भारत में विवाह समारोहों की अर्थव्यवस्था

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NEW DELHI, INDIA - JANUARY 31: 'Divyang' (endowed with special faculties) and underprivileged 'Vivah Samaroh' (marriage ceremony) was organized by Udaipur-based Narayan Seva Sansthan for the differently-abled citizens at Janmasthmi Park where around 100 marriages took place, at Punjabi Bagh on January 31, 2016 in New Delhi, India. (Photo by Virendra Singh Gosain/Hindustan Times via Getty Images)

भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार पवित्र शादियों के धार्मिक संस्कारों के माध्यम से दो आत्माओं का मिलन कराया जाता है। कहा तो यहां तक भी जाता है कि दूल्हा और दुल्हन शादी के धार्मिक संस्कारों के माध्यम से सात जन्मों तक के लिए एक दूसरे के हो जाते हैं। इसलिए, शादी के समय विभिन्न अध्यात्मिक, धार्मिक एवं सांसारिक संस्कारों को सम्पन्न कराने के लिए समाज के गणमान्य नागरिकों, नाते रिश्तेदारों, परिवार के सदस्यों को साथ लेकर विभिन्न प्रकार के भव्य आयोजन सम्पन्न किए जाते हैं। इन आयोजनों में विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न होते हैं एवं आजकल तो ऐसे शुभ अवसरों पर भारी मात्रा में व्यय भी किया जा रहा है। शादी के विभिन्न आयोजनों पर किए जाने वाले भारी भरकम खर्च से देश की अर्थव्यवस्था को बल मिलता हुआ दिखाई दे रहा है।

भारत में नवम्बर 2023 माह से लेकर आगामी लगभग 4 माह के दौरान 38 लाख से अधिक शादियों के आयोजन सम्पन्न होने जा रहे हैं। केवल 4 माह की इस अवधि में लगभग 4.75 लाख करोड़ की राशि का व्यय होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 35 लाख शादियों पर 3.75 लाख करोड़ रुपए की राशि का व्यय हुआ था। कन्फेडरेशन ओफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अनुसार, भारत में इस वर्ष शादियों के मौसम में सबसे अधिक खर्च करने का विश्व रिकार्ड बनाया जा सकता है। पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में इस वर्ष एक लाख करोड़ रुपए अधिक राशि शादियों पर खर्च होने जा रही है। शादी के विभिन्न कार्यक्रमों में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च के सम्बंध में भी अनुमान लगाए गए हैं। इन अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष नए कपड़े और नई ज्वेलरी को खरीदने की मद पर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होने वाली है, मेहमानों की खातिरदारी पर 60,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होने जा रही है, शादी समारोह से जुड़े कार्यक्रमों पर 60,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होने जा रही है। विश्व का कोई भी देश शादियों के मौसम में इतनी भारी भरकम राशि का खर्च नहीं करता दिखाई दे रहा है क्योंकि अन्य देशों में शादी के समारोहों पर इतना खर्च किया ही नहीं जाता है। यह तो भारतीय सनातन संस्कृति ही है जिसके अंतर्गत शादी के समय विभिन प्रकार के संस्कार सम्पन्न कराने के उद्देश्य से कई प्रकार के आयोजन सम्पन्न किए जाते हैं। आज विकसित देशों में तो विवाह नामक संस्था उपलब्ध ही नहीं है और “लव मैरिज” नामक रिवाज का पालन किया जा रहा है। साथ ही अब तो बगैर विवाह के “लिव इन रिलेशन” नामक रिवाज ही चल पड़ा है। विकसित देशों के युवा इस प्रकार के रिवाजों के चलते बच्चे भी पैदा नहीं कर रहे हैं और कुछ समय पश्चात ही आपस में रिश्तों को “तलाक” का रूप दे देते हैं। यदि इस बीच किसी जोड़े को बच्चा हो भी जाता है तो उसे “सिंगल पेरेंट” के रिवाज के तहत केवल मां के पास ही रहना होता है। इस प्रकार वह बच्चा अपने पिता के प्यार से वंचित रहता है और उस बच्चे का मानसिक विकास नहीं हो पाता है। इन्हीं कारणों के चलते आज विश्व के कई देशों में बुजुर्गों की संख्या तो बढ़ती जा रही है परंतु युवाओं की संख्या कम होती जा रही है, जिसका सीधा सीधा प्रभाव इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

