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चीन को समझ लेना चाहिए कि भारत की कमान इस समय मोदी के हाथों में है नेहरू के हाथों में नहीं

सुभाष चन्द्र
आज समाचार था कि शनिवार 9 मार्च को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरुणाचल प्रदेश के दौरे से जिनपिंग का चीन भड़क रहा है और विरोध जताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा है कि “जेंगनान (अरुणाचल प्रदेश) चीन का क्षेत्र है, भारत वहां की स्तिथि में बदलाव न करे, इससे सीमा का मसला और ज्यादा जटिल हो जाएगा”।

जिनपिंग अपने साथ MOU साइन की हुई कांग्रेस के साथ मिलकर जितना मर्जी षड़यंत्र रच ले लेकिन उसे एक बात समझ लेनी चाहिए कि सामने अब न नेहरू है और न तुमसे खौफ खाने वाली मनमोहन सिंह की सरकार है बल्कि तुमसे आंख में आंख डाल कर बात करने वाला मोदी है। अरुणाचल प्रदेश किसी के बाप की जागीर नहीं है जो हलवा समझ कर खा लोगे।
कांग्रेस समय के रक्षा मंत्री ए के अंटोनी ने संसद में कहा था कि हम चीन की सीमा पर सड़कें जानबूझकर नहीं बनाते क्योंकि उससे डर है कि चीनी सेना उन सड़कों से ही भारत में घुस सकती है, यह बेवजह का खौफ नहीं था बल्कि लगता है CPC-Congress के बीच 2008 में साइन हुए MOU की शर्त रही होगी कि चीन की सीमा पर भारत कोई Infrastructure का निर्माण नहीं करेगा।

लेकिन पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने चीन की सीमा पर सड़कों का जाल बिछा दिया और हर क्षेत्र को भारतीय सेना की पहुंच में खड़ा कर दिया गया, किसी भी क्षेत्र में सेना की रसद भेजी जा सकती है, संवेदनशील क्षेत्रों में जिनमे गलवान भी शामिल है हर तरह सेना को मजबूत किया गया है जिसकी वजह से चीन आज आंख उठाने की हिम्मत नहीं करता, उसी अरुणाचल में शनिवार को भारत द्वारा चीन की सीमा से लगते हुए इलाके में 13000 फ़ीट ऊंचाई पर 825 करोड़ की लागत से बनाई गई “सेला सुरंग” को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया है जबकि कांग्रेस सरकार एक सड़क भी नहीं बनाती थी।

यह सेला टनल असम के तेजपुर जिले को अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले से जोड़ती है जिससे पूरे वर्ष आवागमन जारी रहेगा और सेना की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक पहुंच कायम रहेगी। यह चीन के लिए एक बड़ी चेतावनी है और शायद इसलिए कांग्रेस ने इस टनल बनने पर सरकार को बधाई नहीं दी है।

अभी 3 दिन पहले भारत ने चीन की छाती पर टनल बना कर शंखनाद किया था और कल DRDO ने अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर चीन समेत दुनिया के सभी शक्तिशाली देशों को अपनी क्षमताओं का परिचय दे दिया। इस मिसाइल का नाम ही “दिव्यास्त्र” रखा गया है जिसका मतलब समझ आने से ही चीन को चेतावनी मिल जाएगी।

इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत अब अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस जैसे देशों के बाद छठा देश बन गया जिसके पास एमआईआरवी तकनीक (मल्टीपल इंडेपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) पर आधारित मिसाइल सिस्टम है। इस मिसाइल से दुश्मन के कई ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है। यूरोप के कुछ देशों समेत पूरा एशिया अग्नि-5 की जद में होगा यानी पूरा चीन भी। यह मिसाइल बड़ी बड़ी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को भी चकमा दे सकती है।

ये मोदी के 10 वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है जो चीन और पाकिस्तान जैसे शत्रु देशों के लिए खतरे की घंटी है और कांग्रेस इन दोनों देशों की “मित्र पार्टी” है यानी भारत की शत्रु कांग्रेस भी है क्योंकि शत्रु का मित्र शत्रु ही होता है।
इंडिया फर्स्ट से साभार

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