महाभारत की शिक्षाप्रद कहानियां अध्याय- १३ ख ज्ञानी पुत्र का पिता को उपदेश

images (50)
   बालक ने कहा कि नदियों का प्रभाव सदा आगे की ओर ही बढ़ता है। वह कभी पीछे की ओर नहीं लौटता । उसकी निरंतर साधना का राज आगे बढ़ने में छिपा है। इसी प्रकार रात और दिन भी मनुष्य की आयु का अपहरण करके मानो उसे खाते जा रहे हैं। यह बार-बार आ रहे हैं और व्यतीत होते चले जाते हैं ।साधारण लोगों का ध्यान इस ओर कभी नहीं जाता। यद्यपि ज्ञानी पुरुष इस सच्चाई को समझ कर जीवन को सहज, सरल और सरस बनाने का प्रयास करते रहते हैं।"
अपने ज्ञानी पुत्र के मुखारविंद से इस प्रकार के शब्दों को सुनकर पिता की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी। भीतर ही भीतर पिता को प्रसन्नता भी हो रही थी कि उसका पुत्र कितना विद्वान है? पुत्र ने अपने संवाद को जारी रखते हुए आगे कहा कि "पिताश्री ! मैं इस बात को अच्छी प्रकार जानता हूं कि मृत्यु किसी के लिए भी क्षण भर की देरी भी नहीं कर सकती ।  वह रुक नहीं सकती और मैं उसके जाल में फंसा हुआ ही भ्रमण कर रहा हूं। जब यह शरीर क्षणभंगुर है और मृत्यु कभी भी इसे नष्ट कर सकती है तब मैं थोड़ी देर के लिए भी प्रतीक्षा करूं , मेरे द्वारा यह संभव नहीं है। मानव जीवन का उद्देश्य चलते रहना है। ठहर जाना साक्षात मृत्यु का वर्ण करना है। इसलिए चलते रहने की प्रवृत्ति को जीवन में साक्षात रूप में अपनाना चाहिए। चलते रहना ही जीवन है और रुक जाना ही मृत्यु है। थक कर बैठ जाना भी जीवन के अनमोल पलों को व्यर्थ में खोने के समान है। आलसी और निकम्मे लोग कभी जीवन का निर्माण नहीं कर सकते। वह उसे व्यर्थ की बातों में खो डालते हैं । अच्छी बात यही होगी कि थको मत, रुको मत , आगे बढ़ो। और भी अधिक ज्ञान अर्जित कर जीवन को निर्मल करने का प्रयास करते रहो।   इस बात का सदा ध्यान रखो कि एक-एक रात्रि बीतते जाने से आयु घटती जा रही है।"

उस ज्ञानी बालक ने अपने पिता से कहा कि “यदि कोई रात्रि ऐसी आ जाती है जिसके बीतने के बाद मनुष्य कोई शुभ कर्म न करे तो उस दिन को व्यर्थ ही बीत गया समझना चाहिए। संसार में रहकर मनुष्य को कामनाएं घेरे रहती हैं। ये कभी पूर्ण नहीं होतीं , इनके पूर्ण करने के चक्कर में फंसा आदमी अनायास ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। जैसे चरती हुई भेड़ों को अचानक ही व्याघ्री उठाकर चलती बनती है, वैसे ही मृत्यु भी अकस्मात आकर हमें दबोच लेती है। इसलिए किसी शुभ कार्य के करने के लिए किसी मुहूर्त की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। उसे यथाशीघ्र संपन्न कर लेना चाहिए । चलते समय कौन सा कार्य अधूरा रह जाए , यह कुछ पता नहीं है। कोई भी काम कल पर नहीं छोड़ना चाहिए । जो कल करना है उसे आज ही निपटा लेना चाहिए । ध्यान रहे कि मृत्यु कभी भी हमसे आकर यह नहीं पूछती कि तुम्हारा कौन सा काम अधूरा पड़ा है और कौन सा पूरा हो गया है? इससे पहले की मृत्यु हम पर झपट्टा मारे और व्याघ्री की भांति हमको घसीट कर ले जाए, हमें जीवन को उत्कृष्टता में ढाल लेना चाहिए।”
बालक ने अपने पिता से आगे कहा कि “पिताश्री! जब व्यक्ति की युवावस्था हो, उस समय ही उसे धर्म का पालन करने का अभ्यास कर लेना चाहिए। इस प्रकार के आचरण से उसकी कीर्ति में चार चांद लग जाते हैं। मृत्यु हर व्यक्ति की आती है। यह दुर्बल या बलवान को नहीं देखती। ना शूरवीर और कायर को देखती , ना ही मूर्ख और विद्वान को देखती। संसार का कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसकी कामनाओं की पूर्ति के बाद ही मृत्यु आई हो। सबकी मृत्यु कामनाओं के शेष रहते ही आ जाती है। पिताजी! इस शरीर में मृत्यु, बुढ़ापा, रोग और अनेक कर्म से होने वाले दुखों का आक्रमण होता ही रहता है। तब आप स्वस्थ से होकर क्यों बैठे हैं?”
“पिताश्री! जब कोई देहधारी जीव जन्म लेता है तब से ही मृत्यु और बुढ़ापा उसका अंत करने के लिए उसके पीछे लग जाते हैं। ऐसा ज्ञानी पुरुषों का कथन रहा है। सत्य में अमृतत्व है, इसलिए मनुष्य को सत्यव्रत का आचरण करना चाहिए। मन और इंद्रियों का संयम करना चाहिए। इन सब के द्वारा ही मनुष्य मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है। अमृत और मृत्यु दोनों हमारे शरीर में ही स्थित हैं। मनुष्य को हिंसा से दूर रहना चाहिए। किसी भी निरपराध प्राणि की हत्या नहीं करनी चाहिए। मैं भी हिंसा से दूर रहकर सत्य की खोज करने पर ध्यान दूंगा। काम और क्रोध को दूर हटा दूंगा। दु:ख और सुख में समान भाव रखूंगा। सबके लिए कल्याणकारी बनकर देवताओं के समान मृत्यु के भय से मुक्त हो जाऊंगा।”
“अच्छे जीवन यापन के लिए मन और वाणी दोनों को एकाग्र करने का अभ्यास करना चाहिए। मनुष्य को त्याग, तप और सत्य से संपन्न होना चाहिए। संसार में सत्य के समान कोई तप नहीं है, ज्ञान के समान कोई नेत्र नहीं है। राग के समान कोई दु:ख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है।”
अंत में उस बालक ने कहा कि “ब्राह्मण देव ! जब आप एक दिन मृत्यु का ग्रास बन ही जाएंगे तो आपको इस धन से क्या लेना देना ? धन की क्षणभंगुरता को तुम शाश्वत और सनातन क्यों माने बैठे हो ? इस धन से अपने आपको अलग हटाकर परमपिता परमेश्वर के ध्यान में चित्त लगाओ। उसके आनंद धन को प्राप्त करो। संसार के संबंधियों से अपने आपको विरक्त रखने का अभ्यास करो।
संसार में रहकर स्त्री आदि के संसर्ग से किसी भी कार्य की सिद्धि नहीं हो पाती। अपने हृदय के भीतर ही बैठे हुए परमात्मा को खोज कर उससे वार्तालाप करने का अभ्यास करना चाहिए। उस सर्वनियंता परमपिता परमेश्वर से जितना ही अधिक निर्मल संवाद करने का अभ्यास बढ़ेगा उतना ही जीवन में आनंद बढ़ेगा। संसार की विषय वासनाओं के बादल छितराएंगे और अमृत की वर्षा का अनुभव सर्वत्र दिखाई देगा। संसार की क्षणभंगुरता और नश्वरता का स्मरण करते हुए मनुष्य को सोचना चाहिए कि हमारे पिता और पितामह कहां चले गए ? किधर और किन गलियों में खो गए? इस प्रकार के भावों से मनुष्य को अपने स्वयं के बारे में बोध होता है और उसे पता चलता है कि जब बाप दादा नहीं रहे तो रहना मुझे भी नहीं है। इसके साथ ही यह भी पता चलेगा कि जब यहां से जाना ही निश्चित है तो सदा सदा रहने के भाव को क्यों पाला जाए और क्यों किसी के साथ अन्याय किया जाए?
अंत में भीष्म जी ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि “राजन ! अपने पुत्र का ऐसा उपदेश सुनकर पिता ने सत्य धर्म का अनुष्ठान किया हुआ सा अनुभव किया। मैं तुमसे भी यही कहूंगा कि सत्य धर्म में सदा तत्पर रहकर यथायोग्य व्यवहार करने का प्रयास करना।”

यह कहानी हमें उपदेश देती है कि संसार की क्षणभंगुरता और नश्वरता को ध्यान में रखकर जीवन यापन करना चाहिए। अनावश्यक किसी को कष्ट नहीं देना चाहिए। अहंकार से दूर रहकर सहज और सरल रहते हुए जीवन जीने का अभ्यास करना चाहिए।

डॉ राकेश कुमार आर्य

( यह कहानी मेरी अभी हाल ही में प्रकाशित हुई पुस्तक “महाभारत की शिक्षाप्रद कहानियां” से ली गई है . मेरी यह पुस्तक ‘जाह्नवी प्रकाशन’ ए 71 विवेक विहार फेस टू दिल्ली 110095 से प्रकाशित हुई है. जिसका मूल्य ₹400 है।)

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
xslot giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş