युवाओं की गंभीर होती हालत*

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(आर. सूर्य कुमारी – विनायक फीचर्स)

पुणे में एक सत्रह वर्षीय युवा द्वारा शराब के नशे में गाड़ी चलाकर दो युवा इंजीनियरों को मार देने का प्रकरण इन दिनों काफी चर्चित है। शराब के नशे में मदहोश इस युवा ने दो और की जीवनलीला समाप्त कर दी। आए दिन ऐसे हादसे की खबरें हमें सुनाई और दिखाई देती है।

आज चारों ओर नशे का तांडव मचा हुआ है। युवा शराब पीते हैं। धूम्रपान करते हैं। नशे के चक्कर में वे गांजा, चरस, ब्राउन शुगर, अफीम, स्मैक, सूंघने वाला साल्यूशन, इंजेक्शन, पिल्स… तमाम किस्म के नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। और इनका इस्तेमाल करना मतलब बर्बादी का आ टपकना। थोड़ा सा आनंद पाने के लिए जिस नशीले पदार्थ का इस्तेमाल युवा शुरू करते हैं, वह नशीला पदार्थ मरते दम तक साथ निभाता है।

हमारे देश के लाखों युवा आज नशे की गिरफ्त में हैं। और मानकर चलिए कि लाखों परिवार आज नशे की वजह से बर्बादी की कगार पर हैं। पति हो, बेटा हो, भाई हो, पात्र चाहे कोई भी हो नशे के चक्कर में फंस गया हो तो घर-परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच जाता है। इन युवाओं में नशीले पदार्थ टी.बी., कैंसर सहित तरह-तरह की बीमारियां पैदा करते हैं।

घर वालों के पास इलाज कराने के पैसे नहीं होते। रोज – रोज पौष्टिक आहार देने के पैसे नहीं होते। चिकित्सा करवाने के पैसे नहीं होते। बस भागते – दौड़ते परेशान हो जाते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि ये नशीले पदार्थ देश में आते कहां से हैं। एक तो हमारे देश के पहाड़ी राज्यों में इनकी खेती होती है। बाहरी देशों से बंगाल की खाड़ी या अरब सागर के रास्ते भी चोरी – छुपे नशे का व्यापार होता है। इस तस्करी को रोकने के लिए सरकार को भी बहुत सोचना पड़ता है। एक तो नशे का आवागमन बंद हो जाए तो देश के युवा तड़प – तड़प कर मर जाएंगे और दूसरा देश के अंदर महात्रासदी पैदा हों जाएगी।

एक बहुत आम बात है कि जो नशा करता है उसका दिमाग पाजीटिव या सकारात्मक बातें कम सोचता है और निगेटिव या नकारात्मक बातें ज्यादा सोचता है। वह नशीले पदार्थों की तस्करी से लेकर जानवरों की खाल, हाथी दांत, चंदन की लकड़ी, बाघ का नोख जैसे तमाम किस्म के पदार्थों की तस्करी में लगाया जाता है।

नशे में पड़ चुका व्यक्ति आसानी से इलाज के लायक नहीं होता। वह इतना ज्यादा आदी हो जाता है कि नशा उतारने में व ठीक करने में अच्छे – अच्छे विशेषज्ञों के पसीने छूट जाते हैं। नशा छुड़ाना बहुत ज्यादा महंगा भी पड़ता है। और विशेषज्ञ ठीक कर भी लेते हैं तो पुराने माहौल में वापस आने के बाद उन्हीं दोस्तों सरकार को ये पांच बातें ध्यान में रखनी ही चाहिए-

  1. बाहर से आने वाली तस्करी को रोक दिया जाए, चाहे परिणाम कठोरतापूर्ण ही क्यों न साबित हो।

  2. नए नशेडिय़ों को रोकने के लिए घर – घर जागरूकता अभियान चलाया जाए। पाठ्य-पुस्तकों द्वारा पढ़ाया जाए।

  3. दफ्तरों व कार्यालयों में नशा विरोधी अभियान चलाया जाए।

  4. नशेडिय़ों को पैसा कभी न दिया जाए। खाने की चीज दे दी जाए। इस आशय की सूचनाएं हर जगह चस्पा की जाएं।

  5. युवाओं की उन्नति के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। नशा उन्मूलन के लिए टीमें बनाई जाएं। रंग लाना मेहनत की प्रकृति है तो मेहनत इस क्षेत्र में भी रंग लाएगी। (विनायक फीचर्स)

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