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आज का चिंतन

किसी को पता नहीं कि कल का उगता हुआ सूरज मैं देख भी पाऊंगा या नहीं

      *"कल सुबह का सूर्योदय कौन देखेगा, और कौन नहीं?"* इस बात का किसी को भी कोई पता नहीं है। यानि *"मृत्यु कभी भी आ सकती है।"* यह एक सत्य है, जिसे वास्तविक रूप से जानने वाले लोग संसार में बहुत कम हैं। *"इस बात को शाब्दिक रूप से जानने वाले लोग तो संसार में बहुत से हैं। परन्तु शाब्दिक ज्ञान से पूरा कल्याण नहीं होता।"*
       मृत्यु आने से पहले न तो हमें कोई सूचना देती है, और न ही कोई हमसे स्वीकृति लेती है। *"आजकल की भाषा में इसे OTP कहते हैं।"*
   जब आपको बैंक से पैसे निकालने होते हैं, तब बैंक आपको OTP के माध्यम से जानकारी देता है। आपसे स्वीकृति लेता है, कि *"आप इतने पैसे निकाल रहे हैं।" "तब बैंक से प्राप्त हुए उस OTP को यदि आप उस व्यवहार (transaction) में डालेंगे, तो आपको  पैसे मिलेंगे, अन्यथा नहीं।"*

चलो यहां तो मान लिया कि बैंक आपको OTP भेजता है।
“परंतु जब मृत्यु आती है, तब तो ईश्वर उसका कोई OTP आपको नहीं भेजता। वह तो आपको बिना बताए, बिना पूर्व सूचना दिए कभी भी आ सकती है।”
“यदि किसी दिन अचानक किसी भी रूप में मृत्यु आप के सामने आ जाए, तो ऐसी स्थिति में आपके उस अभिमान का क्या होगा?” जो आप धन के कारण, बल के कारण, विद्या के कारण, शक्ति के कारण, रूप सौंदर्य के कारण, जवानी के कारण, आपके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है। “तब आपका सारा अभिमान एक क्षण में चूर चूर हो जाएगा। और आपके पास विद्यमान सारी भौतिक वस्तुएं मिल कर भी आपकी रक्षा नहीं कर पाएंगी।”
“इसलिए भौतिक धन संपत्ति आदि का अभिमान कभी भी न करें। नम्रता सभ्यता बुद्धिमत्ता और शिष्टाचार से जीवन को जिएं, तभी आपका जीवन सफल होगा अन्यथा नहीं।”
—- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।”

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