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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्र नीति बनाम राजनीति

31 जनवरी 2024 को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया और अपना बजट भाषण प्रस्तुत किया। 5 फरवरी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में अपना भाषण दिया । उन्होंने अपने भाषण में अपने 10 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इससे पहले देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सरकार की उपलब्धियों पर अपना भाषण दे चुकी थीं। स्पष्ट है कि इस प्रकार के भाषण को देश का विपक्ष कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता था। यही कारण रहा कि विपक्ष ने अपनी परंपरागत नीति , रणनीति और राजनीति का परिचय देते हुए बजट भाषण की कटु आलोचना की। लोकतंत्र की खूबसूरती ही यह होती है कि वह आलोचना का अवसर प्रदान करता है, पर इस खूबसूरती का भारत का विपक्ष पिछले 10 वर्ष से अनुचित लाभ उठा रहा है। देश का विपक्ष आलोचना के अपने अधिकार को नकारात्मकता में ढालकर प्रस्तुत करता है। इसलिए वह सरकार की अच्छाइयों में भी कमी निकालने का प्रयास करता रहता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने भाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियों को इंगित करते हुए कहा कि “10 साल में टूरिज्म सेक्टर में अभूतपूर्व उछाल आया है। देश में कम से कम पूंजी निवेश में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला अवसर बना । 10 साल में देश के एयरपोर्ट दुगुने बने। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा एविएशन केंद्र बना। भारत की जो एयरलाइंस हैं, उन्होंने 1000 नए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया। जब यह एयरक्राफ्ट आएंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पायलट ग्रुप टेक्निकल स्टाफ को नौकरी मिलेगी। इकोनॉमी को फॉर्मूलाइज करना हमारी जिम्मेदारी है। लोगों को नौकरी मिले, सिक्योरिटी मिले, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शासनकाल में प्रत्येक क्षेत्र में पारदर्शिता को प्राथमिकता देने का निश्चय किया। जिसका एक सकारात्मक परिणाम भी हम सबके सामने दिखाई दे रहा है कि शासन की नीतियों में पहले की अपेक्षा बहुत अधिक पारदर्शिता है । अब बिचौलियों के लिए गरीबों को लूटना बड़ा कठिन हो गया है। एक समय वह भी था जब देश के प्रधानमंत्री ने देश की संसद में खड़े होकर कहा था कि हम यदि यहां से ₹1 लोगों के कल्याण के लिए भेजते हैं तो नीचे तक 15 पैसे ही पहुंचते हैं।
कांग्रेसी शासनकाल में 10 करोड फर्जी लोग (स्त्री पुरुष) ऐसे थे जो गलत ढंग से सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे थे। इन सारे फर्जी लोगों को इन सरकारी योजनाओं का लाभ देने से रोक दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के खजाने को सरकार में बैठे लोगों के साथ मिलकर लूटा जा रहा था। ऐसी अनेक महिलाएं थीं जिनका कभी जन्म ही नहीं हुआ पर वह विधवा पेंशन ले रही थीं। प्रधानमंत्री ने इनकी संख्या 3 करोड़ बताई। यहां पर यह बात भी उल्लेखनीय है कि कश्मीर में भी ऐसे अनेक अलगाववादी आतंकवादी सोच के लोग रहे जिन्हें कांग्रेस की सरकार करोड़ों रुपया यह सोच कर देती रही कि इससे वह देश की मुख्यधारा में सम्मिलित होकर काम करेंगे , पर ऐसा हुआ नहीं। मोदी सरकार ने निसंकोच ऐसे अलगाववादियों को अलगाववादी कहा और उनकी ऐसी सरकारी सुविधाऐं समाप्त कर दी गईं। सचमुच मोदी जी का यह एक ऐतिहासिक निर्णय था। उस समय इस निर्णय पर भी विपक्ष के सेकुलर गैंग ने शोर शराबा किया था, पर आज इस पर कोई चर्चा नहीं होती। क्योंकि सबने इस बात को मान लिया है कि मोदी जी के द्वारा उस समय एक ऐसी गलती को सुधारा गया था जो देश विरोधियों को प्रोत्साहित करते हुए सरकार के द्वारा की जा रही थी।
हम सभी यह भली प्रकार जानते हैं कि आज भारत विश्व की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्था है। सुनियोजित विकास के लिए सुनियोजित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है और यह बात इस डिजिटल अर्थव्यवस्था में स्पष्ट दिखाई देती है। इस डिजिटल अर्थव्यवस्था के चलते सस्ता मोबाइल मिलना आरंभ हुआ। इससे देश के युवाओं का दृष्टिकोण बदला। देश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हुए।
