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धर्मस्थलों से अतिक्रमण हटाने में हिंदू मुस्लिम आए साथ-साथ : सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल

प्रमोद भार्गव

संदर्भ-ः उज्जैन नगर से मंदिर एवं मस्जिदों के अतिक्रमण हटाया जाना

प्रमोद भार्गव

अकसर हमारे राजनेता या प्रदेश प्रमुख हिंदु एवं मुस्लिम संप्रदायों से जुड़े मंदिर एवं मस्जिदों के अतिक्रमण हटाने से भयभीत दिखाई देते हैं। इनके पीछे उनकी स्वयं की धार्मिक भावना एवं आस्था तो होती ही है, कहीं सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ न जाए, इसका डर भी मन में रहता है। अतएव ज्यादातर मुख्यमंत्री ऐसे अतिक्रमणों को हटाने से बचते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने अनेक धार्मिक स्थलों एवं भू-माफियाओं के अतिक्रमण हटाकर एक मिसाल पेश की है। अब ऐसा ही उदाहरण मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में पेश किया है। उन्होंने उज्जैन के केडी मार्ग चौड़ी करण में आ रही बाधाओं को दूर करने में दृढ निर्णय के साथ सभी धर्मावलंबियों और शासन के बीच सामंजस बिठाकर इन अतिक्रमणों को हटाने का अनूठा उदाहरण पेश किया है। कुल 18 धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। इनमें 15 मंदिर, 2 मस्जिद और एक मजार शामिल हैं। इन्हें पीछे करने या अन्य स्थल पर स्थापित रजामंदी से किया जा रहा है। जो भी धार्मिक स्थल विस्थापित किए जा रहे हैं, उन्हें प्रशासन अपने-अपने धार्मिक विधि विधान से प्रशासन के जरिए स्थापित कराएगा। जिन भवनों के अतिक्रमण हैं, उन्हें भवन मालिक स्वयं हटा रहे हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव पूरी तरह धार्मिक हैं, लेकिन उनमें धर्मजन्य मिथकीय जड़ता नहीं है। जब वे मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने इस पद पर असीन होने के बाद पहली बार उज्जैन में रात बिताने का निश्चय किया था। इस खबर के फैलने के बाद कथित धर्म के प्रचारकों ने प्रष्न उठाया कि राजा महाकाल की नगरी की परिधि में कोई दूसरा राजा या मुखिया रात बिताएगा तो उसे महाकाल के आक्रोश से पद गंवाना पड़ सकता है। इस पर मुख्यमंत्री यादव ने सार्थक टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘मैं तो उज्जैन का ही निवासी हूं और महाकाल भगवान की शरण में ही रहा हूं। आज मेरी जो भी राजनीतिक व अन्य उपलब्धियां हैं, वह उन्हीं की कृपा और आशीर्वाद से हैं। भगवान महाकाल का दायरा कोई उज्जैन नगर निगम तक सीमित नहीं है। वे विश्व के कण-कण में व्याप्त हैं। अतएव उन्हें मुझे दंडित करना होगा तो उज्जैन नगर की सीमा से बाहर भी दंडित कर सकते हैं। इसलिए मैं उन्हीं की शरण में उज्जैन में रात बिताऊंगा और मुझ पर उनकी कृपर भी रहेगी।‘ हम सब जानते हैं कि मोहन यादव ने उज्जैन में रात बिताई और महाकाल की उन पर कृपा बरसती रही।

इसी विश्वास का परिणाम है कि वे आज उन तीर्थयात्रियों के लिए उज्जैन में सुलभ मार्ग बना रहे हैं, जिनकी संख्या महाकाल लोक के निर्माण के बाद निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में एक उदार और जबावदेही शासक का दायित्व बनता है कि वह भोले शंकर के दर्शन हेतु जितने सरल उपाय हो सकें, उन्हें क्रियान्वित करें, यह काम इसी दृष्टिकोण के मद्देनजर किया जा रहा है। साफ है, जब केडी मार्ग का चौड़ी करण पूर्ण हो जाएगा, तब दर्शनार्थी तो उसका लाभ उठाएंगे ही, प्रशासन को भी व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। अन्यथा हम देख रहे हैं कि सकरे मार्गों पर ज्यादा भीड़ बढ़ जाने के कारण कई लोग दम घुट जाने से बेमौत मारे जाते हैं। धार्मिक यात्राओं में श्रद्धालुओं का इस तरह से मारे जाने की घटनाएं निरंतर देखने में आ रही हैं। धार्मिक नगरों में मार्गों का चौड़ा होना इसलिए भी जरूरी है, कि कहीं यदि किसी होटल या अन्य भवन में आगजनी की घटना घट जाती है तो चैड़े मार्गों से सुरक्षादलों और फायरबिग्रेड को मौके पर पहुंचने में बाधा सामने नहीं आती। यदि समय पर ये दोनों सुविधाएं घटनास्थल पर उपलब्ध हो जाती हैं तो भवन में फंसे लोगों के प्राण तो बचा ही लिए जाते हैं, आग पर नियंत्रण भी जल्द हो जाता हैै। इसलिए आग आसपास के इलाकों में नहीं फैल पाती। अतएव मार्गों के चौड़ी करण में मंदिर या मस्जिद जैसी बाधाएं आती हैं तो उन्हें उज्जैन की तरह ही समन्वय व सौहार्द से हटा लेना चाहिए।

            अतएव इस परिप्रेक्ष्य में हमें मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसी धार्मिक-सांस्कुतिक चेतना और रुढ़िवादी जड़ताओं को तोड़ने वाले दृढ़ निष्चयी प्रतिनिधियों की मध्यप्रदेश  में ही नहीं पूरे देश  में जरूरत है। यदि ऐसे नेता जागरूकता और समन्वय की स्थापना के लिए सामने आएंगे तो उनसे पवित्र एवं सात्विक सांस्कृतिक परंपराओं के बीच पनपे अंधविश्वासों को दूर करने की भी अपेक्षा की जा सकेगी। जिससे मानव समुदायों में तार्किकता का विस्तार हो और इसी के फलस्वरुप वैज्ञानिक चेतना संपन्न समाज का निर्माण हो। ऐसी चेतना का निर्माण होगा तो धर्म या धर्मस्थल जनहितैषी कार्यों में बाधा नहीं बन पाएंगे। 

प्रमोद भार्गव

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