उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास प्राधिकरण: *सबसे बड़ा कौन और क्यों?

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-राजेश बैरागी-
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने आगामी वित्त वर्ष 2024-25 के लिए लगभग दस खरब रुपए के बजट का प्रावधान किया है जबकि सबसे अमीर प्राधिकरणों में शुमार नोएडा प्राधिकरण का प्रस्तावित बजट सात हजार करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। क्या यीडा की विकास की गाड़ी नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों से काफी निकल गई है? यह जानना बेहद दिलचस्प तो है ही, इसके लिए पिछले पांच छः वर्षों में हुए विशेष कार्यों को जानना भी आवश्यक है।
मौजूदा वित्त वर्ष के पांच हजार छः सौ तीस करोड़ के बजट के सापेक्ष यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अगले बजट में लगभग दोगुनी छलांग लगा दी है। वर्ष 2024-25 के लिए 9992 करोड़ रुपए से अधिक का बजट कल मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में पास कर दिया गया। इसमें से छः हजार करोड़ रुपए अकेले एक मद भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे जबकि दो हजार करोड़ रुपए से प्राधिकरण क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का विकास किया जाएगा।इसी बजट से प्राधिकरण अपने ऊपर चल रहे ऋण में से साढ़े छः सौ करोड़ रुपए भी चुकाएगा। मौजूदा वित्त वर्ष में भी साढ़े पांच सौ करोड़ रुपए का कर्ज चुकाया गया है। यह कम दिलचस्प नहीं है कि कुछ वर्ष पहले यीडा ने अपने दैनिक खर्चों को चलाने के लिए नोएडा प्राधिकरण से मात्र डेढ़ सौ करोड़ रुपए कर्ज मांगा था।तब रमा रमण यीडा और नोएडा प्राधिकरण के संयुक्त रूप से अध्यक्ष थे। इसके बावजूद यीडा की खराब माली हालत को देखते हुए रमा रमण ने बतौर नोएडा अध्यक्ष यीडा के ऋण प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। आगामी वित्त वर्ष में उत्तर प्रदेश सरकार यीडा को लगभग अड़तीस सौ करोड़ रुपए का ऋण देने के लिए तैयार बैठी है। ऐसा परिवर्तन कैसे हो गया? दरअसल पिछले आठ वर्षों से निरंतर मुख्य कार्यपालक अधिकारी का दायित्व संभाल रहे आईएएस डॉ अरुणवीर सिंह की सबको साथ लेकर चलने की कार्यशैली और दूरदर्शिता ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को विकास की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। जेवर में बन रहे अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, फिल्म सिटी, हेरिटेज सिटी, औद्योगिक सेक्टरों, आवासीय सेक्टरों के निरंतर विकास से यह प्राधिकरण नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को पीछे छोड़ता जा रहा है। डॉ अरुणवीर सिंह की एक विशेषता ने इस प्राधिकरण को अन्य प्राधिकरणों से काफी आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। यह विशेषता है प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों से सीधा संवाद और उनसे किए गए वादों के लिए किसी भी सीमा तक चले जाना। प्रतिदिन सुबह से शाम तक चलने वाले जनता दरबार में मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मिलकर निकलने वाले लोगों के चेहरे से पहचाना जा सकता है कि उन्हें किस प्रकार की संतुष्टि प्राप्त हुई है। ऐसे अवसरों पर जब अन्य अधिकारी नियम कानून के कारण किसी मुद्दे पर सहमत नहीं होते, सीईओ अकेले स्वयं हस्ताक्षर कर कागज को आगे बढ़ा देते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के किन्हीं प्रकरणों में चल रही एस आई टी की जनसुनवाई में एक दिन एक किसान अपने पक्ष को रखने में सफल नहीं हो पा रहा था। बतौर एस आई टी अध्यक्ष डॉ अरुणवीर सिंह ने उसे उसका पक्ष समझाकर मामले का निस्तारण कर दिया। ऐसा हमेशा होता है।(नेक दृष्टि)

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