आकाश विजयवर्गीय को लेकर प्रधानमंत्री की नाराजगी

नई दिल्ली । ( ब्यूरो ) भाजपा के एक विधायक ने जिस प्रकार सारी नैतिकताओं को खूंटी पर टांगकर असभ्यता , बर्बरता , क्रूरता, निर्दयता और पाशविकता का नंगा खेल खेला है , उसके विरुद्ध प्रधानमंत्री के तेवर कड़े हो गए हैं । बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के यदि उस पर चिंतन किया जाए तो प्रधानमंत्री का ऐसा क्रोध बहुत ही उचित कहा जाएगा । कारण चाहे जो रहे हो परंतु एक विधायक के ऐसे निंदनीय व्यवहार और कृत्य की किसी भी दृष्टिकोण से प्रशंसा नहीं की जा सकती ।नाराज़ प्रधानमंत्री ने मंगलवार को ही भाजपा संसदीय दल की बैठक के समय स्पष्ट कर दिया था कि आकाश विजयवर्गीय का व्यवहार अस्वीकार्य है, और उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी होगी ।प्रधानमंत्री ने आकाश विजयवर्गीय की टिप्पणी ‘निवेदन, आवेदन, दनादन’ का भी उल्लेख किया, और कहा, “यह किस तरह की भाषा है…?”ध्यान रहे कि भाजपा के इस विधायक ने मध्यप्रदेश में एक अधिकारी को क्रिकेट के बैट से बड़ी निर्ममता से पीटा और उसके पश्चात उस पर किसी भी प्रकार का पश्चाताप से भी इंकार कर दिया । अब इस प्रकरण पर प्रधानमंत्री श्री मोदी पार्टी में एक ऐसा मील का पत्थर स्थापित कर देखना चाहते हैं जिससे पार्टी के किसी अन्य विधायक या सांसद को भविष्य में ऐसा करने का साहस न हो , क्योंकि इससे पार्टी की साख प्रभावित होती है । प्रधानमंत्री श्री मोदी नहीं चाहते कि यह सामंती प्रवृत्ति आज के लोकतंत्र के काल में भी लोगों में आतंक का कारण बने। प्रधानमंत्री श्री मोदी की कार्यशैली सभी को सहजता से काम करने देने की है। परंतु उनकी पार्टी के लोग कई बार उनकी कार्य नीति का अनुकरण न् कर अपनी मनमानी चलाने का परंपरागत व्यवहार पर बैठते हैं , जिस पर प्रधानमंत्री अब पूर्णरूपेण प्रतिबंध लगा देना चाहते हैं । वह कड़े अनुशासन के पक्षधर हैं और इसी पर अब वह अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर चुके हैं।ऐसे में भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश पार्टी नेताओं के लिए इस बात का सबक बन सकते हैं कि अनुशासनहीन होने का परिणाम क्या हो सकता है, क्योंकि सूत्रों के अनुसार, पार्टी उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने पर विचार कर रही है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से कहा था, “अगर हमें एक विधायक खोना पड़ता है, तो यही सही… ऐसा दोबारा होने से रोकने के लिए हमें उदाहरण प्रस्तुत करना होगा…”निगम अधिकारी की क्रिकेट बैट से पिटाई किए जाने का ज़िक्र ‘इंदौर की घटना’ के रूप में करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “वह कोई भी हों, किसी के भी पुत्र हों, इस तरह का घमंड भरा व्यवहार सहन नहीं किया जा सकता, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए…”बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने आकाश विजयवर्गीय की टिप्पणी ‘निवेदन, आवेदन, दनादन’ का भी ज़िक्र किया, और कहा, “यह किस तरह की भाषा है…?प्रधानमंत्री की यह कड़ाई क्या रंग लाती है ? – यह तो अभी देखना होगा , लेकिन यदि प्रधानमंत्री के कड़े तेवर वास्तव में कुछ अच्छा कर पाए तो इसका भारत के लोकतंत्र के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

मुख्य संपादक, उगता भारत

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