अतः कुल मिलाकर यह सनातन संस्कृति के संस्कार ही हैं जो भारत में आज भी कुटुंब व्यवस्था को जीवित रखे हुए हैं। संयुक्त परिवार सामान्यतः केवल भारत में ही दिखाई देते हैं, जहां बुजुर्गों की देखभाल इन संयुक्त परिवारों में बहुत ही सहज तरीके से होती है। अन्यथा, विकसित देशों में चूंकि संयुक्त परिवार का चलन नहीं के बराबर है अतः बुजुर्गों की देखभाल इन देशों की सरकार को “सोशल बेनीफिट्स” योजना के अंतर्गत करनी होती है। आज कुछ देशों में तो “सोशल बेनीफिट्स” की मद पर इतना अधिक खर्च होने लगा है कि इन देशों की बजट व्यवस्था ही भारी दबाव में आ गई है। इसके ठीक विपरीत, भारत में विभिन्न त्यौहार भी बड़े ही उत्साह से मनाए जाते है जिसके कारण भारत में सामाजिक तानाबाना ठीक बना हुआ है। इसी सामाजिक तानेबाने के ठीक अवस्था में रहने के चलते ही इस वर्ष, दीपावली एवं धनतेरस के त्यौहारी मौसम में भारत में 3.75 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ है। साथ ही, केवल करवा चौथ के दिन 15,000 करोड़ रुपए का व्यापार सम्पन्न हुआ था।

भारत में त्यौहारी मौसम में अक्टोबर 2023 माह में 23 लाख वाहनों की बिक्री हुई है। 4 लाख चारपहिया वाहन एवं 19 लाख दोपहिया वाहनों की बिक्री हुई है। आने वाले शादियों के मौसम में भी इस वर्ष वाहनों की जबरदस्त बिक्री होने की सम्भावना है। उक्त वर्णित कारणों के चलते ही भारत में तेजी से गरीबी एवं बेरोजगारी भी कम हो रही है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2022-23 में दक्षिण अफ्रीका में बेरोजगारी की दर 32.8 प्रतिशत रही है और ईरान में 9.4 प्रतिशत, ब्राजील में 8.3 प्रतिशत, पाकिस्तान में 8.5 प्रतिशत, फ्रान्स में 7.4 प्रतिशत, इटली में 7.9 प्रतिशत, चीन में 5.3 प्रतिशत, ब्रिटेन में 4.2 प्रतिशत और अमेरिका में 4 प्रतिशत बेरोजगारी की दर पाई गई है। उक्त आंकड़ों के विपरीत भारत में इस अवधि के दौरान बेरोजगारी की दर में बहुत कमी दृष्टिगोचर हुई है।

आज भारत में उच्च निवल सम्पत्ति वाले नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अतः समस्त मेहमानों सहित अब विदेश में जाकर शादी की रस्में सम्पन्न करने का प्रचलन भारत में बहुत बढ़ गया है। अभी हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को देश के नागरिकों से यह अपील करनी पड़ी है कि विदेश में जाकर शादी की रस्में पूर्ण नहीं करे क्योंकि इससे शादी की रस्मों पर होने वाले व्यय का लाभ उस देश को मिल रहा है जबकि भारत में ही पर्याप्त मात्रा में पर्यटन स्थल उपलब्ध हैं, जहां आसानी से शादियां विधि विधान से सम्पन्न कर विवाह समारोह भी आयोजित किए जा सकते हैं। इससे शादी पर होने वाले खर्च का लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा और देश का पैसा भी देश में ही बना रहेगा।

आज भारतीय नागरिकों द्वारा सनातन संस्कृति के संस्कारों के पालन का लाभ भी भारतीय अर्थव्यवस्था को निश्चित रूप से स्पष्टत: मिलता दिखाई दे रहा है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की दर को लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। अभी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मोनेटरी फंड ने केलेंडर वर्ष 2024 के लिए भारत में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है, जबकि अमेरिकी में यह वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत, जर्मनी में 0.9 प्रतिशत, फ्रान्स में 1.3 प्रतिशत, जापान में रिणात्मक 1 प्रतिशत, चीन में 4.2 प्रतिशत और रूस में 1.1 प्रतिशत विकास दर रहने का अनुमान लगाया गया है।

प्रहलाद सबनानी

सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,

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