Categories
आज का चिंतन

ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए थे महान ऋषि मारीच

आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी

    सृष्टि के शुरुवाती दिनों में मरीचि नाम के एक महान ऋषि हुए थे । वे ब्रह्मा के मानस पुत्र तथा सप्तर्षियों में से एक थे। ये ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए थे। मरीचि का शाब्दिक अर्थ चंद्रमा या सूर्य से आने वाली प्रकाश की किरण है । और मरीचि का अर्थ मरुतों ('चमकदार') का प्रमुख होना भी होता है। गीता के अनुसार मरीचि वायु देव है और कश्यप ऋषि के पिता हैं। इनका विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री सम्भूति के साथ हुआ था। इन्हें मरीचि या मारिषि के नाम से भी जाना जाता है। प्रकाश की किरण के संदर्भ में, ऋषि मरीचि को सप्तर्षियों में से एक माना जाता है, जिन्हें प्रथम मन्वंतर में सात महान ऋषियों के रूप में भी जाना जाता है।

ब्रह्मा के प्रधान प्रजापति :-

महर्षि मरीचि ब्रह्मा के अन्यतम एक प्रधान प्रजापति हैं। इन्हें द्वितीय ब्रह्मा ही कहा गया है। ऋषि मरीचि पहले मन्वंतर के पहले सप्तऋषियों की सूची के पहले ऋषि है। यह दक्ष के दामाद और शंकर के साढू भी थे। इनकी पत्नि दक्ष- कन्या संभूति थी। इनकी दो और पत्नियां थी- कला और उर्णा। संभवत: उर्णा को ही धर्मव्रता भी कहा जाता है जो एक ब्राह्मण कन्या थी। दक्ष के यज्ञ में मरीचि ने भी शंकर जी का अपमान किया था। इस पर शंकर जी ने इन्हें भस्म कर डाला था।

अन्य महत्व पूर्ण कार्य:-

इन्होंने ही भृगु को दण्डनीति की शिक्षा दी है। ये सुमेरु के एक शिखर पर निवास करते हैं और महाभारत में इन्हें चित्रशिखण्डी कहा गया है। ब्रह्मा ने पुष्करक्षेत्र में जो यज्ञ किया था उसमें ये अच्छावाक् पद पर नियुक्त हुए थे। दस हजार श्लोकों से युक्त ब्रह्मपुराण का दान पहले-पहल ब्रह्मा ने इन्हीं को किया था। वेद और पुराणों में इनके चरित्र का चर्चा मिलती है।

बहु आयामी व्यक्तित्व:-

मारीचि का जीवन उनके वंशजों के विवरण से अधिक जाना जाता है, विशेष रूप से ऋषि कश्यप से। मारीचि का विवाह कला से हुआ और उन्होंने कश्यप को जन्म दिया था
कश्यप की माता ‘कला’ कर्दम ऋषि की पुत्री और ऋषि कपिल देव की बहन थी। कश्यप को कभी-कभी प्रजापति के रूप में भी स्वीकार किया जाता है, जिसे अपने पिता से सृजन का अधिकार विरासत में मिला था। माना जाता है कि वह हिंदू भगवान विष्णु की निरंतर ऊर्जा से बने हैं। माना जाता है कि उन्होंने ब्रह्मा की तपस्या पुष्कर में की थी। माना जाता है कि वे नारद मुनि के साथ, महाभारत के दौरान भीष्म को मिलने गए थे, जब वह तीर बिस्तर पर लेटे थे। मारीचि को तपस्या करने के लिए युवा महाराजा ध्रुव के सलाहकार के रूप में भी उद्धृत किया गया है। उनका नाम कई हिंदू धर्मग्रंथों जैसे ब्रह्मांड पुराण और वेदों में भी पाया जाता है।

लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा मंडल ,आगरा में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए समसामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं।)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vdcasino
betgaranti
betpark giriş
betpark güncel giriş
vdcasino
vdcasino
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş