह मंशा भी काबिले तारीफ है कि अभियान के दौरान नदियों और तालाबों से गाद या खाद के रूप में निकलने वाली मिट्टी, किसानों को खेतों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। प्रारंभिक रूप से यह अभियान 5 से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके बाद अभियान की अवधि बढ़ाई जा सकती है।अगर मुख्यमंत्री का यह अभियान सफल हुआ तो निस्संदेह मोहन यादव मध्यप्रदेश में भागीरथ का नया अवतार ही साबित होंगे (विनायक फीचर्स)

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