देश के इतिहास में हजारों वर्ष से मछुआरे अपनी आजीविका के लिए मछली पालन को एक उद्योग के रूप में अपनाते चले आए हैं। परंतु इनके लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था । आजादी के बाद मछुआरों और मछली उद्योग के लिए निश्चित रूप से एक अलग मंत्रालय की आवश्यकता थी, पर ऐसा किया नहीं गया। यद्यपि भारत का बहुत बड़ा भाग समुद्र से जुड़ा होने के कारण बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनका मछली पालन से आजीविका का संबंध जुड़ा हुआ है। मोदी जी ने इन सभी लोगों के कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय की स्थापना की। पशुओं के स्वास्थ्य और चिकित्सा के प्रति भी सरकार ने गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाते हुए पशुओं को 50 करोड़ से अधिक के टीके लगाए। प्रधानमंत्री के अनुसार यह नये आर्थिक साम्राज्य की नई पहचान है। घरेलू महिलाओं को ग्रहिणी के रूप में मान्यता और सम्मान दिलाने की दिशा में भी मोदी सरकार ने विशेष पहल की। भारत में प्राचीन काल से ही महिला को गृहस्वामिनी का सम्मान सूचक संबोधन दिया जाता रहा है। आज इस दिशा में आगे बढ़ते हुए काम किया गया है । जिसके परिणाम स्वरूप देश की अनेक ग्रहिणियों के नाम से बिजली के बिल, कनेक्शन आते हैं। घर महिलाओं के नाम हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को पहले नौकरी जाने का खतरा रहता था, पर अब 36 सप्ताह की छुट्टी उन्हें मिलती है और इसका वेतन भी उनको यथावत प्राप्त होता रहता है। इससे महिलाओं को विशेष सम्मान प्राप्त हो रहा है।
भारत के परंपरागत समाज में बेटियों को बोझ माने जाने की बीमारी आजादी के बाद भी चली आ रही थी। नई बच्चियों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने कुछ विशेष योजनाएं चलाकर उनके प्रति भी समाज के दृष्टिकोण को बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सुकन्या समृद्धि खाता खोलकर बालिकाओं के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। 3 करोड़ लखपति दीदी बनाकर प्रधानमंत्री ने बालिकाओं के प्रति अपने स्वस्थ राजनीतिक दृष्टिकोण का परिचय दिया है।
हमारे देश में अनेक समुदाय ऐसे रहे हैं जो अपने परंपरागत रोजी-रोटी के माध्यम से आजीविका चलाते हैं। आजीविका के ये साधन वास्तव में हमारी वर्ण व्यवस्था के प्रतीक रहे हैं। कांग्रेस के शासनकाल में परंपरागत रोजगारों को या आजीविका के साधनों को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया। वस्तुत: उस समय इस प्रकार के परंपरागत रोजगारों को समाप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा था। जिससे कुंभकार, बढई, लोहार आदि कामगारों का काम छिनता जा रहा था। उनके कामों को बड़ी-बड़ी कंपनियां छीनती चली जा रही थीं। सरकार इस प्रकार की रोजगार छीनने वाली नीतियों को अपना संरक्षण प्रदान कर रही थी। जिससे देश में भुखमरी, गरीबी, फटेहाली बढ़ती जा रही थी। प्रधानमंत्री ने इस प्रकार बढ़ती हुई भुखमरी, फटेहाली और गरीबी पर अंकुश लगाने के लिए लोगों के परंपरागत रोजगार उन्हें सरकारी नीतियों का लाभ दिलाते हुए दिलाने शुरू किये। जिन क्षेत्रों पर चाइनीज वस्तुओं ने अपना एकाधिकार बना लिया था, देश के लोगों ने उनका माल खरीदना बंद कर दिया है और अपने देश के परंपरागत कामगारों द्वारा बनाई जा रही चीजों को बड़ी शान के साथ खरीद रहे हैं। दीपावली के त्यौहार को ही लें । अब हम चीनी दीपक न लेकर अपने कुंभकार भाइयों द्वारा बनाए जा रहे दीपकों को लेने में रुचि दिखाने लगे हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वकर्मा साथियों के लिए विश्वकर्मा योजना लागू की। 55 करोड लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किया गया। जिससे गरीब लोगों को सरकारी अस्पतालों में जाकर अपना उपचार करवाने में सुविधा प्राप्त हुई है। यह बात और भी अधिक अच्छी है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ऐसे कार्ड जारी करने से पहले किसी का मजहब नहीं पूछा। 11 करोड़ परिवारों को पीने का शुद्ध पानी नलों से दिया जा रहा है। 80 करोड लोगों को मुफ्त अनाज की सुविधा प्रदान की गई है। जिससे देश में लोगों ने राहत की सांस ली है। अनेक परिवारों की यह चिन्ता समाप्त हो गई है कि शाम को रसोई में कुछ बनेगा या नहीं। अनेक रेहड़ी पटरी वाले लोगों को भी सरकारी लोन अब मिल सकता है। जिससे वह अपनी आजीविका चलाने के लिए कोई साधन तैयार कर पा रहे हैं। सकारात्मक परिणाम देने वाली इन नीतियों के चलते प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में 25 करोड लोगों को गरीबी से बाहर लाने में सफलता प्राप्त हुई।
यह सारे आंकड़े बता रहे हैं कि सरकारी नीति में नीतियों में आलोचना की कोई गुंजाइश हो सकती है पर उनका दृष्टिकोण निश्चित रूप से राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है जनकल्याण करना ही लोकतंत्र में राजनीति और शासन का उद्देश्य होता है। इसी को प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रनीति के नाम से पुकारते हैं। वास्तव में देश के लिए राजनीति की ओच्छी चालों की बजाय राष्ट्रहित को दृष्टिगत रखकर काम करने वाली शुद्ध, विशुद्ध ,परिशुद्ध राष्ट्रनीति की ही आवश्यकता है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

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