ओरछा में महाराजा मधुकर शाह की #रानी_गनेश_कुँवरि

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ओरछा में महाराजा मधुकर शाह की #रानीगनेशकुँवरि का नाम कमला भी था । #महराजावीरसिंहजूदेव_प्रथम का कार्यकाल बुंदेलखंड का स्वर्णयुग कहा जाता है इस काल में बुंदेलखंड की शिल्प कला साहित्य व्यापार चित्रकला आदि चर्मोत्कर्ष पर थी । वीर सिंह जू देव ने अबुलफजल को सन 1602 में मारकर अकबर की दिल्ली सल्तनत में सिहरन पैदा कर दी थी ।
महराज वीर सिंह के तीन विवाह हुए थे (1) शाहाबाद के दीवान श्याम सिंह धंधेरे की कन्या अमृत कुंअरि से पाँच पुत्र जुझार सिंह पहाड़ सिंह नरहरिदास तुलसीदास बैनीदास हुए जिनमें जुझार सिंह ओर पहाड़ सिंह ओरछा के राजा बने नरहरिदास को घामौनी तुलसीदास को मऊ तथा बेनीदास को पहारी की जागीर दी गई थी । (2) दूसरी शादी कैरूआ के प्रमार सिंह की कन्या गुमान कुअरि से चार पुत्र दिमान हरदौल को बडागांव भगवंतराव को दतिया चन्द्रभान को जैतपुर कौंच आदि परगने व किशुनसिंह को देवराहा की जागीर मिली पुत्री कुंजावति का विवाह दतिया के राजा देवी सिंह के साथ हुआ था इन्हीं की गद्दी पर भगवंतराव गए थे ।(3) तीसरी शादी शाहाबाद के पूरन सिंह धंधेरे की कन्या पंचम कुंअरि से तीन पुत्र बाघराज गर्रोली के जागीरदार माधव सिंह को #खरगापुर और परमानंद ओरछा में ही रहे ।
महराज वीर सिंह जू देव प्रथम ने चतुर्भुज मंदिर का निर्माण पूर्ण कराया और सन 1606 में सवा मन #सोने का कलश भी चढ़ाया गया था । जिसकी अगस्त 1970 से नवंबर 1970 तक लगातार चोरी होती रही और अंतंतः पूरा कलशा 1970 में चोरी चला गया जिसकी तहक़ीक़ात आज तक पूरी नहीं हुई ।कई बड़े बड़े राजनेता और प्रशासनिक पुलिस अधिकारी इस चोरी में शामिल होने की जनचर्चा रही है और कहा जाता है कि कलशा चोरी के आरोपियों को यह चोरी हज़म नहीं हुई और उनकी बड़ी दुर्गति हुई । परंतु दुख इस बात का है कि इतनी बड़ी चोरी का पूर्णतः खुलासा करने में किसी सरकार ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की ।
पहली चोरी 18/19 अगस्त 1970
दूसरी चोरी 12/13 सितंबर 1970
तीसरी चोरी 22/23 सिंतबंर 1970
चौथी चोरी 13/14 अक्तूबर 1970
अंतिम चोरी जिसमें पूरा #कलशा चला गया 5/6 नवंवर 1970 को हुई थी ।
महराज वीर सिंह जू देव ने दिसंबर 1618 में 52 इमारतों का शिलान्यास किया था ।बताया जाता है कि उस समय ओरछा राज्य में अकाल की स्थिति बनी हुई थी इन निर्माण के कारण ओरछा की प्रजा को भरण पोषण के लिए पर्याप्त रोज़गार भी मिला था । जिन का निर्माण कार्य हुआ उनमें मथुरा में 1-कृष्ण जन्मभूमि पर बना विशाल #केशवराय मंदिर 33 लाख रूपए व्यय कर बनवाया था ।2-#दतिया का किला ( नौ खंडा महल )-35 लाख । 3-जहांगीर महल ओरछा , 4-#झाँसी का क़िला , 5- दतिया और भांडेर के बीच चन्देवा की बावडी, 6-दतिया के पास सिंध नदी के किनारे प्रसिद्ध धूमेश्वर महादेव मंदिर , 7-मडि़या के निकट वीर सागर ,8- कुडार में सिंह सागर ,9- दिनारे में देव सागर नामक तीन बड़े तालाब ,10- काशी में मणिकर्णिका घाट , 11-विश्वेश्वर मंदिर 12-सिरौल में शिवालय , 13-ओरछा का चतुर्भुज मंदिर ,
ब्रज में अनेक मंदिर कुंड घाट बनवाए जिनमें से अधिकांश आज भी देखे जा सकते हैं ।14- वृदांवन में हरीराम व्यास की समाधि 15- कालीदह घाट 16-इमला घाट 17-ऊँची हवेली 18-महाप्रभु की बैठक 19- बुंदेला बाग 20-व्यास जी की बगीची ( यह यमुना की बाढ़ में बह गई है) 21-बैन कूप 22-वन खंडेश्वर महादेव ( वृंदावन के व्यास सेरा मोहल्ले में 23- चतुरदासी की बगीची 24-वीर सिंह गली ( वृंदावन में राधावल्लभ मंदिर के पास 25-टकसाल गली में एक भवन 26-बृह्म कुंड 27-सेठ दिवाली 28-विश्राम घाट 29-काशी शेषसायी भगवान का मंदिर 30- बरसाने में श्री लाड़ली जी का मंदिर 31- कोकिला वन में कुंड 32- वन्सीवट साकेत 33- वरसाने का कुंड 34-विमला देवी का मंदिर 35-वृंदावन में श्री विहारी जी का मंदिर 36- गोकुल में गोप कूप 37- यमलार्जुन का मंदिर 38- नारद कुंड(कुशल सरोवर के पास) 39- कल्लोल कुंड गोवर्धन 40- गोपाल कुंड जतीपुरा 41-गुलाल कुंड गठौली42-चौरासी खंभा का भवन 43-गोविन्द कुंड अन्यौर 44- गोविन्द जी का मंदिर अन्यौर 45-मदनमोहन जी का मंदिर महावन 46- अक्रूर घाट का देवालय 47-दाऊ जी का मंदिर हसंराज 48-नर्मदा तट पर मंदिर और दुर्ग 49- मोंठ में वावरी 50- ओरछा का बगीचा 51 ओरछा में सावन -भादों(राज वेधशाला )52 पिछोर #खनियाधाना में क़िला वावरी और तालाब । इन 52 भवनों के साथ साथ भी अनगिनत शिलान्यास भवन बनवाए । घामौनी का क़िला एवं ओरछा में लक्ष्मी जी का मंदिर ,वनवासी भगवान का मंदिर भी महराज वीर सिंह जू देव के कार्यकाल में वनवाए गए ।गढ़ कुडार क़िले का जीर्णोद्धार भी इनके कार्यकाल में करवाया गया ।
वीर सिंह जू देव की महेबा के जागीरदार और ओरछा राजपरिवार के ही वंशज #छत्रसाल के पिता #चंपतराय से बहुत बनती थी । जहांगीर के बाद शाहजहाँ के शासन में वीर सिंह जू देव और चंपतराय की जुगलबंदी में कई युद्ध मुगल सेना के खिलाफ लड़े गए ।

साभार- धर्मेंद्र सिंह बुंदेला पड़रा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश
9630477245

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