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इतिहास के पन्नों से

उगता भारत राष्ट्र मंदिर : भारत के ऐतिहासिक 2 दुर्ग

सोनार का किला, राजस्थान:

राजस्थान का जैसलमेर का किला भी भारत के प्रमुख किलों में से एक है। जैसलमेर का अपना भी एक गौरव पूर्ण इतिहास है।
प्रातः काल में इस किले पर जैसे ही सूर्य की पहली किरण पड़ती है वैसे ही यह सोने की भांति चमकता हुआ दिखाई देता है। इसीलिए इस किले को सोनार का किला कहते हैं। जिस स्थान पर यह किला बनाया गया है वहां पर दूर-दूर तक रेगिस्तान रेगिस्तान दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे सोनार का किला कहने के अतिरिक्त रेगिस्तान का किला भी कहा जाता है।
यह किला संसार भर के बड़े किलों में अपना स्थान रखता है।
इसमें चारों ओर 99 गढ़ बने हुए हैं। इनमें से 92 गढ़ों का निर्माण 1633 से 1647 के बीच हुआ था। इसका पहला प्रवेश द्वार गोपा चौक पर बनाया गया है। जिसे बहुत ही सुंदरता प्रदान की गई है। इसके कई भवन आज भी अपने इतिहास की सुंदर कहानी को प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त हैं। आकर्षण दुर्ग के अंतिम द्वार हावड़पोल के पास स्थित दशहरा चौक है जो इस दुर्ग का खास दर्शनीय स्थल है।

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. कांगड़ा किला, हिमाचल प्रदेश:

हिमाचल के कांगड़ा का राजवंश संसार भर के प्राचीन राजवंशों में से एक है। इस राजवंश की विरासत हम सबकी शानदार विरासत है। कांगड़ा के राजकीय परिवार के द्वारा बनवाया गया यहां का किला संसार के सबसे प्राचीन किलों में से एक है। इसे नगरकोट या कोट कांगड़ा के नाम से भी जाना जाता है। बाणगंगा और मांझी नदियों के ऊपर स्थित कांगड़ा किला, 483 राजाओं की वंशावली के पूर्वज राजा भूमचंद की ‘त्रिगर्त’ भूमि की राजधानी थी।यह किला धन-संपति के भंडार के लिए इतना प्रसिद्ध था कि मोहम्मद गजनी ने भारत में अपने चौथे अभियान के दौरान पंजाब को हराकर सीधे 1009 ईसवी में कांगड़ा पहुंचा था। यहां के तत्कालीन राजा ने बड़ी वीरता के साथ उस विदेशी आक्रमणकारी का सामना किया था।

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गोलकुंडा का किला, हैदराबादः

आंध्रप्रदेश की राजधानी हैदराबाद कभी भाग्यनगर के नाम से जानी जाती थी। इस शहर का भारत के इतिहास में विशिष्ट स्थान है। कभी के भाग्य नगर से 11 किलोमीटर की दूरी पर बने इस किले का निर्माण काकतिया शासकों ने अपने शासनकाल में करवाया था। इसे अपनी भव्यता और उत्कृष्ट निर्माण शैली के कारण प्रसिद्धि प्राप्त हुई। इसे देखने के लिए आज भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस दुर्ग का निर्माण वारंगल के राजा ने 14वीं शताब्दी में कराया था। बाद में यह बहमनी राजाओं के हाथ में चला गया और मुहम्मदनगर कहलाने लगा।1512 ई. में यह कुतुबशाही राजाओं के अधिकार में आया। फिर 1687 ई. में इसे औरंगजेब ने जीत लिया।ग्रेनाइट की एक पहाड़ी पर बने इस किले में कुल आठ दरवाजे हैं।यह पत्थर की तीन मील लंबी मजबूत दीवार से घिरा है।मूसी नदी इसके दक्षिण में बहती है।

  1. सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र:

    शिवाजी महाराज ने भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए तत्कालीन समय में विदेशी शासकों को एक कड़ी चुनौती दी थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने देश और अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए ही यह किला मुंबई से 400 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र के बीच में बनाया था।किले का निर्माण 1664 से 1667 के बीच किया गया था। इस प्रकार इस दुर्ग से छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और उनकी देशभक्ति की पवित्र भावना जुड़ी हुई है। सिंधुदुर्ग आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है। यह मुंबई के दक्षिण में महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित है।

डॉ राकेश कुमार आर्य

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